बोकारो युवती लापता मामला: हाईकोर्ट सख्त, DNA जांच कोलकाता भेजने का आदेश
झारखंड के बोकारो से लापता 18 वर्षीय युवती के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए जांच प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए कई अहम निर्देश जारी किए हैं. अदालत ने बरामद नरकंकाल की पहचान सुनिश्चित करने के लिए उसका DNA परीक्षण कोलकाता स्थित CFSL में कराने का आदेश दिया है.

Bokaro: झारखंड के बोकारो से लापता 18 वर्षीय युवती के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए जांच प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए कई अहम निर्देश जारी किए हैं. अदालत ने बरामद नरकंकाल की पहचान सुनिश्चित करने के लिए उसका DNA परीक्षण कोलकाता स्थित केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL) में कराने का आदेश दिया है. साथ ही युवती के माता-पिता के DNA सैंपल भी जांच के लिए भेजे जाएंगे, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि बरामद कंकाल उसी युवती का है या नहीं. कोर्ट ने राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत लगातार निगरानी कर रही है और जांच में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर सख्त टिप्पणी भी की है.
DNA जांच के लिए CFSL कोलकाता भेजने का आदेश
हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि बरामद नरकंकाल और युवती के माता-पिता के DNA सैंपल को कोलकाता स्थित सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेट्री भेजा जाए. अदालत ने सॉलिसिटर जनरल को निर्देश दिया कि 48 घंटे के भीतर सभी जरूरी सैंपल एकत्र कर जांच के लिए भेजे जाएं. सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि माता-पिता का सैंपल पहले ही लिया जा चुका है. अब जांच रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय हो सकेगा कि बरामद कंकाल लापता युवती का है या नहीं.
पोस्टमार्टम RIMS में कराने का निर्देश
अदालत ने कंकाल के पोस्टमार्टम को लेकर भी अहम निर्देश जारी किए हैं. कोर्ट ने कहा कि पोस्टमार्टम जमशेदपुर के बजाय रांची स्थित RIMS में कराया जाए, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से हो सके. इस फैसले का उद्देश्य जांच की विश्वसनीयता को बनाए रखना है. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी मेडिकल और फोरेंसिक प्रक्रियाएं निर्धारित मानकों के अनुसार पूरी की जाएं, ताकि किसी प्रकार का संदेह न रह जाए.
अदालत में अधिकारियों की पेशी और SIT से पूछताछ
मामले की सुनवाई के दौरान DGP, बोकारो SP, DIG, FSL निदेशक और नई SIT टीम कोर्ट में उपस्थित हुए. SIT टीम सभी दस्तावेजों के साथ अदालत में पेश हुई, जहां न्यायाधीशों ने उनसे विस्तृत सवाल-जवाब किए. DGP ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि मामले का जल्द से जल्द निष्पादन किया जाएगा. अदालत ने अगली सुनवाई में भी सभी संबंधित अधिकारियों को उपस्थित रहने का निर्देश दिया है, जिससे जांच की प्रगति पर नजर रखी जा सके.
लापरवाही पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सरकार की ओर से जानकारी दी गई कि मामले में संबंधित थाना के 18 पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है. इस पर अदालत ने कहा कि यह कार्रवाई स्थानीय स्तर की है और इस पर कोर्ट कोई टिप्पणी नहीं करेगा. हालांकि कोर्ट ने मौखिक रूप से यह जरूर कहा कि केवल निचले स्तर के अधिकारियों को निलंबित करना पर्याप्त नहीं है. उच्च स्तर के अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए. कोर्ट के इस रुख से साफ है कि जांच में किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

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