मोदी कैबिनेट के 5 बड़े फैसले: 13,041 करोड़ के रेल-रोड प्रोजेक्ट को मंजूरी, बिहार से 4 राज्यों तक बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर पुश
मोदी कैबिनेट ने बुधवार को रेलवे और हाईवे से जुड़ी 13,041 करोड़ रुपये की पांच बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी दी. इनमें चार रेलवे प्रोजेक्ट और बिहार का मुजफ्फरपुर-सितामढ़ी-सोनबरसा फोर-लेन हाईवे शामिल है.

New Delhi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर पांच बड़े फैसले लिए गए. सरकार ने रेलवे और हाईवे से जुड़ी कुल 13,041 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी है. इनमें चार मल्टी-ट्रैकिंग रेलवे प्रोजेक्ट और बिहार में एक बड़ा फोर-लेन हाईवे प्रोजेक्ट शामिल है. रेलवे की परियोजनाएं पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के आठ जिलों को कवर करेंगी और करीब 410 किलोमीटर रेल नेटवर्क बढ़ाएंगी. वहीं बिहार में मुजफ्फरपुर से सीतामढ़ी होते हुए सोनबरसा तक NH-22 को फोर-लेन बनाया जाएगा. सरकार का फोकस सिर्फ नई लाइन बिछाने पर नहीं, बल्कि मौजूदा व्यस्त कॉरिडोर की क्षमता बढ़ाने, माल ढुलाई आसान करने और यात्री ट्रेनों की आवाजाही को बेहतर बनाने पर है.
13,041 करोड़ के पैकेज में क्या-क्या?
कैबिनेट ने कुल पांच परियोजनाओं को मंजूरी दी है. इनमें चार रेलवे की मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाएं हैं, जिनकी अनुमानित लागत 9,450 करोड़ रुपये है. इनसे भारतीय रेलवे के नेटवर्क में लगभग 410 किलोमीटर की बढ़ोतरी होगी. इसके अलावा बिहार में मुजफ्फरपुर-सितामढ़ी-सोनबरसा सेक्शन को फोर-लेन मानक में अपग्रेड करने की परियोजना को मंजूरी दी गई है. इसकी कुल पूंजी लागत 3,590.73 करोड़ रुपये है. यानी रेलवे और हाईवे को मिलाकर सरकार ने एक साथ 13,041 करोड़ रुपये के इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश को हरी झंडी दी है.
हावड़ा-चेन्नई रूट पर बढ़ेंगी रेल लाइनें
कैबिनेट के फैसलों में सबसे अहम हिस्सा हावड़ा-चेन्नई मुख्य रेल कॉरिडोर से जुड़ा है. इस रूट के अलग-अलग हिस्सों में अतिरिक्त लाइनें बिछाने से मौजूदा ट्रैफिक का दबाव कम करने की कोशिश की जाएगी. इसके तहत खड़गपुर-भद्रक चौथी लाइन, भद्रक-हरिदासपुर चौथी लाइन और गुम्मिडिपुंडी-गुडूर तीसरी व चौथी लाइन को मंजूरी मिली है. इसके अलावा कटक-पारादीप सेक्शन में भी तीसरी और चौथी लाइन विकसित की जाएगी. सरकार के मुताबिक इन परियोजनाओं से रेल परिचालन की क्षमता बढ़ेगी और यात्री ट्रेनों के साथ मालगाड़ियों की आवाजाही के लिए अतिरिक्त रास्ता उपलब्ध होगा.
सिर्फ यात्री ट्रेन नहीं, माल ढुलाई पर भी बड़ा फोकस
इन परियोजनाओं का असर सिर्फ ट्रेन की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है. रेलवे के व्यस्त कॉरिडोर पर अतिरिक्त लाइन बनने का सीधा मतलब है कि मालगाड़ियों के लिए भी ज्यादा क्षमता उपलब्ध होगी. खड़गपुर-भद्रक और दूसरे पूर्वी तटीय रूट देश के औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं. अतिरिक्त ट्रैक से यात्री और मालगाड़ियों को अलग-अलग स्लॉट में चलाना आसान हो सकता है. इससे ट्रेनों की गति और समयबद्धता सुधारने के साथ लॉजिस्टिक्स लागत कम करने में भी मदद मिल सकती है. सरकार के अनुसार इन रेल परियोजनाओं से करीब 410 किलोमीटर नेटवर्क बढ़ेगा. परियोजनाओं को 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
बिहार में नेपाल सीमा तक फोर-लेन हाईवे
कैबिनेट का पांचवां फैसला बिहार के लिए बेहद अहम है. मुजफ्फरपुर-सितामढ़ी-सोनबरसा NH-22 सेक्शन को फोर-लेन मानक में अपग्रेड किया जाएगा. यह परियोजना करीब 82.57 किलोमीटर लंबी है और इसे हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा. यह सड़क मुजफ्फरपुर को सीतामढ़ी के रास्ते नेपाल सीमा के करीब सोनबरसा से जोड़ेगी. ऐसे में इसका महत्व केवल बिहार के भीतर बेहतर सड़क संपर्क तक सीमित नहीं है. भारत-नेपाल सीमा के नजदीक होने के कारण यह मार्ग व्यापार, माल परिवहन और सीमावर्ती इलाकों की कनेक्टिविटी के लिए भी महत्वपूर्ण है. फोर-लेन बनने के बाद इस रूट पर सफर आसान और तेज होने की उम्मीद है. साथ ही क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों और लॉजिस्टिक्स को गति मिल सकती है.
सरकार का बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर गेम: क्षमता बढ़ाना सबसे बड़ा लक्ष्य
बुधवार के कैबिनेट फैसले को केवल पांच अलग-अलग परियोजनाओं की मंजूरी के तौर पर नहीं देखा जा सकता. इन सभी परियोजनाओं में एक साझा रणनीति दिखाई देती है— मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर की क्षमता बढ़ाना और देश के महत्वपूर्ण परिवहन कॉरिडोर को मजबूत करना. रेलवे में अतिरिक्त लाइनें बिछाने से ट्रैक पर ट्रैफिक मैनेजमेंट बेहतर होगा, जबकि बिहार का फोर-लेन हाईवे सीमावर्ती कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा. इसका असर यात्रियों के साथ उद्योग, व्यापार और माल ढुलाई पर भी पड़ सकता है. सरकार के मुताबिक इन परियोजनाओं से कनेक्टिविटी बेहतर होगी और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा. चारों रेलवे परियोजनाएं आठ जिलों में नेटवर्क को मजबूत करेंगी, जबकि बिहार की सड़क परियोजना उत्तर बिहार को नेपाल सीमा से बेहतर तरीके से जोड़ने में मदद करेगी.
कुल मिलाकर 13,041 करोड़ रुपये का यह पैकेज रेलवे और सड़क दोनों क्षेत्रों में क्षमता विस्तार पर केंद्रित है. एक तरफ हावड़ा-चेन्नई जैसे महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर पर अतिरिक्त लाइनें बिछाने की तैयारी है, तो दूसरी तरफ बिहार में नेपाल सीमा तक फोर-लेन सड़क का विस्तार होगा. परियोजनाओं का वास्तविक असर इनके निर्माण और समय पर पूरा होने के बाद सामने आएगा, लेकिन कैबिनेट के ताजा फैसले से सरकार ने साफ संकेत दिया है कि परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर को आर्थिक विकास की बुनियाद के तौर पर आगे बढ़ाया जा रहा है.

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