अभिषेक के बाद कल्याण बनर्जी पर हमला! बंगाल में TMC नेताओं के खिलाफ बढ़ रहा जनाक्रोश या बदल रही है राजनीति?
सोनारपुर में अभिषेक बनर्जी के विरोध के एक दिन बाद हुगली के चंडीतला में टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी पर हमले का दावा किया गया है. पथराव में घायल हुए सांसद का वीडियो वायरल है. लगातार दो दिनों में टीएमसी के दो बड़े नेताओं के खिलाफ हुई घटनाओं ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए सवाल खड़े कर दिए हैं.

पश्चिम बंगाल की राजनीति में पिछले 48 घंटे बेहद उथल-पुथल भरे रहे हैं. शनिवार को तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को सोनारपुर में विरोध और कथित हमले का सामना करना पड़ा था. अब उसके अगले ही दिन हुगली के चंडीतला में टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी भी प्रदर्शनकारियों के निशाने पर आ गए. विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्हें काले झंडे दिखाए गए, ‘चोर-चोर’ के नारे लगे और पथराव में उनके सिर पर चोट लग गई. घायल अवस्था में सड़क पर बैठे और सिर पकड़कर लेटे कल्याण बनर्जी की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं. लगातार दो दिनों में टीएमसी के दो बड़े नेताओं के साथ हुई घटनाओं ने बंगाल की राजनीति में नए सवाल खड़े कर दिए हैं. क्या यह सिर्फ राजनीतिक विरोध है या फिर सत्ता परिवर्तन के बाद उभर रहा नया जनमनोविज्ञान?
चंडीतला में क्या हुआ?
रविवार को तृणमूल कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल चंडीतला थाने में ज्ञापन सौंपने जा रहा था. इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व श्रीरामपुर से सांसद कल्याण बनर्जी कर रहे थे. आरोप है कि रास्ते में कुछ लोगों ने उन्हें काले झंडे दिखाकर विरोध शुरू कर दिया. देखते ही देखते माहौल गरमा गया और ‘चोर-चोर’ के नारे लगने लगे. इसी दौरान पथराव शुरू हुआ. आरोप है कि फेंके गए पत्थरों में से एक पत्थर कल्याण बनर्जी के सिर पर लगा, जिससे वह घायल हो गए. घटना के बाद उनके सिर से खून निकलने लगा और समर्थकों ने उन्हें तत्काल सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया. प्राथमिक उपचार के बाद वे अपने समर्थकों के साथ चंडीतला थाने के सामने धरने पर बैठ गए.
एक दिन पहले अभिषेक बनर्जी भी बने थे विरोध का निशाना
चंडीतला की घटना ऐसे समय हुई है जब सिर्फ एक दिन पहले ही अभिषेक बनर्जी भी विवाद और विरोध के केंद्र में रहे थे. सोनारपुर में उनके कार्यक्रम के दौरान विरोध प्रदर्शन हुआ था. अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया था कि उनके काफिले को निशाना बनाया गया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया. टीएमसी का आरोप है कि इन घटनाओं के पीछे भाजपा समर्थित समूह हैं, जबकि भाजपा का कहना है कि यह जनता का स्वाभाविक आक्रोश है. लगातार दो दिनों में दो बड़े नेताओं को विरोध झेलना पड़ा है, जिससे राज्य की राजनीति और गरमा गई है.
पुलिस और प्रशासन पर भी उठे सवाल
घटना के बाद कल्याण बनर्जी ने पुलिस प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि अगर एक सांसद पर खुलेआम हमला हो सकता है, तो आम नागरिकों की सुरक्षा का अंदाजा लगाया जा सकता है. उन्होंने आरोप लगाया कि हमलावरों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई नहीं की गई. हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी. तनाव को देखते हुए चंडीतला और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है.
क्या बंगाल में बदल रहा है राजनीतिक माहौल?
लगातार दो दिनों में टीएमसी के दो बड़े नेताओं के खिलाफ हुए विरोध को सिर्फ एक सामान्य राजनीतिक घटना मानना जल्दबाजी होगी. 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्ता का समीकरण बदल चुका है. वर्षों तक सत्ता के केंद्र में रही तृणमूल कांग्रेस अब विपक्ष की भूमिका में है. ऐसे में पहली बार पार्टी के शीर्ष नेताओं को उस तरह के सार्वजनिक विरोध का सामना करना पड़ रहा है, जैसा पहले विपक्षी दलों के नेताओं को झेलना पड़ता था. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता परिवर्तन के बाद जनता का व्यवहार और राजनीतिक अभिव्यक्ति का स्वरूप भी बदलता है. चंडीतला और सोनारपुर की घटनाओं को उसी संदर्भ में भी देखा जा रहा है.
TMC के लिए चेतावनी या सहानुभूति का मौका?
इन घटनाओं का राजनीतिक असर आने वाले दिनों में देखने को मिल सकता है. एक तरफ टीएमसी इसे लोकतंत्र पर हमला और विपक्ष को दबाने की कोशिश के रूप में पेश कर सकती है, जिससे उसे राजनीतिक सहानुभूति मिल सकती है. दूसरी ओर भाजपा और विरोधी दल इसे जनता के बढ़ते असंतोष का संकेत बता रहे हैं. फिलहाल इतना तय है कि अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी पर हुए हमलों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को नया मुद्दा दे दिया है. अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि जांच में क्या निकलता है और आने वाले दिनों में राज्य की राजनीतिक लड़ाई किस दिशा में आगे बढ़ती है.

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