मलेरिया पर झारखंड सरकार का रेड अलर्ट! 4 मौतों के बाद हर जिले के DC को एक्शन का आदेश, गांव-गांव चलेगा फीवर सर्वे
पूर्वी सिंहभूम में मलेरिया से हुई मौतों के बाद झारखंड सरकार ने पूरे राज्य में हाई अलर्ट जारी कर दिया है. सभी जिलों के उपायुक्तों को गांव-गांव फीवर सर्वे, त्वरित जांच, दवा उपलब्धता और मच्छर नियंत्रण अभियान तेज करने के निर्देश दिए गए हैं.

Ranchi: पूर्वी सिंहभूम जिले में मलेरिया से हुई मौतों और संक्रमण के लगातार सामने आ रहे मामलों ने झारखंड सरकार की चिंता बढ़ा दी है. हालात की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने पूरे राज्य में हाई अलर्ट घोषित करते हुए सभी उपायुक्तों (DC) को तत्काल प्रभाव से मलेरिया नियंत्रण अभियान तेज करने का निर्देश दिया है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब मलेरिया के हर संदिग्ध मामले पर त्वरित कार्रवाई होगी. जिन इलाकों में बुखार के मरीज मिल रहे हैं, वहां घर-घर सर्वे, तत्काल जांच, दवा उपलब्ध कराने और गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी. इसके साथ ही प्रभावित गांवों में मच्छरों के प्रजनन पर रोक लगाने, दवा छिड़काव बढ़ाने और जिला स्तर से लेकर स्वास्थ्य केंद्रों तक निगरानी व्यवस्था को और सख्त करने के निर्देश दिए गए हैं.
गांव-गांव पहुंचेगी स्वास्थ्य टीम
स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि जहां भी बुखार के मामले सामने आएं, वहां बहुद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता (एमपीडब्ल्यू) और सहिया के माध्यम से विशेष सर्वे अभियान चलाया जाए. हर संदिग्ध मरीज की तत्काल मलेरिया जांच की जाएगी और रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर बिना किसी देरी के उपचार शुरू किया जाएगा. सरकार का लक्ष्य है कि शुरुआती स्तर पर ही मरीजों की पहचान कर संक्रमण को फैलने से रोका जाए. इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की फील्ड टीमों को सक्रिय रहने और प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं.
एक मरीज मिला तो पूरे इलाके में चलेगा फीवर सर्वे
सरकार ने मलेरिया नियंत्रण के लिए सख्त रणनीति अपनाते हुए निर्देश दिया है कि यदि किसी गांव या इलाके में मलेरिया का एक भी नया मरीज मिलता है तो पूरे क्षेत्र में व्यापक फीवर सर्वे या मास सर्वे कराया जाएगा. प्रत्येक गांव का अलग-अलग मलेरिया डेटा तैयार किया जाएगा, ताकि संक्रमण वाले इलाकों की पहचान कर वहां विशेष अभियान चलाया जा सके. अधिक प्रभावित गांवों की सहियाओं को रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (RDT) किट और आवश्यक मलेरिया रोधी दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में जांच किट, दवाओं और अन्य जरूरी संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं.
मच्छरों पर वार, दवा छिड़काव और जनजागरूकता अभियान तेज होगा
मलेरिया के प्रसार को रोकने के लिए सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में वेक्टर कंट्रोल अभियान को भी तेज करने का फैसला लिया है. इसके तहत कीटनाशक दवाओं का छिड़काव, लार्वा नियंत्रण और मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करने की कार्रवाई तेज की जाएगी. साथ ही लोगों को मच्छरों से बचाव, समय पर जांच कराने और शुरुआती लक्षण दिखने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने के लिए जागरूक किया जाएगा. विभाग का मानना है कि बीमारी पर नियंत्रण के लिए इलाज के साथ-साथ जनभागीदारी भी बेहद जरूरी है.
DC की निगरानी में चलेगा अभियान
स्वास्थ्य विभाग ने मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम की निगरानी के लिए त्रिस्तरीय मॉनिटरिंग व्यवस्था लागू की है. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर हर सप्ताह समीक्षा बैठक होगी, जबकि सिविल सर्जन प्रत्येक 15 दिन पर प्रगति की समीक्षा करेंगे. इसके अलावा हर महीने उपायुक्त की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित होगी, जिसमें मलेरिया नियंत्रण अभियान की प्रगति का मूल्यांकन किया जाएगा. स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने सभी उपायुक्तों से व्यक्तिगत रूप से इस अभियान की निगरानी करने और यह सुनिश्चित करने को कहा है कि किसी भी जिले में लापरवाही के कारण संक्रमण न फैले और समय रहते प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके.

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