Nifty Crash News: 6 महीने के निचले स्तर पर पहुंचा निफ्टी, सेंसेक्स में भी बड़ी गिरावट, जानें कारण
“भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को भारी गिरावट देखने को मिली. निफ्टी-50 22,800 के अहम सपोर्ट स्तर को तोड़कर 22,785.55 तक फिसल गया, जबकि सेंसेक्स में भी 1,100 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज हुई.”

Nifty Crash: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को भारी गिरावट देखने को मिली. कारोबार के दौरान निफ्टी-50 22,800 के अहम स्तर के नीचे फिसल गया, जबकि सेंसेक्स में भी 1,100 अंकों से ज्यादा की कमजोरी दर्ज की गई. बाजार में बिकवाली बढ़ने के पीछे पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कमजोर वैश्विक संकेतों को प्रमुख वजहों में गिना जा रहा है. इस गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. वहीं, महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति और उससे जुड़े आर्थिक प्रभावों ने भी बाजार की धारणा पर दबाव डाला है. ऐसे में निवेशकों की नजर अब बाजार की अगली दिशा और महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तरों पर बनी हुई है.
निफ्टी 22,800 के नीचे, सेंसेक्स में भी भारी गिरावट
सोमवार के कारोबार में भारतीय शेयर बाजार पर बिकवाली का दबाव साफ नजर आया. निफ्टी-50 350 अंकों से ज्यादा टूटकर 22,785.55 के स्तर तक पहुंच गया और इस दौरान 22,800 का अहम सपोर्ट स्तर भी टूट गया. सेंसेक्स में भी 1,100 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई. बाजार में अचानक बढ़ी कमजोरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. खासकर बैंकिंग, ऑटो और स्मॉल-कैप तथा मिड-कैप शेयरों पर दबाव देखने को मिला. तकनीकी विश्लेषण के लिहाज से 22,800 का स्तर बाजार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा था. इसके नीचे कारोबार होने से आगे भी उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना पर चर्चा तेज हो गई है. हालांकि, किसी भी अगले कदम से पहले बाजार के स्थिर होने और व्यापक संकेतों का इंतजार करना जरूरी माना जा रहा है.
कच्चे तेल की तेजी ने बढ़ाई बाजार की चिंता
बाजार में गिरावट के प्रमुख कारणों में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव शामिल हैं. ब्रेंट क्रूड की कीमत 107 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचने से भारत के लिए चिंता बढ़ी है, क्योंकि देश अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है. कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से आयात बिल पर दबाव पड़ सकता है और महंगाई से जुड़ी चिंताएं भी बढ़ सकती हैं. इसके अलावा कंपनियों की लागत और मुनाफे पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है. विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली और कमजोर वैश्विक संकेतों ने बाजार के सेंटीमेंट को और प्रभावित किया है. ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम को लेकर ज्यादा सतर्क दिखाई दे रहे हैं. बाजार की दिशा अब तेल की कीमतों, वैश्विक घटनाक्रम और विदेशी निवेश के रुझान पर काफी हद तक निर्भर रह सकती है.
मार्च की गिरावट से क्यों की जा रही तुलना?
मौजूदा बाजार गिरावट की तुलना मार्च 2026 के उस दौर से की जा रही है, जब अमेरिका-ईरान तनाव और पश्चिम एशिया में युद्ध की आशंकाओं के बीच शेयर बाजार में तेज बिकवाली देखी गई थी. उस समय भी कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली बाजार पर दबाव बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में शामिल थे. अब एक बार फिर भू-राजनीतिक तनाव और तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. हालांकि, दोनों समय की बाजार परिस्थितियां पूरी तरह समान नहीं हैं और बाजार की चाल कई घरेलू तथा वैश्विक कारकों से प्रभावित होती है. इसलिए केवल पिछली गिरावट के आधार पर मौजूदा बाजार की दिशा तय करना उचित नहीं होगा. निवेशकों की नजर अब निफ्टी के महत्वपूर्ण तकनीकी स्तरों और वैश्विक संकेतों पर बनी हुई है.
महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति ने भी बढ़ाई चिंता
महाराष्ट्र में बारिश की कमी के चलते राज्य सरकार ने 358 में से 265 तालुकाओं को सूखाग्रस्त घोषित किया है. यह राज्य के करीब 74 फीसदी तालुकाओं को प्रभावित करता है. सरकार के मुताबिक, बारिश की कमी और लंबे समय तक चले सूखे की स्थिति के बाद यह फैसला लिया गया. प्रभावित इलाकों में फसल नुकसान का आकलन शुरू किया जा रहा है और किसानों के लिए राहत उपाय भी घोषित किए गए हैं. इनमें फसल ऋण के पुनर्गठन, कृषि ऋण की वसूली टालने, भूमि राजस्व में रियायत और कृषि पंपों से जुड़े बिजली बिलों में राहत जैसे कदम शामिल हैं. महाराष्ट्र की कृषि अर्थव्यवस्था में सोयाबीन, कपास, दालों और अन्य खरीफ फसलों की महत्वपूर्ण भूमिका है. सूखे का असर ग्रामीण आय, कृषि उत्पादन और संबंधित कारोबार पर पड़ने की आशंका के कारण बाजार भी इस घटनाक्रम पर नजर रख रहा है.

