दक्षिण लेबनान में फिर बरसे इजरायली बम, 9 की मौत; युद्धविराम के बीच बढ़ा तनाव, हिज्बुल्लाह पर इजरायल का बड़ा आरोप
“दक्षिण लेबनान में इजरायली एयरस्ट्राइक के बाद एक बार फिर तनाव बढ़ गया है. अंसार और देइर अल-जहरानी इलाके में हुए हमलों में कम से कम 9 लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने की खबर है.”

New Delhi: दक्षिण लेबनान में शनिवार को इजरायल के हवाई हमलों ने जून में बने युद्धविराम की नाजुक स्थिति को फिर उजागर कर दिया. लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय और सरकारी समाचार एजेंसी के मुताबिक, अंसार और देइर अल-जहरानी इलाके में हुए हमलों में कम से कम 9 लोगों की मौत हुई, जिनमें तीन बच्चे भी शामिल हैं. अलग-अलग हमलों में कई लोग घायल हुए हैं. इजरायल का कहना है कि उसकी कार्रवाई हिज्बुल्लाह के ठिकानों और सैन्य ढांचे के खिलाफ थी. वहीं लेबनानी सरकार ने हमले की कड़ी निंदा की है. अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इसे जून के बाद दक्षिण लेबनान में सबसे घातक घटनाओं में से एक बताया है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या युद्धविराम और शांति वार्ता के बीच एक बार फिर संघर्ष का दायरा बढ़ने लगा है.
दो इलाकों में एयर स्ट्राइक, 9 लोगों की मौत
शनिवार को दक्षिण लेबनान के अंसार गांव के बाहरी इलाके में एक घर को निशाना बनाकर हमला किया गया. लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस हमले में सात लोगों की मौत हुई, जिनमें तीन बच्चे शामिल हैं. दो अन्य लोग घायल बताए गए हैं. इसके कुछ समय बाद देइर अल-जहरानी में भी इजरायली हमला हुआ, जिसमें दो लोगों की मौत और नौ लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई. हमलों के बाद प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान चलाया गया. मलबे में लोगों के फंसे होने की आशंका के चलते मृतकों और घायलों की संख्या बढ़ने की संभावना भी जताई गई थी. शुरुआती रिपोर्टों में अलग-अलग इलाकों के आंकड़े सामने आने के कारण कुल संख्या को लेकर अपडेट जारी होते रहे.
इजरायल बोला- हिज्बुल्लाह के ठिकानों को बनाया निशाना
इजरायली सेना ने इन हमलों को हिज्बुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई बताया है. इजरायल का कहना है कि दक्षिण लेबनान में हिज्बुल्लाह की सैन्य गतिविधियां जारी हैं और उसके खिलाफ कार्रवाई सुरक्षा कारणों से की जा रही है. इजरायली पक्ष ने हालिया घटनाओं को अपने सैनिकों के खिलाफ हुई गतिविधियों से भी जोड़ा है. इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच तनाव जून में संघर्षविराम के बाद भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ. सीमा क्षेत्र में इजरायली सैन्य कार्रवाई और हिज्बुल्लाह से जुड़ी गतिविधियों को लेकर दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप लगातार सामने आते रहे हैं.
लेबनान ने जताई कड़ी आपत्ति, नागरिकों की सुरक्षा पर सवाल
लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने हमले की आलोचना की है. लेबनानी सरकार का कहना है कि हमलों में मारे गए लोगों में आम नागरिक भी शामिल हैं और ऐसी कार्रवाई दक्षिण लेबनान में स्थिरता लाने की कोशिशों को नुकसान पहुंचाती है. राष्ट्रपति जोसेफ औन ने भी हमलों को बातचीत के संदर्भ में एक गंभीर संदेश बताया है. अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, शनिवार की कार्रवाई जून के बाद क्षेत्र में हुई सबसे घातक घटनाओं में शामिल है. इससे यह आशंका बढ़ी है कि युद्धविराम के बावजूद दक्षिण लेबनान में हालात फिर तेजी से बिगड़ सकते हैं.
युद्धविराम के बाद भी क्यों नहीं थम रहा संघर्ष?
इजरायल और लेबनान के बीच जून में हुए समझौते का मकसद दक्षिण लेबनान में सैन्य तनाव कम करना और आगे की बातचीत का रास्ता खोलना था. 26 जून को घोषित फ्रेमवर्क में इजरायली सेना की दक्षिण लेबनान से वापसी और हिज्बुल्लाह के हथियारों को लेकर व्यवस्था पर चर्चा हुई थी. हालांकि, हिज्बुल्लाह ने इस प्रक्रिया को स्वीकार नहीं किया और निरस्त्रीकरण के सवाल पर उसका रुख अलग रहा है. यही मुद्दा अब शांति प्रक्रिया की सबसे बड़ी अड़चनों में से एक बना हुआ है. इजरायल का कहना है कि जब तक हिज्बुल्लाह को निरस्त्र नहीं किया जाता, दक्षिण लेबनान से उसकी सैन्य वापसी संभव नहीं है. अमेरिका की मध्यस्थता से हुए समझौते के तहत इस मुद्दे पर मतभेद बने हुए हैं.
इजरायल की वापसी और हिज्बुल्लाह का निरस्त्रीकरण बना सबसे बड़ा पेच
हमले से ठीक पहले भी दक्षिण लेबनान में इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच तनाव बना हुआ था. Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल ने साफ किया है कि वह हिज्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण तक दक्षिण लेबनान से पीछे हटने को तैयार नहीं है. दूसरी ओर हिज्बुल्लाह का कहना है कि इजरायली सेना की मौजूदगी रहते हथियार डालने पर बातचीत नहीं हो सकती. ऐसे में शनिवार के हमले केवल एक सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं दिखते, बल्कि इनका असर चल रही राजनीतिक और कूटनीतिक प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है. दक्षिण लेबनान में पहले से विस्थापन और भारी तबाही के बीच ताजा हिंसा ने शांति वार्ता के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि युद्धविराम को प्रभावी कैसे बनाया जाए और दोनों पक्षों को दोबारा बड़े संघर्ष की ओर बढ़ने से कैसे रोका जाए.


