झारखंड को पांच साल बाद मिला लोकायुक्त, रिटायर्ड जज अमिताभ गुप्ता ने ली शपथ
झारखंड को करीब पांच साल के लंबे अंतराल के बाद नया लोकायुक्त मिल गया है. रिटायर्ड जज अमिताभ कुमार गुप्ता ने राजभवन में आयोजित समारोह में पद और गोपनीयता की शपथ ली. इस मौके पर राज्यपाल और मुख्यमंत्री सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.


झारखंड को करीब पांच साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार नया लोकायुक्त मिल गया है. राज्य में यह महत्वपूर्ण पद जून 2021 से खाली था, जिसके कारण भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की निगरानी और कार्रवाई प्रभावित हो रही थी. अब इस पद पर झारखंड हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश अमिताभ कुमार गुप्ता की नियुक्ति से प्रशासनिक व्यवस्था में नई सक्रियता आने की उम्मीद जताई जा रही है.
राजभवन में आयोजित एक संक्षिप्त लेकिन औपचारिक कार्यक्रम में राज्यपाल ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई. इस मौके पर मुख्यमंत्री समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. इस नियुक्ति को राज्य में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. अब लोकायुक्त संस्था के सक्रिय होने से भ्रष्टाचार के मामलों की जांच तेज होने की संभावना है.
राजभवन में सादगीपूर्ण शपथ ग्रहण समारोह
राजभवन के लोकभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह सादगीपूर्ण और संक्षिप्त रहा. कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगान से हुई और समापन भी राष्ट्रगान के साथ किया गया.
समारोह के दौरान राज्यपाल संतोष गंगवार ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश अमिताभ कुमार गुप्ता को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई. इस मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे.
कार्यक्रम के दौरान राज्य के मुख्य सचिव अविनाश कुमार ने नियुक्ति आदेश का वाचन किया, जिसमें 16 अप्रैल को जारी नियुक्ति की पुष्टि की गई थी.
निष्पक्षता और पारदर्शिता का संकल्प
शपथ लेते हुए अमिताभ कुमार गुप्ता ने संविधान के प्रति निष्ठा रखते हुए निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से अपने दायित्वों का निर्वहन करने का संकल्प लिया. उन्होंने बिना किसी भय या पक्षपात के कार्य करने की बात कही.
समारोह के अंत में राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने उन्हें शुभकामनाएं दीं और उनके सफल कार्यकाल की कामना की. लोकायुक्त के रूप में उनकी भूमिका राज्य में प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करने में अहम मानी जा रही है.
भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई में आएगी तेजी
झारखंड में लोकायुक्त का पद लंबे समय से खाली था, जिससे भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच प्रभावित हो रही थी. अब नए लोकायुक्त की नियुक्ति के बाद इन मामलों में तेजी आने की उम्मीद है.
विशेषज्ञों का मानना है कि लोकायुक्त संस्था के सक्रिय होने से सरकारी तंत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी. इसके साथ ही राज्य सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को भी मजबूती मिलने की संभावना है.

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