मनी लॉन्ड्रिंग केस में आलमगीर आलम और संजीव लाल को राहत नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने जमानत से किया इनकार
टेंडर घोटाले और कथित करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी पूर्व मंत्री आलमगीर आलम और उनके आप्त सचिव (पीए) संजीव लाल को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली है. गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने दोनों की जमानत याचिकाओं पर विचार करते हुए तत्काल जमानत देने से इनकार कर दिया.

Ranchi: टेंडर घोटाले और कथित करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी पूर्व मंत्री आलमगीर आलम और उनके आप्त सचिव (पीए) संजीव लाल को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली है. गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने दोनों की जमानत याचिकाओं पर विचार करते हुए तत्काल जमानत देने से इनकार कर दिया. हालांकि, कोर्ट ने मामले की सुनवाई को आगे बढ़ाते हुए चार सप्ताह के भीतर महत्वपूर्ण गवाहों की जांच पूरी करने का निर्देश दिया है. इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एम.एम. सुंदरेश और न्यायाधीश एन. कोटेश्वर सिंह की पीठ में हुई. अदालत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल जमानत पर कोई निर्णय लेने के बजाय पहले मामले की प्रगति सुनिश्चित की जाए. इसी के तहत जांच एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि वे निर्धारित समयसीमा में प्रमुख गवाहों के बयान दर्ज करें, जिसके बाद अगली सुनवाई की तारीख तय की जाएगी.
सुनवाई के दौरान आलमगीर आलम की ओर से दलील दी गई कि उनकी उम्र 76 वर्ष है और वे लगभग दो वर्षों से जेल में बंद हैं. बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि मामले की सुनवाई में अब तक कोई खास प्रगति नहीं हुई है और अभियोजन की स्वीकृति भी लंबित है. इसके अलावा, यह तर्क भी रखा गया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दायर पूरक आरोप पत्रों के कारण सुनवाई लंबी खिंच सकती है, ऐसे में उन्हें जमानत दी जानी चाहिए. वहीं, संजीव लाल की ओर से भी इसी आधार पर राहत की मांग की गई और अनुरोध किया गया कि उनके मामले में भी समान आदेश लागू किया जाए. कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जमानत देने से इनकार करते हुए गवाहों की जांच चार सप्ताह में पूरी करने का निर्देश दोनों आरोपियों पर समान रूप से लागू किया.
गौरतलब है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए 15 मई 2024 को तत्कालीन ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम को गिरफ्तार किया था. इससे पहले 7 मई 2024 को उनके आप्त सचिव संजीव लाल और उनके करीबी जहांगीर आलम को भी गिरफ्तार किया गया था. यह कार्रवाई ईडी द्वारा 6 मई को की गई छापेमारी के बाद की गई, जिसमें कई ठिकानों पर तलाशी ली गई थी. छापेमारी के दौरान जहांगीर आलम के ठिकाने से करीब 32.20 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए थे, जबकि संजीव लाल के घर से 10.05 लाख रुपये नकद और एक डायरी मिली थी. इस डायरी में कथित तौर पर कमीशन की रकम के बंटवारे का विस्तृत हिसाब-किताब दर्ज था, जिसमें कई नामों के लिए कोड वर्ड का इस्तेमाल किया गया था.
ईडी की जांच के अनुसार, इस मामले में बड़े पैमाने पर टेंडर में अनियमितता और कमीशनखोरी के जरिए धन का लेन-देन किया गया. अब तक की कार्रवाई में संजीव लाल की लगभग 4.42 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी है. इसके अलावा, जहांगीर आलम के यहां से बरामद नकदी भी एजेंसी ने जब्त कर ली है. इस केस में एक अन्य प्रमुख आरोपी, तत्कालीन मुख्य अभियंता विरेंद्र राम की भी करीब 39 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है. जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की गहराई से पड़ताल कर रही हैं, जिससे यह पता लगाया जा सके कि इस कथित घोटाले में और कौन-कौन लोग शामिल हैं.
फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट के ताजा रुख से साफ है कि अदालत इस मामले को गंभीरता से ले रही है और बिना पर्याप्त प्रगति के जमानत देने के पक्ष में नहीं है. अब सभी की नजरें चार सप्ताह बाद होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस मामले में आगे की दिशा तय हो सकती है.

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