Delhi-NCR में Air पॉल्यूशन पर CJI की दो टूक: पराली जलाने पर नहीं होनी चाहिए राजनीति
एयर पॉल्यूशन पर सुनवाई के दौरान CJI ने पूछा, कोविड के दौरान पराली जलाई जा रही थी लेकिन फिर भी लोगों को साफ नीला आसमान क्यों दिखाई दे रहा था? सीजेआई ने कहा, हम एक हफ्ते के भीतर पराली जलाने के अलावा अन्य कारणों को रोकने के लिए उठाए गए प्रभावी उपायों पर एक रिपोर्ट चाहते हैं.

New Delhi: दिल्ली-एनसीआर में एयर पॉल्यूशन पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक कहा कि पराली जलाने पर राजनीति नहीं होना चाहिए. सीजेआई सूर्यकांत की अदालत में सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा कि यह कोई सीजनल विवाद नहीं बल्कि एक लगातार निगरानी का मुद्दा है. वहीं कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि कोविड के दौरान भी देश के किसानों ने पराली जलाई थी फिर भी उस दौरान आसमान नीला था. ऐसा क्यों हुआ? कोर्ट ने कहा कि अब यह मामला केवल अक्टूबर-नवंबर में ही नहीं उठेगा बल्कि इसे नियमित रूप से लिस्ट किया जाएगा ताकि सरकारें सिर्फ सीजन खत्म होने का इंतजार न करें. कोर्ट ने कहा, खराब एयर क्वालिटी और पॉल्यूशन के मुद्दे को हर साल आने वाली एक रस्म की तरह नहीं देखा जा सकता. दिल्ली में प्रदूषण के मामले को अक्टूबर में बस लिस्ट करके नहीं छोड़ा जा सकता, हम इसकी नियमित सुनवाई करेंगे.
आयोग से सवाल
सीजेआई सूर्यकांत ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग और केंद्र सरकार से कहा कि हम में से कोई भी खाली नहीं बैठ सकता. हम यह नहीं मान सकते कि इस समस्या का कोई हल नहीं है. कोर्ट ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग से अपनी छोटी और लंबी अवधि की योजनाओं को पेश करने के लिए भी कहा. सीजेआई ने आयोग से पूछा कि खुद से एक सवाल पूछिए, क्या आपकी कार्य योजना ने स्थिति को सुधारा है? उन्होंने आयोग को यह सोचने के लिए कहा कि क्या एक्शन प्लान से उनकी उम्मीदें पूरी हुई हैं? अगर आपकी कार्य योजना अप्रभावी रही है, तो शायद आपको किसी वैकल्पिक उपाय के बारे में सोचना होगा.
कोविड काल में भी पराली जली, फिर भी आसमान नीला था क्यों?
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि आयोग ने हर राज्य सरकार से सलाह ली है और पराली जलाने, गाड़ियों से निकलने वाला धुआं, निर्माण स्थलों की धूल, सड़क की धूल और बायोमास जलाने जैसे मुख्य कारणों पर विस्तृत कार्य योजनाएं तैयार की हैं. उन्होंने माना कि कार्यान्वयन की आवश्यकता है. इसपर कोर्ट ने कहा कि पराली जलाने पर बहुत ज्यादा ध्यान देना गलत है. कहा कि हम पराली जलाने पर टिप्पणी नहीं करना चाहते क्योंकि उन लोगों पर बोझ डालना आसान है जिनका हमारे सामने कोई प्रतिनिधित्व नहीं है. यह एक ऐसी चीज बन गई है जिस पर आप आसानी से दोष मढ़ सकते हैं. कोरोना काल के दौरान हुए बड़े बदलावों की ओर इशारा करते हुए बेंच ने पूछा कि कोविड के समय में भी पराली जल रही थी, फिर भी आसमान नीला क्यों था? किसी को इसका जवाब देना होगा.

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