राम मंदिर दान चोरी मामला: QR कोड वाले ट्रस्ट के बक्से में छिपाए गए थे 20 लाख रुपये, जांच में नए खुलासे
अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले की जांच में नए खुलासे सामने आए हैं। पुलिस ने आरोपी अविनाश शुक्ला के किराए के कमरे से राम राज्य कोष लिखे ट्रस्ट के बक्से में 20 लाख रुपये बरामद किए हैं। बक्से पर ऑनलाइन दान के लिए QR कोड भी लगा था। मामले की जांच अब और तेज हो गई है।

Ayodhya: अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले में जांच के दौरान पुलिस को एक अहम सफलता मिली है. मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला के किराए के कमरे से एक लोहे का संदूक बरामद किया गया, जिस पर 'राम राज्य कोष' लिखा हुआ था. इस बक्से पर ऑनलाइन दान के लिए पेटीएम का QR कोड भी लगा हुआ था. पुलिस के अनुसार, इसी बंद संदूक में कथित तौर पर दान राशि के 20 लाख रुपये छिपाकर रखे गए थे. बरामदगी के दौरान कमरे में दो अन्य बक्से भी मिले हैं, जिनकी भी जांच की जा रही है. यह खुलासा सामने आने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि मंदिर ट्रस्ट का दान संग्रह करने वाला बक्सा आरोपी के निजी कमरे तक कैसे पहुंचा और उसका इस्तेमाल कथित तौर पर चोरी की रकम छिपाने के लिए क्यों किया गया.
योग केंद्र में मिला ट्रस्ट का बक्सा, उठे कई सवाल
पुलिस जांच में सामने आया कि अविनाश शुक्ला अपने भाई अभिषेक शुक्ला के साथ एक योग केंद्र में किराए पर रहता था. योग केंद्र की संचालिका सीमा तिवारी ने बताया कि दोनों भाई काफी समय से वहीं रह रहे थे और अविनाश को कथित तौर पर चंपत राय की सिफारिश पर वहां रहने की अनुमति मिली थी. इसी परिसर से राम राज्य कोष लिखा हुआ ट्रस्ट का बक्सा बरामद होने के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं. बक्से पर लगा QR कोड इस बात की ओर इशारा करता है कि इसका इस्तेमाल श्रद्धालुओं से ऑनलाइन दान लेने के लिए किया जाता था. अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह बक्सा मंदिर परिसर से बाहर कैसे पहुंचा और इसके इस्तेमाल की जिम्मेदारी किसके पास थी.
दान की रकम ट्रस्ट के बक्से में ही छिपाई जाती थी
पुलिस के अनुसार, आरोपी अविनाश शुक्ला कथित तौर पर दान की चोरी की गई रकम को उसी बक्से में छिपाकर रखता था, जिसका इस्तेमाल मंदिर में श्रद्धालुओं से दान एकत्र करने के लिए किया जाता था. जांच में सामने आया कि 5 जून की शाम पुलिस और राम मंदिर ट्रस्ट के प्रतिनिधियों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए अविनाश के किराए के कमरे से 20 लाख रुपये से अधिक की नकदी बरामद की थी. बताया जा रहा है कि अविनाश करीब डेढ़ साल पहले अयोध्या आया था और उसके भाई अभिषेक शुक्ला की मदद से उसे राम मंदिर ट्रस्ट में नौकरी मिली थी. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि चोरी की रकम कितने समय से इस तरीके से छिपाई जा रही थी और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही.
SIT की जांच तेज, CCTV और वॉशरूम कनेक्शन की भी पड़ताल
दान चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है. पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी मंदिर परिसर में लगे CCTV कैमरों के ब्लाइंड स्पॉट का फायदा उठाकर दान राशि निकालते थे. पुलिस का यह भी दावा है कि चोरी की गई नकदी को पहले मंदिर परिसर के वॉशरूम में छिपाया जाता था और बाद में सुरक्षित तरीके से बाहर ले जाया जाता था. इन खुलासों के बाद SIT अब पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है. जांच टीम यह भी पता लगा रही है कि इस कथित गबन में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा सुरक्षा व्यवस्था में किन खामियों का फायदा उठाया गया.
ट्रस्ट ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया
राम मंदिर दान राशि में कथित गड़बड़ी के सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है और श्रद्धालुओं के दान की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है. ट्रस्ट का कहना है कि जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग दिया जा रहा है और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. वहीं उत्तर प्रदेश सरकार भी पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है. पुलिस लगातार आरोपियों से पूछताछ कर रही है और मामले से जुड़े सभी साक्ष्यों को खंगाल रही है, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके.

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