रांची में बहुबाजार पर फिर चला बुलडोजर, 30-40 साल पुरानी दुकानों पर कार्रवाई, दुकानदार बोले- विकास मंजूर, लेकिन पहले पुनर्वास
रांची के बहुबाजार में फ्लाईओवर विस्तार परियोजना के लिए प्रशासन ने एक बार फिर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। इससे प्रभावित दुकानदारों ने बिना पर्याप्त नोटिस और पुनर्वास के बुलडोजर कार्रवाई पर नाराजगी जताई है।

रिपोर्ट- संजय मुंडा
Ranchi : राजधानी रांची के बहुबाजार इलाके में फ्लाईओवर विस्तार परियोजना को लेकर एक बार फिर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है. प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद इलाके के व्यापारियों और स्थानीय लोगों में नाराज़गी देखी जा रही है. दुकानदारों का कहना है कि वे शहर के विकास और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए किए जा रहे कार्यों का विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि सरकार की हर योजना में सहयोग देने को तैयार हैं. उनकी आपत्ति इस बात को लेकर है कि बिना पर्याप्त पूर्व सूचना और वैकल्पिक व्यवस्था के सीधे बुलडोजर चलाया जा रहा है. व्यापारियों का कहना है कि यदि उन्हें समय दिया जाता तो वे स्वयं अपनी दुकानें खाली कर देते. अब अचानक हुई कार्रवाई से दशकों से चल रहे कारोबार पर संकट खड़ा हो गया है और सैकड़ों परिवारों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है.
फ्लाईओवर विस्तार के लिए दोबारा शुरू हुई कार्रवाई
स्थानीय लोगों के अनुसार, बहुबाजार फ्लाईओवर निर्माण के दौरान पहले भी सड़क चौड़ीकरण के लिए कई दुकानों को हटाया गया था. अब फ्लाईओवर के विस्तार की नई योजना के तहत एक बार फिर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की गई है. प्रशासन का उद्देश्य परियोजना को तय समय पर पूरा करना और क्षेत्र में यातायात को अधिक सुगम बनाना है. हालांकि प्रभावित दुकानदारों का कहना है कि कार्रवाई शुरू करने से पहले उन्हें पर्याप्त समय और स्पष्ट सूचना दी जानी चाहिए थी.
व्यापारियों की मांग—पहले पुनर्वास, फिर हटाई जाए दुकानें
कार्रवाई से प्रभावित व्यापारियों का कहना है कि वे विकास कार्यों में बाधा नहीं बनना चाहते. उनकी प्रमुख मांग है कि फ्लाईओवर के नीचे बनाई जा रही नई दुकानों या अन्य उपयुक्त स्थान पर पहले प्रभावित दुकानदारों का पुनर्वास किया जाए. उनका कहना है कि यदि वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित कर दी जाए तो वे बिना किसी विरोध के प्रशासन का सहयोग करेंगे. व्यापारियों का मानना है कि विकास और आजीविका के बीच संतुलन बनाना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है.
परिवारों की बढ़ी चिंता
स्थानीय लोगों के मुताबिक, बहुबाजार की कई दुकानें पिछले 30 से 40 वर्षों से संचालित हो रही हैं. कुछ प्रतिष्ठान झारखंड राज्य के गठन से पहले से यहां कारोबार कर रहे हैं. ऐसे में अचानक दुकानें हटने से कई परिवारों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है. व्यापारियों का कहना है कि उनकी रोजी-रोटी पूरी तरह इन दुकानों पर निर्भर है और बिना पुनर्वास के कार्रवाई से आर्थिक मुश्किलें बढ़ेंगी. उन्होंने सरकार और प्रशासन से अपील की है कि शहर के विकास कार्यों के साथ-साथ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और उनके रोजगार की सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाए, ताकि सुंदरीकरण की प्रक्रिया में किसी का भविष्य प्रभावित न हो.



