Bihar Floor Test: ‘पाठशाला’ से ‘सिलेक्टेड CM’ तक—सम्राट चौधरी और तेजस्वी यादव के बीच तीखी सियासी भिड़ंत
बिहार विधानसभा के विशेष सत्र में विश्वास मत के दौरान राजनीतिक माहौल बेहद गर्म रहा. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली. बहस सिर्फ संख्या बल तक सीमित नहीं रही, बल्कि ‘पाठशाला’, राजनीतिक विरासत, उम्र और अनुभव जैसे मुद्दों पर भी केंद्रित हो गई.

Patna: बिहार विधानसभा के विशेष सत्र में विश्वास मत के दौरान राजनीतिक माहौल बेहद गर्म रहा. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली. बहस सिर्फ संख्या बल तक सीमित नहीं रही, बल्कि ‘पाठशाला’, राजनीतिक विरासत, उम्र और अनुभव जैसे मुद्दों पर भी केंद्रित हो गई. सम्राट चौधरी ने जहां अपने संघर्ष और राजनीतिक सफर को सामने रखा, वहीं तेजस्वी यादव ने उन पर तंज कसते हुए सत्ता परिवर्तन को लेकर बीजेपी और जेडीयू पर सवाल उठाए. इस दौरान लालू प्रसाद यादव का नाम भी बार-बार चर्चा में रहा. सदन में कई बार हंगामे की स्थिति बनी, लेकिन यह बहस बिहार की मौजूदा राजनीति के कई अहम संकेत भी दे गई—खासकर सत्ता, नेतृत्व और गठबंधन की दिशा को लेकर.
सम्राट चौधरी का ‘पाठशाला’ पर जवाब
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विपक्ष के ‘लालू की पाठशाला’ वाले तंज का सीधा जवाब देते हुए कहा कि वे किसी एक व्यक्ति या विचारधारा की उपज नहीं हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका राजनीतिक सफर संघर्ष और व्यक्तिगत अनुभवों से बना है. चौधरी ने कहा कि अगर वे जेल नहीं गए होते, तो शायद राजनीति में नहीं आते. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लालू यादव के शासनकाल में उन्हें और उनके परिवार को प्रताड़ित किया गया. उनके मुताबिक, राजनीति किसी की बपौती नहीं है और सत्ता जनता के आशीर्वाद से मिलती है, न कि किसी ‘पाठशाला’ से.
तेजस्वी यादव का हमला और ‘सिलेक्टेड CM’ बयान
तेजस्वी यादव ने अपने संबोधन में सम्राट चौधरी को बधाई देते हुए भी तीखा कटाक्ष किया. उन्होंने कहा कि एक “इलेक्टेड मुख्यमंत्री” को हटाकर “सिलेक्टेड मुख्यमंत्री” को लाया गया है. उनका इशारा साफ तौर पर सत्ता परिवर्तन और बीजेपी की भूमिका की ओर था. तेजस्वी ने दावा किया कि चुनाव के समय जेडीयू नेता नीतीश कुमार को ही मुख्यमंत्री बनाए रखने की बात करते थे, लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई हैं. उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी ने नीतीश कुमार की राजनीतिक स्थिति को कमजोर कर दिया है और पहले से तय रणनीति के तहत यह बदलाव किया गया.
नीतीश कुमार और NDA की रणनीति पर बयान
सम्राट चौधरी ने अपने भाषण में नीतीश कुमार के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि पिछले दो दशकों में बिहार में सुशासन स्थापित हुआ है. उन्होंने ‘ट्रिपल सी’—क्राइम, करप्शन और कम्युनलिज्म—पर जीरो टॉलरेंस की नीति का जिक्र किया और कहा कि इस पर कोई समझौता नहीं होगा. चौधरी ने यह भी स्पष्ट किया कि एनडीए पूरी तरह एकजुट है और गठबंधन में किसी तरह का मतभेद नहीं है. उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य विकास और स्थिरता है, न कि व्यक्तिगत या राजनीतिक स्वार्थ.
सदन में हंगामा और राजनीतिक संदेश
विश्वास मत के दौरान सदन का माहौल कई बार तनावपूर्ण हो गया. खासकर ‘इलेक्टेड बनाम सिलेक्टेड’ जैसे बयानों पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई. हालांकि, कार्यवाही की शुरुआत में सम्राट चौधरी और तेजस्वी यादव ने एक-दूसरे का अभिवादन कर राजनीतिक शिष्टाचार भी दिखाया. यह फ्लोर टेस्ट केवल बहुमत साबित करने का मंच नहीं रहा, बल्कि दोनों पक्षों ने इसे राजनीतिक संदेश देने के अवसर के रूप में इस्तेमाल किया. इस बहस से साफ है कि आने वाले समय में बिहार की राजनीति और भी ज्यादा आक्रामक और मुद्दा-केंद्रित रहने वाली है.

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