JSSC-CGL पर हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी, कल JPSC समेत इन परीक्षाओं पर होगी सुनवाई
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ चल रही कानूनी लड़ाई में गुरुवार का दिन JSSC-CGL के लिए अहम रहा. झारखंड हाईकोर्ट में (JSSC-CGL) परीक्षा-2023 को रद्द करने के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई पूरी हो गई.

Ranchi:- झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ चल रही कानूनी लड़ाई में गुरुवार का दिन JSSC-CGL के लिए अहम रहा. झारखंड हाईकोर्ट में Jharkhand Staff Selection Commission Combined Graduate Level (JSSC-CGL) परीक्षा-2023 को रद्द करने के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई पूरी हो गई. सरकार ने परीक्षा में बड़े पैमाने पर अनियमितता, कथित वित्तीय लेन-देन और CID जांच में सामने आए तथ्यों का हवाला देते हुए अपना पक्ष रखा. दूसरी तरफ याचिकाकर्ताओं ने पूरी परीक्षा रद्द करने के फैसले पर सवाल उठाए. सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी पूछा कि अब तक की जांच में पेपर लीक की पुष्टि किस स्तर तक हुई है. अब शुक्रवार को हाईकोर्ट में JSSC-CGL से अलग उन अन्य परीक्षाओं से जुड़े मामलों पर सुनवाई होगी, जिन्हें राज्य सरकार ने 18 अगस्त के आदेश के जरिए रद्द किया था. इनमें JPSC 11वीं-13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, Child Development Project Officer (CDPO), Food Safety Officer, Assistant Conservator of Forest और Forest Range Officer से जुड़े मामले शामिल हैं.
बुधवार की सुनवाई में कोर्ट ने सरकार से पूछे थे सवाल
JSSC-CGL मामले की बुधवार की सुनवाई में हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले और CID जांच को लेकर कई सवाल उठाए थे. अदालत ने यह जानना चाहा कि जब जांच अभी जारी है, तब पूरी परीक्षा और उससे जुड़ी नियुक्तियों को रद्द करने का आधार क्या है. कोर्ट ने यह भी कहा कि उसके सामने फिलहाल यह देखना है कि सरकार की ओर से जारी आदेश को लागू करने में कानूनी प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं.
सरकार की ओर से अदालत में सीलबंद जांच रिपोर्ट भी पेश की गई थी. राज्य की ओर से वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा और महाधिवक्ता रोहिताश्व राय ने परीक्षा रद्द करने के फैसले का बचाव किया. सरकार का कहना था कि जांच में बड़े पैमाने पर अनियमितता और वित्तीय लेन-देन के तथ्य सामने आए हैं और जांच अभी जारी है. सरकार की दलील थी कि ऐसी स्थिति में दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों को अलग-अलग करना आसान नहीं है.
वहीं याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि JSSC-CGL में पूरे प्रश्नपत्र के लीक होने का स्पष्ट प्रमाण सामने नहीं आया है. उनकी दलील थी कि यदि कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित तरीके से लाभ मिला है तो जांच के आधार पर दोषियों की पहचान की जानी चाहिए, न कि पूरी परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया को एक साथ रद्द कर दिया जाए.
आज JSSC-CGL पर पूरी हुई बहस, पेपर लीक और मनी ट्रेल पर टकराव
गुरुवार को JSSC-CGL मामले में सरकार ने एक बार फिर जांच के दौरान सामने आए मनी ट्रेल और बड़े पैमाने पर कथित अनियमितताओं को अपने फैसले का आधार बताया. सरकार का पक्ष था कि परीक्षा प्रक्रिया के एक बड़े हिस्से पर यदि संदेह पैदा हो गया है तो केवल कुछ अभ्यर्थियों को अलग कर पूरी भर्ती प्रक्रिया को जारी रखना निष्पक्ष नहीं होगा.
दूसरी तरफ अदालत के सवालों का केंद्र यह रहा कि जांच में पेपर लीक की पुष्टि कितनी स्पष्ट है. हस्तक्षेपकर्ता की ओर से अधिवक्ता कुमार हर्ष ने दलील दी कि परीक्षा का पेपर WhatsApp और Telegram जैसे माध्यमों से फैलाया गया था. वहीं याचिकाकर्ताओं की ओर से वरीय अधिवक्ता राजीव रंजन, अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अमृतांश वत्स समेत अन्य अधिवक्ताओं ने परीक्षा रद्द करने के फैसले को चुनौती देते हुए अपना पक्ष रखा. अब इस मामले में अदालत के आगे के आदेश पर नजर रहेगी. इससे पहले हाईकोर्ट ने JSSC-CGL से जुड़े करीब 2700 चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति रद्द करने के मामले में भी सरकार की प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय के पहलू पर सवाल उठाए थे.
कल JPSC 11वीं-13वीं, CDPO, FSO, ACF और FRO मामलों की बारी
अब नजर शुक्रवार की सुनवाई पर है. सरकार ने 18 अगस्त को कई प्रतियोगी परीक्षाओं और नियुक्ति प्रक्रियाओं को रद्द किया था. इसके बाद प्रभावित अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. JPSC की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रतियोगिता परीक्षा, Child Development Project Officer (CDPO) नियुक्ति परीक्षा और Food Safety Officer (FSO) नियुक्ति परीक्षा को रद्द करने के फैसले के खिलाफ अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई हैं. इन मामलों में अदालत पहले ही नियुक्त हो चुके उम्मीदवारों को तत्काल हटाने पर रोक लगा चुकी है.
इसके अलावा Assistant Conservator of Forest (ACF) 2024 और Forest Range Officer (FRO) 2024 की नियुक्ति प्रक्रिया रद्द किए जाने को भी हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है. इन दोनों मामलों में स्थिति JPSC 11वीं-13वीं, CDPO, FSO और JSSC-CGL से कुछ अलग है, क्योंकि इन परीक्षाओं में नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी. अगस्त में हाईकोर्ट ने ACF और FRO के मामले में तत्काल रोक लगाने से इनकार करते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा था. FRO परीक्षा में JPSC ने 170 पदों के लिए भर्ती निकाली थी और मुख्य परीक्षा में सफल 743 अभ्यर्थी शारीरिक जांच की प्रक्रिया का इंतजार कर रहे थे.
सरकार ने जिन परीक्षाओं को रद्द किया था, उनमें JPSC 11वीं-13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, CDPO, Food Safety Officer, Assistant Conservator of Forest और Forest Range Officer समेत कई परीक्षाएं शामिल हैं. सरकार का आधार कथित अनियमितताओं और परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसियों की भूमिका को लेकर चल रही जांच है. दूसरी तरफ अभ्यर्थियों का तर्क है कि पूरी परीक्षा या नियुक्ति प्रक्रिया को एक साथ रद्द करने के बजाय दोषी अभ्यर्थियों और वास्तविक अनियमितता की पहचान की जानी चाहिए.
यानी गुरुवार को JSSC-CGL पर सुनवाई पूरी होने के बाद अब शुक्रवार की सुनवाई का फोकस बाकी रद्द परीक्षाओं पर रहेगा. हजारों अभ्यर्थियों के लिए यह सुनवाई इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि हाईकोर्ट के सामने अब यह सवाल है कि सरकार द्वारा अलग-अलग परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने के लिए दिए गए आधार कानूनी कसौटी पर कितने टिकते हैं.



