JPSC-JSSC छात्रों से थोड़ी देर में सरकार की वार्ता, CBI जांच और CGL रद्द करने पर फंसा पेच; 20 अगस्त के घेराव पर टिकी नजर
JPSC-JSSC विवाद को लेकर 24 दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन के बीच सरकार और छात्रों की अहम वार्ता आज दोपहर 2 बजे होगी. CBI जांच और CGL परीक्षा रद्द करने की मांग पर गतिरोध कायम है. वार्ता के नतीजे पर 20 अगस्त के प्रस्तावित CM आवास घेराव का रुख निर्भर करेगा.


Ranchi: JPSC-JSSC भर्ती विवाद को लेकर 24 दिन से जारी छात्र आंदोलन के बीच सरकार और आंदोलनकारी छात्रों की अहम वार्ता आज दोपहर दो बजे होने जा रही है. स्टेट गेस्ट हाउस में होने वाली इस बैठक में सरकार की ओर से चार मंत्री और छात्रों की तरफ से 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल शामिल होगा. इस बार बातचीत इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछली बैठकों से कोई ठोस नतीजा नहीं निकला और आंदोलन अब भूख हड़ताल से लेकर मुख्यमंत्री आवास घेराव के ऐलान तक पहुंच चुका है. छात्रों की दो सबसे बड़ी मांगें JPSC पेपर लीक मामले की CBI जांच और JSSC-CGL परीक्षा रद्द करना है. सरकार पहले ही JPSC मामले की CID जांच और CGL को लेकर कानूनी अड़चन का तर्क दे चुकी है. ऐसे में आज की वार्ता असल में दोनों पक्षों के बीच रास्ता निकालने की कोशिश है. अगर सहमति नहीं बनी, तो 20 अगस्त का प्रस्तावित CM आवास घेराव सरकार के सामने अगली बड़ी चुनौती होगा.
इस बार बातचीत का एजेंडा साफ
सरकार और छात्रों के बीच दोपहर दो बजे होने वाली बैठक को आंदोलन के अब तक के सबसे अहम पड़ावों में माना जा रहा है. सरकार की ओर से सुदिव्य कुमार सोनू, दीपिका पांडेय सिंह, चमरा लिंडा और संजय सिंह यादव बातचीत में शामिल होंगे. छात्रों का 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल अपनी मांगें रखेगा. प्रतिनिधिमंडल में कानूनी जानकार को शामिल करना भी इस बार की बातचीत को पिछली बैठकों से अलग बनाता है. पिछली 9 अगस्त की बैठक भी बिना सहमति के खत्म हुई थी. उससे पहले सरकार और छात्रों के बीच बातचीत के कई दौर हो चुके हैं, लेकिन मूल मांगों पर गतिरोध कायम है. अब सरकार की कोशिश सिर्फ बातचीत जारी रखने की नहीं, बल्कि कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर कोई ऐसा रास्ता निकालने की है जिसे छात्र स्वीकार कर सकें.
CBI जांच बनाम CID जांच, यहीं सबसे बड़ा गतिरोध
आंदोलन का सबसे पेचीदा हिस्सा JPSC पेपर लीक मामले की जांच को लेकर है. छात्र राज्य की जांच एजेंसी पर भरोसा जताने के बजाय CBI जांच की मांग कर रहे हैं. उनका तर्क है कि भर्ती प्रक्रिया पर लगे गंभीर आरोपों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच जरूरी है. सरकार की तरफ से अब तक CID जांच का हवाला दिया जाता रहा है. सरकार का दावा है कि जांच में कार्रवाई हुई है और कई लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है. लेकिन छात्रों के लिए सवाल सिर्फ गिरफ्तारी का नहीं, जांच की विश्वसनीयता और अंतिम निष्कर्ष का है. यही अंतर दोनों पक्षों के बीच बातचीत को बार-बार उसी बिंदु पर ले आता है. इससे पहले भी अभ्यर्थियों ने CID जांच पर सवाल उठाते हुए CBI जांच की मांग की थी.
CGL रद्द करने पर कानूनी पेच, छात्रों की मांग दो टूक
दूसरा बड़ा विवाद JSSC-CGL परीक्षा को लेकर है. छात्र परीक्षा रद्द करने की मांग पर अड़े हैं, जबकि सरकार की तरफ से इसे लेकर कानूनी अड़चन का तर्क दिया जा रहा है. यही वह मुद्दा है जिस पर आज की वार्ता में राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर ठोस विकल्प तलाशना होगा. 10 अगस्त को छात्रों का विधानसभा मार्च भी पुलिस के साथ टकराव में बदल गया था. बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश के बाद पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था. उस घटना के बाद आंदोलन और आक्रामक हुआ है. इसलिए आज की बातचीत में सरकार अगर सिर्फ जांच जारी रहने या कानूनी प्रक्रिया का हवाला देती है, तो छात्रों को संतुष्ट करना मुश्किल होगा. दूसरी तरफ परीक्षा रद्द करने का फैसला कानूनी चुनौती पैदा कर सकता है. यही इस वार्ता की सबसे बड़ी गांठ है.
20 अगस्त का घेराव, सरकार के पास आज समाधान निकालने का दबाव
वार्ता विफल रही तो 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास घेराव का कार्यक्रम पहले से घोषित है. छात्र संगठनों ने राज्यभर के अभ्यर्थियों से रांची पहुंचने की अपील की है. प्रशासन ने भी संभावित भीड़ को देखते हुए मुख्यमंत्री आवास और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी है. इस आंदोलन का एक राजनीतिक पहलू भी अब साफ दिखाई दे रहा है. विपक्षी बीजेपी ने छात्रों के 20 अगस्त के कार्यक्रम को नैतिक समर्थन दिया है और कांग्रेस से सरकार से समर्थन वापस लेने की मांग तक उठाई है. दूसरी ओर सत्तारूढ़ JMM ने छात्रों से किसी के बहकावे में नहीं आने की अपील की है. यानी आज की बैठक सिर्फ सरकार और छात्रों के बीच एक और संवाद नहीं है. इसके नतीजे से यह तय होगा कि आंदोलन बातचीत की मेज पर लौटता है या 20 अगस्त को सड़क पर टकराव का अगला दौर शुरू होता है. छात्रों की तरफ से मांगें स्पष्ट हैं; अब सरकार को यह दिखाना होगा कि वह उन मांगों पर क्या ठोस प्रस्ताव रख सकती है.

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