NEET री-एग्जाम फर्जीवाड़ा: 'कोड 220' से सॉल्वरों की एंट्री! EOU पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी
NEET UG री-एग्जाम फर्जीवाड़ा मामले में जांच के दौरान 'कोड 220' का नया खुलासा हुआ है. EOU बायोमीट्रिक सिस्टम, CCTV फुटेज और परीक्षा केंद्रों की भूमिका की जांच कर रही है. 12 सदस्यीय SIT पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है, जबकि कई संदिग्धों से पूछताछ और गिरफ्तारियां हो चुकी हैं.

पटना: नीट यूजी पुनर्परीक्षा (NEET UG Re-Exam) से जुड़े कथित फर्जीवाड़े की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है. बिहार के लखीसराय में सामने आए मामले ने परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. प्रारंभिक जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि कुछ परीक्षा केंद्रों पर असली अभ्यर्थियों की जगह दूसरे लोगों को परीक्षा दिलाने की कोशिश की गई. आर्थिक अपराध इकाई (EOU) अब पूरे घटनाक्रम की गहराई से जांच कर रही है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित तौर पर परीक्षा केंद्रों पर प्रवेश कैसे कराया गया, किन लोगों ने इसमें सहयोग किया और यह नेटवर्क कितना बड़ा था. अधिकारियों का कहना है कि अभी जांच शुरुआती चरण में है और सभी पहलुओं की बारीकी से पड़ताल की जा रही है. डिजिटल रिकॉर्ड, बायोमीट्रिक डेटा, सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं. जांच पूरी होने के बाद ही पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी.
शुरुआती जांच में सामने आया 'कोड 220' का मामला
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कुछ संदिग्ध लोगों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिलाने के लिए कथित रूप से "कोड 220" का इस्तेमाल किया गया. दावा है कि इस कोड की जानकारी पहले से संबंधित कर्मियों तक पहुंचा दी गई थी, ताकि निर्धारित प्रक्रिया के दौरान पहचान संबंधी औपचारिकताओं को आसानी से पूरा कराया जा सके. हालांकि, इस पहलू की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी.
बायोमीट्रिक प्रक्रिया को लेकर भी जांच तेज
EOU इस बात की भी जांच कर रही है कि परीक्षा केंद्रों पर मौजूद बायोमीट्रिक व्यवस्था का इस्तेमाल किस प्रकार किया गया. प्रारंभिक जानकारी के आधार पर यह पता लगाया जा रहा है कि प्रवेश प्रक्रिया के दौरान कहीं तकनीकी व्यवस्था का दुरुपयोग तो नहीं हुआ. एजेंसी डिजिटल रिकॉर्ड और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है.
तीन परीक्षा केंद्रों के CCTV फुटेज होंगे खंगाले
मामले से जुड़े तीन परीक्षा केंद्रों के सीसीटीवी फुटेज को जांच का अहम आधार माना जा रहा है. अधिकारियों का मानना है कि फुटेज से यह स्पष्ट हो सकेगा कि परीक्षा केंद्रों में किस समय कौन प्रवेश किया और बाहर निकला. इसके अलावा अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का भी विश्लेषण किया जा रहा है, जिससे पूरे घटनाक्रम की टाइमलाइन तैयार की जा सके.
12 सदस्यीय एसआईटी कर रही है पूरे मामले की जांच
आर्थिक अपराध इकाई ने मामले की गंभीरता को देखते हुए डीआईजी स्तर के अधिकारी की निगरानी में 12 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है. एसआईटी ने जांच अपने हाथ में लेकर सभी दस्तावेज, तकनीकी रिकॉर्ड और संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ शुरू कर दी है. अधिकारियों का उद्देश्य पूरे नेटवर्क का पता लगाकर इसमें शामिल प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका स्पष्ट करना है.
कई लोगों की गिरफ्तारी, जांच अभी जारी
अब तक की कार्रवाई में पुलिस कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर चुकी है. इनमें कथित सॉल्वर, डमी परीक्षार्थी, बायोमीट्रिक प्रक्रिया से जुड़े कुछ कर्मचारी और अन्य सहयोगी शामिल बताए जा रहे हैं. हालांकि, जांच एजेंसियों का कहना है कि मामला अभी खुला हुआ है और आगे की जांच में कई अन्य महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं. EOU ने संकेत दिए हैं कि यदि नए साक्ष्य मिलते हैं तो कार्रवाई का दायरा और बढ़ाया जाएगा.

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