प्रदेश अध्यक्ष की रेस में मुंडा-बाउरी आगे, रघुवर पर डाउट... आदित्य-प्रदीप और चंपई के भी चर्चे
Satya Sharan Mishra Ranchi : झारखंड में बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बनने के लॉबिंग तेज हो चुकी है. कई बड़े नेता प्रदेश अध्यक्ष बनने के लिए हाथ-पैर मार रहे हैं. पार्टी के कार्यकर्ता भी बेसब्री से नए प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन इसके लिए थोड़ा इंतजार करना होगा. दरअसल पहले राष्ट्रीय...


Satya Sharan Mishra
Ranchi :
झारखंड में बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बनने के लॉबिंग तेज हो चुकी है. कई बड़े नेता प्रदेश अध्यक्ष बनने के लिए हाथ-पैर मार रहे हैं. पार्टी के कार्यकर्ता भी बेसब्री से नए प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन इसके लिए थोड़ा इंतजार करना होगा. दरअसल पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव होगा उसके बाद प्रदेश अध्यक्ष का. राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा करीब ढाई साल से एक्सटेंशन पर चल रहे हैं. जनवरी 2023 में ही उनका कार्यकाल खत्म हो चुका है. 17 जनवरी को उन्हें जून 2024 तक का एक्सटेंशन दिया गया. उसके बाद से वे अबतक एक्सटेंशन में ही चल रहे हैं. इधर झारखंड बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी को मार्च 2025 में नेता प्रतिपक्ष बनाया गया है. जहां अर्जुन मुंडा और रघुवर दास जैसे बड़े नेता महीनों से बिना पद के बैठे हैं, वहीं बाबूलाल तीन महीने से दो-दो पदों पर काबिज हैं. चर्चा है कि जल्द ही बीजेपी को नया केंद्रीय और प्रदेश अध्यक्ष मिलेगा.
7 नेताओं में किसी की भी लग सकती है लॉटरी
पूर्व सीएम और राज्यपाल रघुवर दास, अर्जुन मुंडा और चंपई सोरेन तो प्रदेश अध्यक्ष पद की रेस में हैं ही. इनके अलावा प्रदेश महामंत्री और सांसद आदित्य साहू, प्रदीप वर्मा, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अमर बाउरी और वर्तमान कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र राय के भी नाम के चर्चे हैं. चर्चा यह भी है कि नेता प्रतिपक्ष का पद आदिवासी नेता को मिला है तो प्रदेश अध्यक्ष कोई ओबीसी नेता ही होगा. अगर ओबीसी नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाता है को इसमें रघुवर दास या आदित्य साहू हो सकते हैं, लेकिन अगर बीजेपी कास्ट फैक्टर से हटकर प्रदेश अध्यक्ष चुनती है तो इनमें से किसी भी नेता की लॉटरी लग सकती है.
मुंडा सबके चहेते
अर्जुन मुंडा बीजेपी के केंद्रीय नेताओं के चहेते हैं. लोकसभा चुनाव हारने के बाद उनके पास संगठन में कोई जिम्मेवारी नहीं है. ऐसे में अर्जुन मुंडा को यह पद मिल सकता है. कुछ ऐसा ही हाल रघुवर दास के साथ भी है. ओडिशा के राज्यपाल का पद छोड़ने के बाद जनवरी 2025 से वे बीजेपी में हैं, लेकिन बिना किसी पद के. रघुवर पहले भी बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और उन्हें सांगठनिक कामकाज का लंबा अनुभव है, रघुवर एक्टिव भी हैं, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व उन्हें भाव नहीं दे रहा है. विधानसभा का चुनाव हारने के बाद अमर बाउरी भी संगठन में किसी पद में नहीं हैं. पार्टी में अनुसूचित जाति का बड़ा चेहरा हैं. इसलिए इनका भी प्रदेश अध्यक्ष बनने का चांस काफी नजर आ रहा है.
चंपई को डाइजेस्ट कर पाएंगे बीजेपी कार्यकर्ता!
पार्टी के अंदर यह भी चर्चा है कि पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है, लेकिन इसकी कम उम्मीद नजर आ रही है. चंपई सोरेन अभी नये-नये बीजेपी की विचारधारा से जुड़े हैं. संगठन में कार्यकर्ताओं का एक बड़ा वर्ग उन्हें डाइजेस्ट नहीं कर पाएगा. इस वजह से चंपई का प्रदेश अध्यक्ष बनने का चांस कम ही नजर आ रहा है. पार्टी उन्हें कोई दूसरी बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है. जहां तक बात आदित्य साहू और प्रदीप वर्मा की है तो ये दोनों राज्यसभा सांसद हैं और पार्टी में महामंत्री, उपाध्यक्ष के पद पर सेवा दे रहे हैं. ऐसे में पार्टी पहले वैसे नेता को प्राथमिकता देगी जिनके पास फिलहाल कोई पद नहीं है, जैसे की अर्जुन मुंडा, रघुवर दास या फिर अमर बाउरी.

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