संथाली भाषा की परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने की मांग, छात्रों ने कहा- आश्वासन नहीं, लिखित आदेश चाहिए
झारखंड में संथाली भाषा की परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों ने परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित करने की मांग उठाई है.अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से हस्तक्षेप, शिकायतों की निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है.

रांची:- झारखंड में संथाली भाषा की परीक्षा को लेकर विवाद के बीच अभ्यर्थियों की ओर से परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित करने की मांग उठाई गई है. छात्रों का कहना है कि पिछले ढाई से तीन महीने से वे अपनी मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक केवल आश्वासन ही मिल रहा है. उनका आरोप है कि परीक्षा रद्द करने और री-एग्जाम कराने की बात कही गई, मगर संबंधित लिखित अधिसूचना जारी होने का इंतजार बना हुआ है. अभ्यर्थियों का कहना है कि किसी भी निर्णय की आधिकारिक पुष्टि अधिसूचना से ही हो सकती है. इस मामले में छात्रों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से हस्तक्षेप करने की अपील की है. उनका कहना है कि जब तक परीक्षा रद्द करने और दोबारा आयोजन को लेकर स्पष्ट निर्णय नहीं आता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा. छात्रों ने निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग भी उठाई है.
परीक्षा के प्रश्नों पर उठे सवाल
संथाली भाषा की परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों ने प्रश्नपत्र के स्तर और पाठ्यक्रम से जुड़े सवाल उठाए हैं. 25 जुलाई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की फील्ड वर्कर भर्ती परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया था कि संथाली भाषा के प्रश्नपत्र के कई सवाल निर्धारित पाठ्यक्रम से बाहर के थे. कुछ प्रश्नों का स्तर भी अपेक्षा से अधिक कठिन होने का दावा किया गया. हालांकि, ये अभ्यर्थियों के आरोप हैं, जिन्हें आधिकारिक जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.
आश्वासन के बाद भी अधिसूचना की मांग
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि उन्हें परीक्षा रद्द करने और दोबारा परीक्षा कराने का भरोसा दिया गया, लेकिन केवल मौखिक आश्वासन से उनकी चिंता दूर नहीं हो रही है. वे चाहते हैं कि संबंधित आयोग या सरकार आधिकारिक आदेश जारी कर स्थिति स्पष्ट करे. अभ्यर्थियों के मुताबिक, लिखित सूचना के अभाव में उनके भविष्य और आगे की तैयारी को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है.
संथाल छात्रों ने आंदोलन जारी रखने की कही बात
छात्र प्रतिनिधि ने अपने बयान में कहा कि संथाल समुदाय की शांति को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए. उन्होंने संथाल विद्रोह, तिलका मांझी के संघर्ष और उलगुलान जैसे ऐतिहासिक आंदोलनों का उल्लेख करते हुए अपनी भाषा और संस्कृति की रक्षा के प्रति प्रतिबद्धता जताई. साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई संवैधानिक तरीके से जारी रहेगी और मांग पूरी होने तक वे पीछे हटने के पक्ष में नहीं हैं.
मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की अपील
अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मामले को गंभीरता से लेने की अपील की है. उनकी मांग है कि परीक्षा से जुड़ी शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए. छात्रों का कहना है कि सरकार के फैसले का असर केवल अभ्यर्थियों पर नहीं, बल्कि उनके परिवारों की उम्मीदों पर भी पड़ता है.
अब आधिकारिक फैसले का इंतजार
इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल परीक्षा की स्थिति और छात्रों की शिकायतों के समाधान का है. अभ्यर्थी परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजन की मांग पर अड़े हैं, जबकि अंतिम स्थिति की पुष्टि संबंधित आयोग की आधिकारिक अधिसूचना से ही की जानी चाहिए. फिलहाल, छात्रों की मांग है कि सरकार इस विवाद पर स्पष्ट रुख अपनाए, शिकायतों की जांच करे और अभ्यर्थियों को समयबद्ध तरीके से जानकारी उपलब्ध कराए.


