झारखंड की नई पहचान 'माइंस नहीं, माइंड' होगी, दिल्ली में CM हेमंत सोरेन ने रखा Vision 2050 का रोडमैप
नई दिल्ली में आयोजित नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन-2026 में मुख्यमंत्री Hemant Soren ने झारखंड के लिए Vision 2050 का रोडमैप पेश किया. उन्होंने कहा कि राज्य की नई पहचान केवल खनिज संपदा नहीं, बल्कि लोगों की प्रतिभा, तकनीक और नवाचार होगी.

New Delhi/Ranchi: नई दिल्ली में आयोजित नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन-2026 के उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री Hemant Soren ने झारखंड के विकास का विजन देश और दुनिया के सामने रखा. उन्होंने कहा कि अब झारखंड की पहचान केवल खनिज संपदा से नहीं, बल्कि यहां के लोगों की प्रतिभा, तकनीक और नवाचार से बनेगी. दो दिवसीय इस कार्यक्रम का उद्देश्य राज्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल गवर्नेंस, पर्यटन, उद्योग और निवेश को बढ़ावा देना है. मुख्यमंत्री ने निवेशकों को झारखंड में दीर्घकालिक साझेदारी का भरोसा दिलाते हुए Vision 2050 के तहत राज्य को नई दिशा देने का संकल्प दोहराया.
Vision 2050 के जरिए झारखंड को नई दिशा देने की तैयारी
नई दिल्ली के ताज होटल में आयोजित दो दिवसीय नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन-2026 का शुभारंभ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने किया. कार्यक्रम में राज्य के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, संजय प्रसाद यादव, दीपिका पांडेय सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और देश की प्रमुख आईटी कंपनियों के प्रतिनिधि मौजूद रहे. इस कंसल्टेशन का उद्देश्य झारखंड में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल गवर्नेंस, पर्यटन, उद्योग और नवाचार आधारित निवेश को बढ़ावा देना है. सरकार का मानना है कि आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से प्रशासनिक व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनेगी और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी. Vision 2050 के तहत राज्य को डिजिटल और औद्योगिक रूप से मजबूत बनाने की रणनीति पर भी चर्चा की गई.
'माइंस नहीं, माइंड' होगी झारखंड की नई पहचान
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने संबोधन में कहा कि झारखंड अब केवल खनन आधारित राज्य के रूप में नहीं जाना जाएगा. उन्होंने कहा कि राज्य की सबसे बड़ी ताकत यहां के लोगों की प्रतिभा, ज्ञान और नवाचार की क्षमता है. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि झारखंड की नई पहचान 'माइंस नहीं, माइंड' होगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि अब समय आ गया है जब राज्य प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ शोध, अनुसंधान और तकनीकी विकास पर भी समान रूप से ध्यान दे. उन्होंने बताया कि वर्तमान सरकार के प्रयासों से पहली बार झारखंड को विश्व आर्थिक मंच जैसे वैश्विक मंचों पर अपनी बात रखने का अवसर मिला है और भविष्य में भी राज्य वैश्विक निवेशकों के बीच अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराता रहेगा.
निवेशकों को दिया भरोसा, स्थानीय जरूरतों के अनुसार होगा विकास
मुख्यमंत्री ने निवेशकों से कहा कि झारखंड केवल निवेश समझौतों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि दीर्घकालिक साझेदारी में विश्वास रखता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य किसी अन्य मॉडल की नकल नहीं करेगा, बल्कि अपनी भौगोलिक परिस्थितियों, प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकास की रणनीति अपनाएगा. उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य ऐसा औद्योगिक विकास सुनिश्चित करना है, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिले और राज्य की अर्थव्यवस्था को स्थायी मजबूती मिले. मुख्यमंत्री ने निवेशकों से झारखंड को भविष्य के औद्योगिक और तकनीकी केंद्र के रूप में देखने की अपील भी की.
खनिज संपदा के साथ वैज्ञानिक विकास पर रहेगा जोर
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने झारखंड की खनिज संपदा का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि राज्य के पास यूरेनियम और अभ्रक जैसे महत्वपूर्ण खनिजों का विशाल भंडार है. उनके अनुसार, झारखंड में मौजूद यूरेनियम देश की दीर्घकालिक ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की क्षमता रखता है. हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि इन क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक संसाधनों के उपयोग की अभी काफी आवश्यकता है. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के 14 जिलों में लंबे समय से खनन गतिविधियां चल रही हैं, लेकिन अब जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के साथ वैज्ञानिक एवं टिकाऊ तरीके से विकास करना सरकार की प्राथमिकता है. उन्होंने विश्वास जताया कि झारखंड देश के औद्योगिक विकास में आगे भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा.




