JPSC-JSSC विवाद के बीच रामदास आठवले का बड़ा दांव, बोले- झारखंड में चाहिए नई भर्ती नीति
JPSC-JSSC परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने झारखंड में नई भर्ती नीति की जरूरत बताई है. उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों की निष्पक्ष जांच के साथ आंदोलनरत अभ्यर्थियों और पहले से चयनित उम्मीदवारों के हितों का संतुलन बनाने की बात कही.

Ranchi: केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने झारखंड में शिक्षा, रोजगार, आरक्षण और औद्योगिक विकास से जुड़े मुद्दों को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं. रांची में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने कहा कि JPSC और JSSC परीक्षाओं को लेकर हुए अभ्यर्थियों की मांगों को गंभीरता से समझने की जरूरत है. यदि परीक्षा प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि इस मामले में ऐसा समाधान निकाला जाना चाहिए जिससे आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों की शिकायतों का समाधान हो और जिन उम्मीदवारों ने परीक्षा में सफलता हासिल कर नियुक्ति प्राप्त कर ली है, उनके साथ भी अन्याय न हो. आठवले ने कहा कि विवाद का स्थायी समाधान केवल तत्काल फैसले से नहीं, बल्कि एक ऐसी भर्ती नीति से संभव है जो पारदर्शी हो और भविष्य की नियुक्तियों को लेकर स्पष्ट व्यवस्था तय करे. उन्होंने कहा कि नई नीति में पुराने अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा के साथ अधिक से अधिक युवाओं को सरकारी रोजगार का अवसर देने पर भी ध्यान होना चाहिए.
झारखंड में औद्योगिक विकास और रोजगार बढ़ाने पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है और यहां खनन से जुड़ी गतिविधियां बड़े स्तर पर होती हैं. इसके बावजूद औद्योगिक विकास को और गति देने की जरूरत है. उन्होंने राज्य सरकार से केंद्र के सहयोग से नए उद्योग स्थापित करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में काम करने की मांग की. आठवले ने केंद्र सरकार की विभिन्न विकास योजनाओं का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना समेत कई योजनाओं के माध्यम से झारखंड में बुनियादी ढांचे के विकास पर काम हुआ है. उन्होंने कहा कि केंद्र की योजनाओं का लाभ राज्य की जनता तक पहुंच रहा है. झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक शिबू सोरेन के साथ अपने पुराने संबंधों का जिक्र करते हुए आठवले ने कहा कि राज्य के गठन में शिबू सोरेन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सक्रिय नेता बताते हुए कहा कि दलित और आदिवासी समाज को अभी भी अपेक्षित न्याय मिलने की जरूरत है.
जातिगत भेदभाव खत्म करने पर दिया जोर
आरक्षण खत्म करने की मांग पर रामदास आठवले ने कहा कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण व्यवस्था सामाजिक न्याय से जुड़ी है. उन्होंने कहा कि OBC के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है और कुल आरक्षण व्यवस्था करीब 49.5 प्रतिशत है. उन्होंने कहा कि देश के कई ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी जाति के आधार पर भेदभाव की स्थिति देखने को मिलती है. यदि जाति व्यवस्था और जातिगत भेदभाव पूरी तरह समाप्त हो जाए तो आरक्षण को लेकर नए सिरे से विचार किया जा सकता है.
आठवले ने कहा कि आरक्षण व्यवस्था जारी रखने की स्थिति में विभिन्न जातियों की वास्तविक आबादी के आंकड़ों के आधार पर इसकी समीक्षा पर भी विचार होना चाहिए. उन्होंने जातिगत जनगणना के आंकड़ों को नीति निर्माण के लिए महत्वपूर्ण बताया. सामाजिक सद्भाव पर उन्होंने कहा कि देश में सभी धर्मों का सम्मान होना चाहिए. खुद को बौद्ध और बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर का अनुयायी बताते हुए आठवले ने कहा कि भारत को हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन और बौद्ध समेत सभी धर्मों के लोगों को साथ लेकर आगे बढ़ने की जरूरत है.




