JPSC घोटाला: खियांग्ते के ऑपरेटर पर कमीशन का आरोप, खाते से 50 हजार के लेन-देन की जांच
JPSC मेधा घोटाला मामले की CID जांच में पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते के कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र कुमार की कथित भूमिका सामने आई है. जांच में टीडीपीएल को परीक्षा संचालन का काम दिलाने के बदले 1 प्रतिशत कमीशन तय करने और अभय कुमार तिवारी के खाते से 50 हजार रुपये के कथित लेन-देन की जानकारी सामने आई है.

रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षा से जुड़े कथित मेधा घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, मामले में नए नाम और आर्थिक लेन-देन सामने आ रहे हैं. सीआईडी की जांच में तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते के कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र कुमार की कथित भूमिका भी जांच के दायरे में आई है. जांच एजेंसी को आरोपियों के बयानों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर परीक्षा संचालन का ठेका दिलाने में उसकी भूमिका से जुड़े सुराग मिले हैं.
बताया जा रहा है कि निजी एजेंसी टीडीपीएल को परीक्षा संचालन का काम दिलाने के बदले धर्मेंद्र कुमार ने कथित तौर पर अपने लिए एक प्रतिशत कमीशन तय किया था. इसके अलावा, जांच में उस पर खियांग्ते के लिए रकम जुटाने का आरोप भी सामने आया है. सीआईडी अब इन दावों की पुष्टि के लिए बैंकिंग रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा और दूसरे डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है.
परीक्षा संचालन का ठेका दिलाने में भूमिका का आरोप
सीआईडी की पूछताछ में सामने आए बयानों के मुताबिक, धर्मेंद्र कुमार पर टीडीपीएल को परीक्षा संचालन का काम दिलाने में मदद करने का आरोप है. परीक्षा संचालन से जुड़े एजेंसी संचालक रामवीर सिंह और टीडीपीएल के पूर्व मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी ने भी कथित तौर पर धर्मेंद्र की भूमिका के बारे में जानकारी दी है. जांच एजेंसी इन बयानों को अन्य साक्ष्यों से मिलाकर देख रही है.
एक प्रतिशत कमीशन तय करने का दावा
आरोपी अरुण कुमार के बयान में धर्मेंद्र कुमार पर अलग से कमीशन लेने का आरोप लगाया गया है. बयान के अनुसार, एजेंसी को काम मिलने के बदले धर्मेंद्र ने कथित तौर पर एक प्रतिशत कमीशन तय किया था. हालांकि, इस रकम का वास्तविक भुगतान कितना हुआ और उसका पूरा नेटवर्क क्या था, इसे लेकर सीआईडी की जांच अभी जारी है.
50 हजार रुपये के लेन-देन की जांच
जांच में अभय कुमार तिवारी के बैंक खाते से 50 हजार रुपये के कथित लेन-देन का भी उल्लेख सामने आया है. आरोप है कि यह रकम धर्मेंद्र कुमार ने अपनी पत्नी के नाम पर बुलेट मोटरसाइकिल खरीदने के लिए ली थी. सीआईडी इस लेन-देन से जुड़े बैंक रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है, ताकि रकम के उद्देश्य और उसके इस्तेमाल की पुष्टि की जा सके.
कार्यालय से मिले आठ अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड
सीआईडी को धर्मेंद्र कुमार के कार्यालय की अलमारी से आठ अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड की फोटोकॉपी मिलने की बात भी सामने आई है. जांच एजेंसी ने इन दस्तावेजों को महत्वपूर्ण साक्ष्य के तौर पर शामिल किया है. अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ये दस्तावेज वहां क्यों रखे गए थे और कथित परीक्षा नेटवर्क से इनका कोई संबंध था या नहीं.
WhatsApp चैट और डिजिटल सबूत खंगाल रही CID
मामले की जांच में आरोपियों के मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड और दूसरे डिजिटल डेटा का भी विश्लेषण किया गया है. जांच एजेंसी के अनुसार, कथित सिंडिकेट से जुड़े लोगों के बीच WhatsApp के जरिए लगातार संपर्क होने के संकेत मिले हैं. अब सीआईडी मोबाइल चैट, कॉल रिकॉर्ड और आर्थिक लेन-देन को आपस में जोड़कर पूरे नेटवर्क की भूमिका समझने की कोशिश कर रही है. जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और संबंधित लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी.

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