उत्पाद सिपाही पेपर लीक केस: 6 आरोपियों को नहीं मिली जमानत, कोर्ट ने याचिका की खारिज
झारखंड उत्पाद सिपाही (Excise Constable) भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में एक बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है. रांची की अदालत ने इस मामले में जेल में बंद छह आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं.

Ranchi: झारखंड उत्पाद सिपाही (Excise Constable) भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में एक बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है. रांची की अदालत ने इस मामले में जेल में बंद छह आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं. मामले की सुनवाई कर रहे अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाते हुए कोर्ट ने सभी आरोपियों को राहत देने से इनकार कर दिया. यह मामला राज्य में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाला माना जा रहा है. जांच एजेंसियों का दावा है कि पेपर लीक गिरोह ने अभ्यर्थियों से मोटी रकम लेकर उन्हें परीक्षा से पहले प्रश्नों के उत्तर याद करवाए थे. इस मामले में अब तक 166 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में आरोपियों को जमानत भी मिल चुकी है. अदालत का यह फैसला मामले की जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
कोर्ट ने छह आरोपियों को जमानत देने से किया इनकार
उत्पाद सिपाही पेपर लीक मामले में आरोपी आशीष कुमार, विकास कुमार, योगेश प्रसाद, रंजीत कुमार उर्फ चुनचुन, गुलाब चंद महतो और बुलबुल पांडे उर्फ राज ने अदालत में जमानत याचिका दाखिल की थी. सुनवाई के दौरान आरोपियों के वकीलों ने तर्क दिया कि मामले में पैसों के लेन-देन का कोई ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं है. इसके समर्थन में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का भी हवाला दिया गया. हालांकि अदालत ने मामले की गंभीरता और जांच से जुड़े तथ्यों को देखते हुए सभी तर्कों को पर्याप्त नहीं माना. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया आरोप गंभीर हैं और जांच अभी भी महत्वपूर्ण चरण में है. इसी आधार पर सभी छह आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गईं. अदालत का यह फैसला मामले में शामिल अन्य आरोपियों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
जांच अधिकारी ने कोर्ट में पेश किए अहम दस्तावेज
जमानत याचिकाओं पर फैसला सुनाने से पहले अदालत ने मामले के अनुसंधानकर्ता (IO) से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी. अदालत के निर्देश पर जांच अधिकारी ने आरोपियों के आपराधिक इतिहास और केस डायरी से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत किए. इन दस्तावेजों में आरोपियों की भूमिका, गिरोह के साथ संबंध और जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों का उल्लेख किया गया था. अभियोजन पक्ष ने कोर्ट को बताया कि पेपर लीक मामले में संगठित गिरोह सक्रिय था, जो अभ्यर्थियों से भारी रकम लेकर उन्हें परीक्षा में अनुचित लाभ पहुंचाने का प्रयास कर रहा था. अदालत ने इन तथ्यों को गंभीरता से लेते हुए जमानत याचिकाओं पर विचार किया. गौरतलब है कि इस मामले में अब तक 161 आरोपियों को जमानत मिल चुकी है, लेकिन मुख्य आरोपियों और गिरोह से जुड़े सदस्यों के खिलाफ जांच एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं.
तमाड़ में छापेमारी के दौरान 166 लोगों की हुई थी गिरफ्तारी
इस पूरे मामले का खुलासा 11 अप्रैल 2026 की रात हुई एक बड़ी पुलिस कार्रवाई के दौरान हुआ था. पुलिस को सूचना मिली थी कि तमाड़ के रड़गांव स्थित एक अर्धनिर्मित भवन में बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हैं. सूचना के आधार पर विशेष छापेमारी दल ने देर रात मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की. पुलिस को देखकर वहां मौजूद कई लोग भागने लगे, लेकिन टीम ने 166 लोगों को मौके से गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तार लोगों में अभ्यर्थियों के अलावा पेपर लीक और सॉल्वर गैंग से जुड़े कई सदस्य भी शामिल थे. पुलिस के अनुसार यह गिरोह परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को संभावित प्रश्नों के उत्तर रटवा रहा था. छापेमारी के दौरान कई दस्तावेज, मोबाइल फोन और अन्य संदिग्ध सामग्री भी बरामद की गई थी. इस कार्रवाई ने राज्यभर में भर्ती परीक्षा घोटाले की परतें खोल दी थीं.
पेपर लीक गिरोह का नेटवर्क और करोड़ों का खेल
जांच में सामने आया कि पेपर लीक गिरोह ने अभ्यर्थियों से परीक्षा में सफलता दिलाने के नाम पर बड़ी रकम वसूली थी. पुलिस के अनुसार कई अभ्यर्थियों से प्रति व्यक्ति लगभग 10 लाख रुपये तक की डील की गई थी. गिरोह के एजेंट अभ्यर्थियों को एक स्थान पर रखकर प्रश्नों के संभावित उत्तर याद करवाते थे. इतना ही नहीं, अभ्यर्थियों के मोबाइल फोन और एडमिट कार्ड भी अपने कब्जे में रख लिए जाते थे ताकि पूरी प्रक्रिया पर नियंत्रण बना रहे. जांच के दौरान यह भी जानकारी मिली कि कुछ अभ्यर्थियों ने भुगतान सुनिश्चित करने के लिए गिरोह के सदस्यों को बैंक चेक तक दिए थे. पुलिस का मानना है कि यह एक अंतरराज्यीय नेटवर्क था, जिसमें कई राज्यों के लोग शामिल थे. मामले की जांच अभी भी जारी है और कई महत्वपूर्ण खुलासों की संभावना जताई जा रही है.
FIR और अब तक की कार्रवाई
तमाड़ थाना में इस मामले को लेकर कांड संख्या 21/2026 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी. एफआईआर में कुल 166 लोगों को आरोपी बनाया गया, जिनमें 152 पुरुष अभ्यर्थी, 7 महिला अभ्यर्थी, 5 कथित गिरोह सरगना और अन्य सहयोगी शामिल हैं. गिरफ्तार आरोपियों को 13 अप्रैल को अदालत में पेश किया गया था, जिसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. पुलिस लगातार मामले की जांच कर रही है और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है. भर्ती परीक्षा में धांधली के इस बड़े मामले ने राज्य में सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. वहीं अदालत द्वारा छह आरोपियों की जमानत याचिका खारिज किए जाने को जांच एजेंसियों के लिए एक बड़ी सफलता माना जा रहा है.

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