रांची का बर्लिन हॉस्पिटल फिर विवादों में, आदिवासी मरीज के इलाज और बिल को लेकर परिजनों का गंभीर आरोप
रांची के चर्चित बर्लिन हॉस्पिटल में भर्ती मरीज शिवशंकर उरांव के परिजनों ने इलाज में लापरवाही और अनावश्यक बिलिंग का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि मरीज की हालत अस्पताल में भर्ती होने के बाद लगातार बिगड़ती गई और कई बार डिस्चार्ज की मांग के बावजूद अस्पताल ने उन्हें नहीं छोड़ा.

Ranchi: चर्चित बर्लिन हॉस्पिटल एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है. ठाकुर गांव, कांटी टांड़ के रहने वाले शिवशंकर उरांव को 17 जून को इलाज के लिए इस अस्पताल में भर्ती कराया गया था. लेकिन परिजनों का आरोप है कि इलाज के नाम पर उन्हें लगातार गुमराह किया गया और डिस्चार्ज की मांग पर भी अस्पताल ने ध्यान नहीं दिया.
परिजनों का आरोप: हालत बिगड़ी, बिल का दबाव
पीड़ित के परिजनों के मुताबिक, जब शिवशंकर उरांव को अस्पताल लाया गया था तब उनकी स्थिति बेहतर थी. लेकिन भर्ती होने के बाद उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई. परिजनों का कहना है कि कई बार मरीज को डिस्चार्ज करने की मांग की गई, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने उनकी मांग को दरकिनार कर दिया. उल्टा उन पर लंबा-चौड़ा बिल भुगतान करने का दबाव बनाया गया. परिजनों ने इसे "आदिवासी मरीज के साथ ठगी" करार दिया है. उनका कहना है कि झारखंड जैसे आदिवासी बहुल राज्य में इस तरह की घटना अस्पताल की साख पर सवाल खड़े करती है.
अस्पताल का पक्ष: कोई लापरवाही नहीं
वहीं पूरे मामले में बर्लिन हॉस्पिटल प्रबंधन का कहना है कि मरीज के इलाज में कोई लापरवाही नहीं बरती गई. अस्पताल की तरफ से दावा किया गया है कि सभी जरूरी प्रक्रियाओं का पालन किया गया.
सवालों के घेरे में स्वास्थ्य व्यवस्था
इस घटना के बाद एक बार फिर निजी अस्पतालों की मनमानी और बिलिंग को लेकर सवाल उठने लगे हैं. आदिवासी संगठनों ने भी मामले की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है. फिलहाल मामले में स्वास्थ्य विभाग या जिला प्रशासन की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.




