UPI पेमेंट का नया MDR नियम: मर्चेंट पर कब लगेगा चार्ज और कब रहेगा जीरो?
“UPI MDR चार्ज को लेकर नया फ्रेमवर्क सामने आया है. 2,000 रुपये तक के मर्चेंट पेमेंट पर MDR जीरो रहेगा, जबकि इससे अधिक के कुछ ट्रांजैक्शन पर 0.4% शुल्क लगेगा. PhonePe CEO समीर निगम ने बताया कि यह चार्ज क्रेडिट कार्ड की तुलना में काफी कम है. ”

UPI MDR: भारत में डिजिटल पेमेंट का सबसे लोकप्रिय माध्यम UPI एक बार फिर चर्चा में है. मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर नए MDR फ्रेमवर्क को लेकर पेमेंट इंडस्ट्री में बहस तेज हो गई है. PhonePe के फाउंडर और CEO समीर निगम ने कहा है कि मर्चेंट के लिए MDR कोई नया कॉन्सेप्ट नहीं है, क्योंकि वे पहले से ही RuPay क्रेडिट कार्ड, Visa और Mastercard पर यह शुल्क देते हैं. उनके मुताबिक, UPI पर प्रस्तावित 0.4% MDR क्रेडिट कार्ड की तुलना में काफी कम है. वहीं, छोटे मूल्य के अधिकांश UPI लेनदेन अब भी शुल्क मुक्त रहने की बात कही गई है.
RuPay, Visa और Mastercard पर पहले से MDR चार्ज
PhonePe के फाउंडर और CEO समीर निगम ने UPI पर MDR लागू किए जाने को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उनके अनुसार, देश में करीब 60 लाख मर्चेंट पहले से ही RuPay क्रेडिट कार्ड, Visa और Mastercard से होने वाले ट्रांजैक्शन पर MDR का भुगतान कर रहे हैं. इसलिए मर्चेंट के लिए MDR देना कोई नया अनुभव नहीं है. निगम ने बताया कि क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर MDR की दर आमतौर पर 1.5% से 2.5% के बीच रहती है. इसके मुकाबले UPI मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% MDR का प्रावधान किया गया है. उनका कहना है कि कम दर होने से मर्चेंट के लिए इसे अपनाना आसान हो सकता है. हालांकि, वास्तविक शुल्क ट्रांजैक्शन की कैटेगरी और लागू नियमों पर निर्भर करेगा.
दुनिया में सबसे कम MDR में शामिल है भारत का UPI चार्ज
समीर निगम ने UPI पर लगने वाले 0.40% MDR को लेकर कहा कि उनकी जानकारी के मुताबिक यह दुनिया की सबसे कम MDR दरों में से एक है. उनके अनुसार, सरकार ने शुल्क को सीमित रखा है, जिससे मर्चेंट पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ कम हो सकता है. उन्होंने यह भी बताया कि UPI के जरिए पेमेंट स्वीकार करने से कारोबारियों को डिजिटल भुगतान की सुविधा मिलती है और कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा मिलता है. निगम का दावा है कि क्रेडिट कार्ड की तुलना में कम MDR के कारण UPI मर्चेंट पेमेंट का खर्च कम रह सकता है. हालांकि, इस दर को वैश्विक स्तर पर सबसे कम साबित करने के लिए अलग-अलग देशों के पेमेंट सिस्टम, शुल्क संरचना और लेनदेन की शर्तों का तुलनात्मक आंकड़ा जरूरी है.
96% UPI ट्रांजैक्शन रहेंगे फ्री
PhonePe CEO के मुताबिक, भारत में करीब 96% UPI लेनदेन 2,000 रुपये से कम मूल्य के होते हैं. ऐसे में नए MDR फ्रेमवर्क के तहत ज्यादातर ट्रांजैक्शन शुल्क मुक्त रह सकते हैं. प्रस्तावित व्यवस्था में 2,000 रुपये तक के मर्चेंट UPI भुगतान पर MDR शून्य रखने की बात कही गई है. वहीं, इससे अधिक मूल्य के कुछ पर्सन-टू-मर्चेंट लेनदेन पर 0.4% MDR लागू होने का प्रावधान बताया गया है. निगम का कहना है कि शुल्क केवल बड़े मूल्य के ट्रांजैक्शन पर लागू होने से छोटे कारोबारियों पर असर सीमित रहेगा. हालांकि, 96% का आंकड़ा किस अवधि और किस तरह के लेनदेन पर आधारित है, यह स्पष्ट होना जरूरी है. पर्सन-टू-पर्सन भुगतान के लिए UPI शुल्क मुक्त रहने की बात भी कही गई है.
छह साल से नुकसान में थी पेमेंट इंडस्ट्री
समीर निगम ने दावा किया कि पिछले छह वर्षों से MDR-फ्री UPI व्यवस्था के कारण पेमेंट इंडस्ट्री को हर साल काफी नुकसान उठाना पड़ रहा था. उनके अनुसार, पेमेंट कंपनियों ने इस मुद्दे को लगातार सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के सामने उठाया. निगम का कहना है कि दुनिया के 200 से अधिक देशों में डिजिटल पेमेंट सिस्टम मौजूद हैं, लेकिन भारत में UPI ट्रांजैक्शन पर लंबे समय तक MDR नहीं लगाया गया. उनका मानना है कि सीमित शुल्क लागू होने से पेमेंट इंडस्ट्री को अपनी ऑपरेशनल लागत वसूलने में मदद मिल सकती है. इससे कंपनियां UPI इंफ्रास्ट्रक्चर और विस्तार में अधिक निवेश कर पाएंगी. हालांकि, इंडस्ट्री के वास्तविक वित्तीय नुकसान और नए MDR से होने वाली कमाई का आकलन करने के लिए आधिकारिक वित्तीय आंकड़ों की जरूरत होगी.
UPI इकोसिस्टम की ग्रोथ को मिलेगी मदद
PhonePe CEO समीर निगम ने उम्मीद जताई कि MDR लागू किए जाने से भारत के UPI इकोसिस्टम की स्थिरता और विकास को बढ़ावा मिल सकता है. उनके अनुसार, सीमित शुल्क से पेमेंट कंपनियों को अतिरिक्त राजस्व मिलेगा, जिसका इस्तेमाल तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर, सुरक्षा और नए मर्चेंट को जोड़ने में किया जा सकता है. UPI का विस्तार बढ़ने के साथ पेमेंट सिस्टम को लगातार अधिक ट्रांजैक्शन संभालने की जरूरत होती है. ऐसे में ऑपरेशनल लागत की भरपाई के लिए MDR से मिलने वाली आय उपयोगी हो सकती है. दूसरी ओर, मर्चेंट के लिए शुल्क की पारदर्शिता और अलग-अलग कैटेगरी पर लागू नियम महत्वपूर्ण रहेंगे. नए फ्रेमवर्क का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि MDR की वसूली, वितरण और भुगतान नेटवर्क की लागत किस तरह तय की जाती है.


