RIMS में फर्जी प्रमाण पत्र रोकने की तैयारी, MBBS एडमिशन से पहले होगी दस्तावेजों की जांच
Ranchi News: RIMS में MBBS एडमिशन से पहले विद्यार्थियों के जाति और आवासीय प्रमाण पत्रों की जांच की जाएगी. फर्जी प्रमाण पत्र के मामलों के बाद RIMS प्रबंधन ने विशेष कमेटी गठित की है. वहीं, 2025 बैच के विद्यार्थियों के दस्तावेजों का भी दोबारा सत्यापन कराया जा रहा है.

Ranchi News: राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) में MBBS दाखिले को लेकर इस बार दस्तावेजों की जांच और सख्त की जा रही है. नामांकन से पहले विद्यार्थियों के जाति और आवासीय प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराया जाएगा. इसके लिए RIMS प्रबंधन ने एक विशेष कमेटी गठित की है, जिसमें डीन, सब डीन समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे. कमेटी दस्तावेजों की जांच के बाद ही एडमिशन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी. किसी प्रमाण पत्र में गड़बड़ी या संदेह मिलने पर संबंधित विद्यार्थी का मामला जांच के लिए कमेटी के पास भेजा जाएगा. यह फैसला पिछले बैच में फर्जी प्रमाण पत्र से जुड़े मामलों के सामने आने के बाद लिया गया है. RIMS अब पुराने बैच के प्रमाण पत्रों की भी दोबारा जांच करा रहा है. वहीं, मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के दौरान JCECEB स्तर पर भी दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर सतर्कता बढ़ाई जा रही है.
RIMS में बनाई गई विशेष कमेटी
MBBS में दाखिले के दौरान दस्तावेजों की जांच के लिए RIMS प्रबंधन ने विशेष कमेटी बनाई है. इसमें डीन, सब डीन और संस्थान के अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं. विद्यार्थियों द्वारा जमा किए गए जाति और आवासीय प्रमाण पत्रों की जांच की जाएगी. किसी दस्तावेज पर संदेह होने की स्थिति में नामांकन को आगे बढ़ाने से पहले उसका सत्यापन कराया जाएगा.
संदेह होने पर रोक दिया जाएगा एडमिशन
RIMS की नई व्यवस्था के तहत सिर्फ प्रमाण पत्र जमा कर देना पर्याप्त नहीं होगा. दस्तावेजों की जांच के दौरान यदि किसी प्रमाण पत्र में गड़बड़ी की आशंका मिलती है तो संबंधित विद्यार्थी का एडमिशन रोक दिया जाएगा. सत्यापन में दस्तावेज सही पाए जाने के बाद ही नामांकन की प्रक्रिया पूरी होगी. इससे फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर मेडिकल सीट हासिल करने की संभावनाओं पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है.
2025 बैच में सामने आए थे तीन मामले
RIMS में यह सख्ती पिछले साल सामने आए मामलों के बाद बढ़ाई गई है. 2025 बैच में फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर दाखिले के तीन मामले सामने आए थे. इनमें MBBS की काजल कुमारी और आशीष कुमार के नाम शामिल थे. वहीं, BDS की छात्रा ओली विश्वकर्मा के जाति प्रमाण पत्र को भी जांच में फर्जी पाया गया था. इसके बाद तीनों विद्यार्थियों का नामांकन रद्द कर दिया गया था.
2025 बैच के दस्तावेजों की भी जांच
फर्जी प्रमाण पत्र से जुड़े मामलों के बाद RIMS प्रबंधन ने 2025 बैच के विद्यार्थियों के जाति प्रमाण पत्रों की भी जांच शुरू कर दी है. प्रमाण पत्र संबंधित जिलों के उपायुक्तों के पास भेजे गए हैं. जिला प्रशासन से दस्तावेजों की वैधता की पुष्टि कराई जा रही है. इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह पता लगाना है कि दाखिले के समय प्रस्तुत किए गए प्रमाण पत्र नियमों के अनुरूप हैं या नहीं.
JCECEB भी बरतेगा अतिरिक्त सतर्कता
मेडिकल कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया के दौरान झारखंड संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद (JCECEB) भी दस्तावेजों के सत्यापन पर विशेष ध्यान देगा. सीट आवंटन से पहले विद्यार्थियों के जाति और आवासीय प्रमाण पत्रों की जांच कराने की व्यवस्था की जा रही है. सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही विद्यार्थियों को संबंधित मेडिकल कॉलेज में नामांकन के लिए भेजा जाएगा. इससे दाखिला प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल पर अंकुश लगाने की कोशिश होगी.

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