130 साल में पहली बार टूटी ओलंपिक की परंपरा! अब सिर्फ खेलने पर मिलेंगे 8.5 लाख रुपये, मेडल जरूरी नहीं
IOC ने 130 साल पुरानी परंपरा तोड़ते हुए ओलंपिक में हिस्सा लेने वाले हर एथलीट को 10,000 डॉलर देने का ऐलान किया है. यह राशि मेडल पर नहीं, सिर्फ भागीदारी के आधार पर मिलेगी.


इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (IOC) ने ओलंपिक के इतिहास में एक अनोखा फैसला लिया है, जिसने दुनिया भर के एथलीट्स के लिए नई संभावनाएं खोल दी हैं. अब, ओलंपिक खेलों में भाग लेने वाले हर एथलीट को 10,000 अमेरिकी डॉलर, यानी लगभग 8.5 लाख रुपये दिए जाएंगे. खास बात यह है कि यह राशि मेडल जीतने पर नहीं, बल्कि सिर्फ ओलंपिक में भागीदारी के आधार पर मिलेगी. IOC ने इस पहल का नाम “Fit for the Future Olympian Grant” रखा है. इस निर्णय के साथ, ओलंपिक की 130 साल पुरानी परंपरा को तोड़ा गया है, जिसमें खिलाड़ियों को उनकी भागीदारी के लिए सीधे तौर पर कोई भुगतान नहीं किया जाता था.
किसे मिलेगा 10,000 डॉलर और कब से लागू हुआ फैसला?
IOC के हालिया निर्णय के अनुसार, यह ग्रांट मिलानो-कोर्टिना 2026 विंटर ओलंपिक से लागू होगी. इसका मतलब है कि 2026 विंटर गेम्स में भाग लेने वाले एथलीट इस योजना के तहत लाभान्वित होंगे. इसके बाद, 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को भी यह राशि मिलेगी. यह भुगतान हर उस एथलीट को दिया जाएगा जो ओलंपिक में भाग लेगा, चाहे वह मेडल जीते या नहीं. लेकिन एक शर्त है - एथलीट का डोपिंग रिकॉर्ड साफ होना चाहिए और उसे IOC के एथिक्स नियमों या ओलंपिक चार्टर का उल्लंघन नहीं करना चाहिए.
IOC एथलीट्स कमीशन के चेयरमैन पाउ गैसोल ने स्पष्ट किया है कि यह “प्राइज मनी” नहीं है, बल्कि खिलाड़ियों की मेहनत, संघर्ष और ओलंपिक तक पहुंचने की यात्रा को मान्यता देने वाला समर्थन है. उनका कहना है कि हर ओलंपियन ने वहां तक पहुंचने के लिए वर्षों की मेहनत, बलिदान और व्यक्तिगत संघर्ष किया है, इसलिए यह सहायता केवल मेडलिस्ट्स तक सीमित नहीं है.
IOC ने कितना फंड रखा, और खिलाड़ियों को इससे क्या फायदा होगा?
IOC ने इस योजना के लिए हर ओलंपिक साइकिल पर 140 मिलियन डॉलर, यानी लगभग 1,100 करोड़ रुपये से ज्यादा का फंड निर्धारित किया है. अनुमान है कि समर और विंटर ओलंपिक मिलाकर करीब 14,000 एथलीट्स इस योजना का लाभ उठाएंगे. 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक में लगभग 11,000 खिलाड़ियों के भाग लेने की उम्मीद है, इसलिए वहां भी यह ग्रांट बड़ी संख्या में खिलाड़ियों तक पहुंचेगी. इस फंड का उद्देश्य खिलाड़ियों को सिर्फ इनाम देना नहीं है, बल्कि उनके खेल करियर और करियर ट्रांजिशन में भी मदद करना है.
कई खिलाड़ी ऐसे देशों से आते हैं जहां स्पॉन्सरशिप, सरकारी सहायता या ट्रेनिंग सपोर्ट बहुत सीमित होता है. ट्रेनिंग, कोचिंग, डाइट, इक्विपमेंट और यात्रा पर भारी खर्च के चलते कई एथलीट बीच में ही संघर्ष करने लगते हैं. ऐसे में 10,000 डॉलर की यह सहायता छोटे देशों और सीमित संसाधनों वाले खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकती है.
क्यों अहम है IOC का यह फैसला?
IOC का यह कदम इसलिए भी बड़ा माना जा रहा है क्योंकि ओलंपिक लंबे समय तक “अमैच्योर स्पिरिट” की सोच से जुड़ा रहा है. लेकिन अब खेल पूरी तरह बदल चुके हैं. आज एलीट स्पोर्ट्स बेहद महंगे हो चुके हैं और खिलाड़ियों को ओलंपिक तक पहुंचने के लिए कई साल तक आर्थिक, मानसिक और शारीरिक संघर्ष करना पड़ता है. ऐसे में IOC का यह फैसला खिलाड़ियों को सीधे सपोर्ट देने की दिशा में ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है. नई IOC प्रेसिडेंट किर्स्टी कोवेंट्री की रणनीति के तहत इसे “Fit for the Future” पहल का अहम हिस्सा बताया गया है.
साफ है कि अब ओलंपिक सिर्फ मेडल जीतने वालों का मंच नहीं रहेगा, बल्कि वहां तक पहुंचने वाले हर खिलाड़ी की मेहनत को भी संस्थागत मान्यता मिलेगी. यही वजह है कि IOC के इस फैसले को दुनिया भर के एथलीट्स के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक जीत माना जा रहा है.

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