मासूमों की चीखें सुनकर भी नींद नहीं टूट रही सत्ता की! विष्णुगढ़ के बाद रजरप्पा में फिर नाबालिग पर दरिंदगी
झारखंड में नाबालिग बेटियों की इज्जत और जान पर लगातार राक्षसी हमले अब आम बात बन चुके हैं. 30 मार्च की शाम रजरप्पा थाना क्षेत्र के बारलोंग के सुनसान इलाके में तीन युवकों ने एक नाबालिग लड़की को अकेला पाकर बारी-बारी से उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया.

Ramgarh: झारखंड में नाबालिग बेटियों की इज्जत और जान पर लगातार राक्षसी हमले अब आम बात बन चुके हैं. 30 मार्च की शाम रजरप्पा थाना क्षेत्र के बारलोंग के सुनसान इलाके में तीन युवकों ने एक नाबालिग लड़की को अकेला पाकर बारी-बारी से उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया. मात्र कुछ दिन पहले विष्णुगढ़ (हजारीबाग) में 12 वर्षीय मासूम बच्ची को मंगला जुलूस से लापता कर दरिंदों ने न सिर्फ बलात्कार किया, बल्कि उसके चेहरे को पत्थर से कुचल डाला, निजी अंगों में लकड़ी ठूंस दी और हत्या कर दी. पूरा राज्य उबल पड़ा, हजारीबाग बंद हुआ, हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया, बीजेपी ने झारखंड बंद का ऐलान किया, आक्रोश की लहर उठी. फिर भी अपराधी बेखौफ. कानून का डर नाम को नहीं. रजरप्पा की यह घटना साबित करती है कि झारखंड में बेटियां अब सुरक्षित नहीं रहीं—न घर में, न सड़क पर, न जुलूस में. मासूमों की चीखें आसमान छू रही हैं, पर सत्ता और पुलिस की नींद नहीं टूट रही.
तीन राक्षसों ने मासूम की इज्जत लूट ली
30 मार्च सोमवार शाम. बारलोंग का निर्जन इलाका. नाबालिग लड़की अकेली थी. अयान अनवर, मो. तौफिक और मो. असफाक नाम के तीन युवकों ने उसे घेर लिया. बारी-बारी से उसके साथ वह जघन्य कृत्य किया जिसे पढ़ते ही खून खौल उठता है. लड़की की चीखें आसमान को चीर गईं, पर कोई सुनने वाला नहीं था. परिजनों ने रजरप्पा थाने में लिखित शिकायत दी. पीड़िता को मेडिकल जांच के लिए अस्पताल भेजा गया. उसकी आंखों में अब सिर्फ डर और बेबसी बची है—एक मासूम जिसका बचपन कल रात ही हमेशा के लिए लुट गया.
विष्णुगढ़ की नृशंस हत्या: राज्य उबला, फिर भी अपराध रुका नहीं
केवल 6 दिन पहले हजारीबाग के विष्णुगढ़ के कुसुम्भा गांव में 12 साल की बच्ची मंगला जुलूस देखने गई. घर नहीं लौटी. अगले दिन उसका शव गड्ढे में मिला—चेहरा पत्थर से कुचला हुआ, शरीर पर जघन्य अत्याचार. पूरा हजारीबाग बंद रहा, लोग सड़कों पर उतर आए, हाईकोर्ट ने डीजीपी-एसपी को नोटिस थमा दिया, बीजेपी ने 3 अप्रैल को झारखंड बंद बुलाया. आक्रोश फूट पड़ा. फिर भी रजरप्पा में वैसी ही दरिंदगी दोहरा दी गई. सवाल उठता है—क्या आंदोलन, बंद और कोर्ट सिर्फ खबर बनकर रह जाते हैं? अपराधियों को क्या लगता है कि झारखंड अब उनका खेल का मैदान है?
पुलिस की त्वरित गिरफ्तारी, लेकिन सिस्टम की नाकामी क्यों?
रजरप्पा थाना प्रभारी कृष्ण कुमार की टीम ने चितरपुर बस्ती में छापेमारी कर तीनों आरोपियों—अयान अनवर (रहमत नगर), मो. तौफिक (ईदगाह मोहल्ला) और मो. असफाक (एलबी रोड)—को मंगलवार सुबह गिरफ्तार कर लिया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया. सराहनीय है. लेकिन सवाल वही है—विष्णुगढ़ में भी SIT बनी, कोर्ट नाराज हुआ, फिर भी रजरप्पा हो गया. झारखंड में नाबालिगों पर अत्याचार के मामले क्यों नहीं रुक रहे? क्या पुलिस-प्रशासन सिर्फ घटना के बाद रिएक्ट करता है? क्या बेटियों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस नीति नहीं? हर बार गिरफ्तारी होती है, पर अगली घटना का इंतजार क्यों?
अब खून खौलने का वक्त आ गया
यह सिर्फ दो घटनाएं नहीं—झारखंड की बेटियों पर चल रहा सिलसिलेवार युद्ध है. एक तरफ मासूम लड़कियां जुलूस देखने जाती हैं, दूसरी तरफ सुनसान जगहों पर उनकी आत्मा लुट जाती है. समाज शर्मसार है, मां-बाप रातों की नींद गंवा चुके हैं. अगर आज भी हम चुप रहे तो कल हमारी अपनी बेटी का नंबर आ जाएगा. आक्रोश सिर्फ सोशल मीडिया पर नहीं, सड़कों पर उतरना होगा. सख्त कानून, तेज ट्रायल, पुलिस सुधार और समाज में बदलाव—बिना इनके यह सिलसिला नहीं रुकेगा. झारखंड की बेटियां रो रही हैं. सुन रहे हैं हम? या फिर अगली खबर का इंतजार?

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