Blinkit से आई दवा या मेडिकल लापरवाही? चंपई सोरेन के पोते की मौत ने ऑनलाइन फार्मेसी पर खड़े किए सवाल
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के पोते वीर सोरेन की मनाली में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने डिजिटल हेल्थ और ऑनलाइन दवाओं की सुरक्षा पर सवाल खड़ा कर दिया है. जानकारी के अनुसार, 24 फरवरी को उनकी तबीयत बिगड़ने पर दोस्तों ने Blinkit से ऑनलाइन दवा मंगाई थी.

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के पोते वीर सोरेन की हिमाचल प्रदेश के मनाली में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, तबीयत बिगड़ने पर उनके दोस्तों ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म Blinkit से दवा मंगाकर दी थी. दवा लेने के बाद वे सो गए, लेकिन कुछ ही देर बाद उनकी हालत अचानक बिगड़ गई और अस्पताल ले जाते समय उनके मुंह से झाग निकलने लगा. 24 फरवरी को हुई इस घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है. इस बीच एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या बिना डॉक्टर की सलाह के ऑनलाइन दवा मंगाना और सेवन करना खतरनाक साबित हो सकता है. यह घटना न सिर्फ एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि डिजिटल दौर में ऑनलाइन मेडिकल सेवाओं की विश्वसनीयता और सुरक्षा पर भी बहस छेड़ रही है.
ऑनलाइन दवा मंगाकर खाने के बाद बिगड़ी तबीयत
पुलिस और साथियों के अनुसार, वीर सोरेन 22 फरवरी को अपने दोस्तों के साथ मनाली पहुंचे थे और सिमसा क्षेत्र के एक होम स्टे में ठहरे थे. 23 फरवरी को उन्होंने सोलंग और सेथन इलाके में घूमने के बाद 24 फरवरी की दोपहर वापस लौटकर सिर दर्द की शिकायत की. दोस्तों ने तत्काल ऑनलाइन ऐप से दवा मंगवाई और उन्हें दे दी. दवा लेने के बाद वे सो गए, लेकिन करीब दो घंटे बाद कमरे में गिरने की आवाज आई. जब दोस्त अंदर पहुंचे, तो वे अचेत अवस्था में फर्श पर पड़े मिले. उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में उनके मुंह से झाग निकलना शुरू हो गया, जिसने मामले को और संदिग्ध बना दिया.
डिजिटल सुविधा या जोखिम?
इस घटना के बाद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से दवा खरीदने और बिना डॉक्टर की सलाह के उसका सेवन करने पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि कई बार गलत दवा, ओवरडोज या दवा के रिएक्शन से अचानक हालत बिगड़ सकती है. ऑनलाइन शॉपिंग की सुविधा ने दवाओं की उपलब्धता आसान बना दी है, लेकिन यह भी उतना ही जरूरी है कि मरीज की सही स्थिति, मेडिकल हिस्ट्री और डॉक्टर की सलाह को नजरअंदाज न किया जाए. खासकर पहाड़ी या पर्यटन क्षेत्रों में जहां तत्काल चिकित्सा सुविधा सीमित हो सकती है, वहां ऐसे जोखिम और बढ़ जाते हैं.
क्या है मामला, पुलिस जांच में क्या सामने आया
कुल्लू के पुलिस अधीक्षक मदन लाल के मुताबिक, वीर सोरेन की तबीयत मनाली प्रवास के दौरान अचानक बिगड़ी थी और अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हुई. पुलिस उनके दोस्तों, होम स्टे स्टाफ और मेडिकल टीम से पूछताछ कर रही है. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और दवा के स्रोत की भी जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मौत की वजह बीमारी, दवा का रिएक्शन या कोई अन्य कारण था. फिलहाल, सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है और परिजनों को रिपोर्ट का इंतजार है.

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