केजरीवाल को बड़ा झटका, राघव चड्ढा ने 7 सांसदों के साथ AAP का BJP में विलय का किया दावा, राज्यसभा का गणित बदला
आम आदमी पार्टी के लिए शुक्रवार का दिन सबसे बड़े राजनीतिक झटकों में से एक बन गया. पार्टी के प्रमुख राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ऐलान किया कि वे AAP छोड़कर भाजपा में शामिल हो रहे हैं. उनके साथ राज्यसभा के कुल सात सांसदों के जाने की बात सामने आई है


New Delhi: आम आदमी पार्टी के लिए शुक्रवार का दिन सबसे बड़े राजनीतिक झटकों में से एक बन गया. पार्टी के प्रमुख राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ऐलान किया कि वे AAP छोड़कर भाजपा में शामिल हो रहे हैं. उनके साथ राज्यसभा के कुल सात सांसदों के जाने की बात सामने आई है, जिससे राज्यसभा में AAP की ताकत पर बड़ा असर पड़ना तय माना जा रहा है. राघव चड्ढा ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने कई बड़े फैसले लिए, जिन पर जनता ने तीन बार मुहर लगाई. उन्होंने साफ कहा कि अब वे प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश के लिए काम करेंगे. यह घटनाक्रम सिर्फ एक दल-बदल नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा सियासी पुनर्संतुलन माना जा रहा है.
राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या कहा?
नई दिल्ली में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में राघव चड्ढा ने कहा कि उन्होंने पार्टी को “खून-पसीने से सींचा”, लेकिन अब AAP अपने मूल सिद्धांतों से भटक चुकी है. उन्होंने कहा कि पार्टी अब देशहित की बजाय निजी हितों के लिए काम कर रही है. राघव ने कहा कि उन्हें लंबे समय से लग रहा था कि वह “right man in wrong party” हैं. इसी वजह से उन्होंने पार्टी से अलग होने का फैसला लिया. साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की खुलकर तारीफ करते हुए कहा कि देशहित में अब भाजपा के साथ काम करेंगे.
किन 7 सांसदों के नाम सामने आए?
राघव चड्ढा के साथ जिन सांसदों के नाम सामने आए हैं, उनमें:
- संदीप पाठक
- अशोक मित्तल
- स्वाति मालीवाल
- हरभजन सिंह
- विक्रमजीत सिंह साहनी
- राजिंदर गुप्ता
शामिल बताए जा रहे हैं. इन नामों के सामने आने के बाद राज्यसभा में AAP की संख्या में बड़ी गिरावट लगभग तय मानी जा रही है.
अब आगे क्या होगा? एंटी डिफेक्शन कानून का गणित
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इन सांसदों की सदस्यता बचेगी? संविधान की दसवीं अनुसूची (Anti-Defection Law) के तहत, अगर किसी दल के दो-तिहाई सांसद एक साथ किसी दूसरी पार्टी में विलय करते हैं, तो इसे वैध माना जाता है और सांसद अयोग्यता से बच सकते हैं. AAP के राज्यसभा में कुल 10 सांसद हैं. ऐसे में कम-से-कम 7 सांसदों का साथ होना जरूरी है. अगर सात सांसदों के हस्ताक्षर के साथ राज्यसभा सभापति को प्रस्ताव सौंप दिया गया है, जैसा कि राघव ने दावा किया, तो यह विलय कानूनी रूप से मजबूत माना जाएगा.
AAP और केजरीवाल के लिए कितना बड़ा झटका?
यह सिर्फ सांसदों का जाना नहीं है, बल्कि AAP के राष्ट्रीय राजनीतिक प्रभाव पर सीधा असर डालने वाला घटनाक्रम है. राज्यसभा में पार्टी की आवाज कमजोर होगी और पंजाब-Delhi की राजनीति में भी इसका असर देखने को मिल सकता है. राघव चड्ढा को हाल में उपनेता पद से हटाए जाने और पार्टी नेतृत्व से दूरी की खबरें पहले से सामने आ रही थीं. अब यह टूट उसी असंतोष का बड़ा विस्फोट मानी जा रही है.
राजनीतिक संदेश क्या है?
इस घटनाक्रम से भाजपा को राज्यसभा में मजबूती मिलेगी, जबकि AAP के लिए यह बड़ा मनोवैज्ञानिक और संगठनात्मक झटका है. आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या पार्टी नेतृत्व इस टूट को रोकने की कोशिश करता है या फिर और बड़े नाम भी पाला बदलते हैं.

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