देहरादून मॉल के बाहर क्लोज रेंज फायरिंग, गैंगस्टर अखिलेश सिंह का गुरु विक्रम शर्मा ढेर, झारखंड गैंग कनेक्शन पर बड़ी जांच शुरू
देहरादून के सिल्वर सिटी मॉल इलाके में हुई टारगेटेड फायरिंग में अखिलेश का गुरु माने जाने वाले विक्रम शर्मा की मौत हो गई। जमशेदपुर से जुड़े इस अपराधी का नाम हत्या, रंगदारी और कई हाई प्रोफाइल वारदातों में सामने आता रहा है। हमलावरों ने नजदीक से गोली मारकर वारदात को अंजाम दिया और मौके से फरार हो गए।

देहरादून में दिनदहाड़े हुई गोलीबारी ने एक बार फिर उत्तर भारत के संगठित अपराध के नेटवर्क को उजागर कर दिया है। कुख्यात गैंगस्टर अखिलेश सिंह के कथित आपराधिक गुरु विक्रम शर्मा की सिल्वर सिटी मॉल के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई। जिम से लौटते समय हमलावरों ने बेहद करीब से उस पर फायरिंग की, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। विक्रम शर्मा का अतीत बेहद विवादों से भरा रहा है—जमशेदपुर में कारोबारियों, नेताओं और टाटा स्टील के अधिकारियों तक उसकी गैंग का खौफ रहा। पहचान बदलकर पिछले एक दशक से वह देहरादून में स्टोन क्रशर और प्रॉपर्टी के कारोबार से जुड़ा हुआ था। पुलिस और एसटीएफ अब इस हत्याकांड की कड़ियां उसके पुराने अपराध नेटवर्क, कारोबारी विवाद और गैंगवार से जोड़कर जांच कर रही है।
शूटआउट में मौके पर मौत
देहरादून के व्यस्त इलाके में हुई इस वारदात से पूरे शहर में दहशत फैल गई। सुबह करीब 10 बजे विक्रम शर्मा जिम से घर लौट रहा था, तभी पहले से घात लगाए हमलावरों ने उस पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। दो गोलियां लगते ही वह सड़क पर गिर पड़ा और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। घटना के समय उसके पास पिस्तौल होने की बात भी सामने आई, लेकिन वह खुद को बचाने का मौका तक नहीं पा सका। पुलिस, फॉरेंसिक टीम और एसटीएफ की टीमें मौके पर पहुंचकर जांच में जुट गई हैं। आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि हमलावरों की पहचान हो सके।
झारखंड में खड़ा किया अपराध का नेटवर्क
विक्रम शर्मा का नाम झारखंड, खासकर जमशेदपुर में एक संगठित अपराध सिंडिकेट के मास्टरमाइंड के तौर पर लिया जाता था। उसने कई बड़े कारोबारियों और प्रभावशाली लोगों को निशाना बनाया और धीरे-धीरे अपना दबदबा कायम किया। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, उसने खुद सामने आने के बजाय गैंग के संचालन के लिए अखिलेश सिंह को आगे किया और खुद रणनीतिकार की भूमिका निभाता रहा। कहा जाता है कि उसने अपने संपर्कों का जाल पुलिस, नेताओं और मीडिया तक फैला रखा था, जिससे लंबे समय तक वह कानून की पकड़ से बचता रहा।
मार्शल आर्ट्स ट्रेनिंग और अपराध की ‘गुरुकुल’
विक्रम शर्मा का एक अलग चेहरा भी सामने आया—वह मार्शल आर्ट्स का ब्लैक बेल्ट था और युवाओं को ट्रेनिंग देता था। इसी दौरान उसकी मुलाकात अखिलेश सिंह से हुई और दोनों के बीच गुरु-शिष्य का रिश्ता बना। बताया जाता है कि वह युवाओं को चाइनीज एक्शन फिल्मों के जरिए ट्रेनिंग देता था और मानसिक रूप से अपराध के लिए तैयार करता था। यही वजह है कि उसे अखिलेश सिंह का ‘आपराधिक गुरु’ कहा जाने लगा।
जमशेदपुर में दहशत फैलाने वाली बड़ी घटनाएं
जमशेदपुर में 2007-08 के दौरान हुई कई हाई-प्रोफाइल घटनाओं में विक्रम शर्मा का नाम सामने आया था।
• 2 नवंबर 2007: साकची में श्रीलेदर्स मालिक आशीष डे की हत्या
• मार्च 2008: साकची में रवि चौरसिया और पूर्व जज आरपी रवि पर फायरिंग
• मई 2008: आशीष डे के घर पर गोलीबारी
• जुलाई 2008: कांग्रेस नेता नट्टू झा के दफ्तर पर फायरिंग
• अक्टूबर 2008: टाटा स्टील के अधिकारी जयराम सिंह की हत्या
• 2008: बिष्टुपुर में ट्रांसपोर्टर अशोक शर्मा की हत्या
इन घटनाओं ने पूरे जमशेदपुर में दहशत का माहौल पैदा कर दिया था और विक्रम शर्मा का नाम अपराध जगत में तेजी से उभरकर सामने आया।
पहचान बदलकर देहरादून में नई जिंदगी, फिर भी पीछा नहीं छोड़ा अतीत
करीब एक दशक पहले विक्रम शर्मा ने अपनी पहचान बदल ली और देहरादून में बस गया। यहां उसने स्टोन क्रशर और प्रॉपर्टी डीलिंग के जरिए खुद को एक सामान्य कारोबारी के रूप में स्थापित कर लिया था। बाहर से वह शांत, मृदुभाषी और व्यवस्थित जीवन जीता दिखता था, लेकिन उसके आपराधिक इतिहास की फाइलें बंद नहीं हुई थीं। पुलिस रिकॉर्ड में उसके खिलाफ 50 से अधिक केस दर्ज थे, जिनमें हत्या और रंगदारी जैसे गंभीर अपराध शामिल थे। अब उसकी हत्या के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या उसका अतीत ही उसकी मौत की वजह बना।

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