Vedanta Group पर ED की बड़ी कार्रवाई, दिल्ली-राजस्थान समेत कई ठिकानों पर छापेमारी
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने वेदांता समूह के परिसरों पर FEMA उल्लंघन मामले में तलाशी अभियान शुरू किया है. दिल्ली और राजस्थान समेत कई स्थानों पर चल रही इस कार्रवाई को विदेशी मुद्रा लेनदेन और रॉयल्टी भुगतान जांच से जोड़कर देखा जा रहा है। कंपनी ने कहा है कि वह जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग दे रही है.


सूत्रों के मुताबिक, ईडी ने विदेशी मुद्रा लेनदेन से जुड़े कुछ मामलों की जांच के बाद वेदांता समूह के खिलाफ FEMA के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है. इस प्रक्रिया में, कई जगहों पर दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन से जुड़ी जानकारी इकट्ठा की जा रही है. रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि जांच का संबंध वेदांता द्वारा अपनी मूल कंपनी, वेदांता रिसोर्सेज, को किए गए रॉयल्टी भुगतान से हो सकता है. हालांकि, इस मामले में ईडी की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. यह कार्रवाई उस समय की जा रही है जब हाल ही में वेदांता को अपने बहुप्रतीक्षित डिमर्जर योजना के लिए ऋणदाताओं से मंजूरी मिली थी। कंपनी अपने कारोबार को छह स्वतंत्र इकाइयों में बांटने की योजना बना रही है, जिसे भारतीय कॉर्पोरेट क्षेत्र के सबसे बड़े पुनर्गठन प्रयासों में से एक माना जा रहा है.
वेदांता ने कहा- अधिकारियों को पूरा सहयोग कर रहे हैं
ईडी की कार्रवाई के बीच वेदांता समूह ने अपनी प्रतिक्रिया भी दी है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि वे सभी नियामकीय प्रक्रियाओं का पालन कर रहे हैं और जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग दिया जा रहा है. प्रवक्ता के अनुसार कंपनी अधिकारियों द्वारा मांगी गई सभी जानकारी उपलब्ध करा रही है और नियमों के अनुपालन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। साथ ही उन्होंने कहा कि चूंकि मामला अभी नियामकीय प्रक्रिया के अधीन है, इसलिए इस पर फिलहाल इससे अधिक टिप्पणी करना उचित नहीं होगा.
क्या होता है FEMA और कब होती है कार्रवाई?
FEMA यानी Foreign Exchange Management Act विदेशी मुद्रा लेनदेन को नियंत्रित करने वाला प्रमुख कानून है. यदि किसी व्यक्ति या कंपनी पर विदेशी मुद्रा नियमों के उल्लंघन का संदेह होता है, तो ईडी इस कानून के तहत जांच और कार्रवाई कर सकती है.
इसमें विदेश में अवैध रूप से धन भेजना, विदेशी निवेश नियमों का उल्लंघन करना, विदेशों में संपत्ति खरीदने में अनियमितता या अन्य वित्तीय लेनदेन संबंधी मामलों की जांच शामिल होती है. वेदांता समूह पहले भी विभिन्न कारोबारी और वित्तीय कारणों से सुर्खियों में रहा है. कंपनी ने इलेक्टोरल बॉन्ड्स के जरिए विभिन्न राजनीतिक दलों को 400 करोड़ रुपये से अधिक का दान भी दिया था. चुनावी बॉन्ड्स के आंकड़ों के अनुसार भाजपा को सबसे अधिक राशि प्राप्त हुई थी, जबकि कांग्रेस, बीजू जनता दल, झारखंड मुक्ति मोर्चा और तृणमूल कांग्रेस को भी योगदान मिला था. फिलहाल सभी की नजर ईडी की जांच और उससे निकलने वाले निष्कर्षों पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं, जिससे वेदांता समूह और भारतीय कॉर्पोरेट सेक्टर दोनों पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है.

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