डुमरी विधायक जयराम महतो को बड़ी राहत, धनबाद MP-MLA कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत
“धनबाद की MP-MLA विशेष अदालत ने डुमरी विधायक जयराम महतो को बरवाअड्डा थाना मामले में अग्रिम जमानत दे दी है. सुशील मंडल, महेंद्र साव और राजकुमार मंडल को भी राहत मिली. ”

Dhanbad: डुमरी विधायक जयराम महतो को धनबाद की MP-MLA विशेष अदालत से बड़ी राहत मिली है. बरवाअड्डा थाना मामले में अदालत ने सोमवार को उनकी अग्रिम जमानत याचिका मंजूर कर ली. उनके साथ सुशील मंडल, महेंद्र साव और राजकुमार मंडल को भी अग्रिम जमानत दी गई है. यह मामला 21 अगस्त को बरवाअड्डा थाना प्रभारी रवि कुमार के साथ कथित विवाद से जुड़ा है. आरोप है कि थाना प्रभारी के साथ गाली-गलौज, धमकी देने, सरकारी काम में बाधा डालने और हाजत में रखे व्यक्ति को छुड़ाने का प्रयास किया गया. मामले में दो प्राथमिकी दर्ज हुई थीं. इससे पहले पुलिस एसोसिएशन ने कार्रवाई की मांग की थी. अदालत के फैसले के बाद जयराम महतो को इस मामले में फिलहाल बड़ी राहत मिली है.
बरवाअड्डा थाना मामले में जयराम महतो को मिली राहत
धनबाद की MP-MLA विशेष अदालत ने डुमरी विधायक जयराम महतो की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी करने के बाद सोमवार को फैसला सुनाया. अदालत ने विधायक के अलावा सुशील मंडल, महेंद्र साव और राजकुमार मंडल को भी अग्रिम जमानत प्रदान की. मामला बरवाअड्डा थाना प्रभारी रवि कुमार और जयराम महतो के बीच हुए विवाद से संबंधित है. गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान पुलिस ने अदालत के निर्देश पर केस डायरी प्रस्तुत की थी. विधायक समेत अन्य आरोपियों और सरकार का पक्ष सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. सोमवार को अदालत ने अग्रिम जमानत मंजूर कर दी. इससे आरोपियों को गिरफ्तारी से राहत मिली है, हालांकि मामले की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी.
थाना प्रभारी के बयान पर दर्ज हुई थी प्राथमिकी
बरवाअड्डा थाना प्रभारी रवि कुमार के बयान पर जयराम महतो, सुशील मंडल समेत अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी. आरोपों में थाना प्रभारी के साथ कथित गाली-गलौज, धमकी देना, सरकारी काम में बाधा डालना और हाजत में रखे गणेश दास को छुड़ाने का प्रयास शामिल है. इसके अलावा मुखिया के बेटे की शिकायत पर भी विधायक समेत अन्य के खिलाफ दूसरी प्राथमिकी दर्ज हुई थी. मामले को लेकर थाना प्रभारी और विधायक के बीच बातचीत का ऑडियो भी सामने आया था. जयराम महतो ने दावा किया था कि उनकी थाना प्रभारी से करीब 11 मिनट बातचीत हुई थी, लेकिन सार्वजनिक रूप से केवल दो मिनट का ऑडियो जारी किया गया. इस मामले में अदालत के समक्ष दोनों पक्षों की दलीलें रखी गईं.
गिरफ्तारी पर रोक से पहले कोर्ट ने मांगी थी केस डायरी
अग्रिम जमानत पर फैसला आने से पहले अदालत ने जयराम महतो की गिरफ्तारी पर रोक लगाने से इनकार करते हुए पुलिस से केस डायरी प्रस्तुत करने को कहा था. सुनवाई के दौरान विधायक की ओर से वरीय अधिवक्ता शाहनवाज ने गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की थी. सरकार की ओर से अपर लोक अभियोजक सतेंद्र नाथ राय ने इस मांग का विरोध किया था. इसके बाद अदालत ने मामले से संबंधित केस डायरी और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किया. गुरुवार को सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. सोमवार को अदालत ने जयराम महतो समेत चार आरोपियों की अग्रिम जमानत मंजूर कर ली. इस फैसले से बरवाअड्डा थाना मामले में विधायक को फिलहाल गिरफ्तारी से राहत मिल गई है.
झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने की थी कार्रवाई की मांग
बरवाअड्डा थाना विवाद को झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने प्रमुखता से उठाया था. एसोसिएशन ने जयराम महतो के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और कानूनी कार्रवाई की मांग की थी. साथ ही उनकी गिरफ्तारी की मांग को लेकर आंदोलन की चेतावनी भी दी गई थी. पुलिस एसोसिएशन ने 8 सितंबर से चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की थी. हालांकि, मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद राज्य में शोक को देखते हुए आंदोलन को फिलहाल स्थगित कर दिया गया. अब अदालत से अग्रिम जमानत मिलने के बाद इस मामले में राजनीतिक और पुलिस संगठनों की आगे की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी. जयराम महतो को मिली राहत के बाद मामले की कानूनी प्रक्रिया अपने अगले चरण में आगे बढ़ेगी.
ऑडियो विवाद के बाद बढ़ा था मामला
बरवाअड्डा थाना प्रभारी रवि कुमार और विधायक जयराम महतो के बीच हुई बातचीत का ऑडियो सामने आने के बाद विवाद और गहरा गया था. जयराम महतो ने कहा था कि उनकी थाना प्रभारी से करीब 11 मिनट बातचीत हुई थी, लेकिन सार्वजनिक रूप से केवल दो मिनट का ऑडियो जारी किया गया. इस बातचीत को लेकर दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप सामने आए. मामले में थाना प्रभारी के बयान और मुखिया के बेटे की शिकायत पर दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज होने की बात सामने आई थी. अदालत में सुनवाई के दौरान विधायक और अन्य आरोपियों की ओर से अग्रिम जमानत की मांग की गई. सरकारी पक्ष ने इसका विरोध किया. अब अदालत के आदेश के बाद आरोपियों को गिरफ्तारी से राहत मिली है. मामले की जांच और आगे की कार्रवाई कानून के अनुसार होगी.



