CAMPA फंड, मस्टर रोल में खेल? ₹10 करोड़ से ज्यादा का हिसाब गायब, झारखंड वन विभाग में ‘सफेद स्याही’ से काला खेल!
झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्यपाल से मुलाकात कर रांची वन मंडल के तत्कालीन डीएफओ राजीव लोचन बख्शी (IFS) के कार्यकाल में हुए कथित वित्तीय अनियमितताओं, प्रशासनिक कदाचार और राजकोष की लूट के आरोपों की उच्चस्तरीय जांच एवं फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की है.


Ranchi: झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्यपाल से मुलाकात कर रांची वन मंडल के तत्कालीन डीएफओ राजीव लोचन बख्शी (IFS) के कार्यकाल में हुए कथित वित्तीय अनियमितताओं, प्रशासनिक कदाचार और राजकोष की लूट के आरोपों की उच्चस्तरीय जांच एवं फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की है. मुलाकात के दौरान मरांडी ने राज्यपाल को विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें महालेखाकार की ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर करोड़ों रुपये की अनियमितताओं का जिक्र किया गया. मरांडी ने आरोप लगाया कि बख्शी की कार्यशैली नियमों की रक्षा के बजाय सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग से जुड़ी रही है. उन्होंने कहा कि राजनीतिक संरक्षण के कारण इन आरोपों की जांच नहीं हो पा रही है. वर्तमान में बख्शी सूचना एवं जनसंपर्क विभाग तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जैसे महत्वपूर्ण पदों पर तैनात हैं. मरांडी का कहना है कि यदि समय पर निष्पक्ष जांच होती तो स्थिति अलग हो सकती थी.
मस्टर रोल में ₹1.03 करोड़ का संदिग्ध भुगतान
महालेखाकार की ऑडिट रिपोर्ट में रांची वन प्रमंडल के 95 मस्टर रोल की प्रारंभिक जांच (टेस्ट चेक) में झारखंड कोषागार संहिता के नियम 242-243 का उल्लंघन पाया गया. इनमें ₹1.0383 करोड़ का संदिग्ध भुगतान किया गया है. मस्टर रोल पर मजदूरों के हस्ताक्षर या अंगूठे के निशान नहीं हैं. व्हाइटनर और इरेजर से रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की गई. मजदूरों को नकद भुगतान दिखाया गया, जबकि सरकारी नियम बैंक खाते से भुगतान का आदेश देते हैं. मरांडी ने कहा कि यह मात्र 95 रोल्स की बानगी है; पूरे कार्यकाल में हजारों रोल्स के जरिए करोड़ों रुपये की अनियमितता की आशंका है, जिसकी फॉरेंसिक जांच जरूरी है.
वन भूमि अपयोजन में ₹46 लाख का राजस्व नुकसान का आरोप
प्रशासनिक कदाचार का एक उदाहरण ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में सामने आया. आरोप है कि बख्शी ने अधिकार क्षेत्र का दुरुपयोग कर प्रस्तावों को नियम विरुद्ध आठ खंडों में बांट दिया. इससे 7.35 हेक्टेयर वन भूमि का अपयोजन डीएफओ स्तर पर ही स्वीकृत कर लिया गया, जबकि इसे सक्षम प्राधिकार के पास भेजना था. यूजर एजेंसी को अनुचित लाभ पहुंचाने और सरकार को न्यूनतम ₹46.01 लाख की NPV राशि का राजस्व नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया है. ऑडिट टीम की पूछताछ पर टालमटोल जवाब दिए गए.
CAMPA फंड और सामग्री खरीद में अनियमितता का आरोप
CAMPA मद के अंतर्गत रेंजर्स को दिए गए ₹8.53 करोड़ के अग्रिम का लेखा-जोखा जानबूझकर छिपाया गया, ताकि व्यय की जांच न हो सके. इस राशि का भौतिक सत्यापन कभी नहीं हुआ. इसके अलावा ₹1.80 करोड़ की सामग्री खरीद के मूल वाउचर ऑडिट टीम को उपलब्ध नहीं कराए गए. भ्रामक दावा किया गया कि वे महालेखाकार को भेज दिए गए हैं. चूंकि कार्यालय में कोई द्वितीय प्रति नहीं है, इसलिए इससे जुड़ी ₹5.455 करोड़ की मजदूरी भी फर्जी बताई जा रही है.
स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग
बाबूलाल मरांडी ने राज्यपाल से आग्रह किया कि राज्य की प्रशासनिक शुचिता बनाए रखने और सार्वजनिक धन की अनियमितताओं की जांच के लिए राजीव लोचन बख्शी के पूरे कार्यकाल की किसी स्वतंत्र एजेंसी से उच्चस्तरीय जांच एवं फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए. ज्ञापन के साथ ऑडिट रिपोर्ट की छायाप्रति भी संलग्न की गई है.

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