हूल दिवस पर सीएम हेमंत सोरेन और राज्यपाल संतोष गंगवार ने सिदो-कान्हू को दी श्रद्धांजलि, कहा- उनका संघर्ष आज भी प्रेरणास्रोत
हूल दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने वीर शहीद सिदो-कान्हू को श्रद्धांजलि अर्पित की। दोनों नेताओं ने हूल क्रांति के महानायकों के संघर्ष, बलिदान और आदर्शों को देश और समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया।

Ranchi: हूल दिवस के अवसर पर झारखंड में वीर शहीद सिदो-कान्हू और हूल क्रांति के अन्य महानायकों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रांची में सिदो-कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनके बलिदान और संघर्ष को नमन किया. उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए सिदो-कान्हू ने अन्याय और शोषण के खिलाफ ऐतिहासिक आंदोलन का नेतृत्व किया, जिसकी प्रेरणा आज भी समाज को मिलती है. वहीं, राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने भी लोक भवन में सिदो-कान्हू के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और हूल क्रांति को भारत के स्वतंत्रता संग्राम का गौरवशाली अध्याय बताया. दोनों नेताओं ने वीर सेनानियों के त्याग, साहस और राष्ट्रप्रेम को याद करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का आह्वान किया.
सीएम हेमंत सोरेन ने वीर शहीद सिदो-कान्हू को किया नमन
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हूल दिवस पर वीर शहीद सिदो-कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने कहा कि सिदो-कान्हू ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए अन्याय, शोषण और अत्याचार के खिलाफ ऐतिहासिक बिगुल फूंका था. मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड के वीर सपूतों ने हमेशा अपने समाज, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया है. उन्होंने कहा कि सिदो-कान्हू का नाम भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है और उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों को साहस, स्वाभिमान और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की प्रेरणा देता रहेगा. इस अवसर पर विधायक कल्पना सोरेन, रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री सहित बड़ी संख्या में झामुमो कार्यकर्ता और अन्य लोग मौजूद रहे.
राज्यपाल बोले- हूल क्रांति स्वतंत्रता संग्राम का गौरवशाली अध्याय
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम में हूल क्रांति के अमर महानायक सिदो-कान्हू के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने कहा कि हूल क्रांति भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का एक गौरवशाली अध्याय है, जिसने अन्याय और औपनिवेशिक शासन के खिलाफ जनजागरण का संदेश दिया. राज्यपाल ने सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और वीरांगना फूलो-झानो सहित सभी हूल सेनानियों के त्याग और साहस को याद करते हुए कहा कि उनका संघर्ष आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत है. उन्होंने कहा कि हूल दिवस केवल वीर शहीदों को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि उनके आदर्शों पर चलने और समाज में न्याय, समानता तथा स्वाभिमान के मूल्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लेने का भी दिन है.

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