मैथ्स-साइंस में फेल हुए तो भी बच सकता है साल! CBSE का नया नियम, स्किल सब्जेक्ट बनेगा सहारा
CBSE ने कक्षा 9वीं और 10वीं के सिलेबस और परीक्षा पैटर्न में बदलाव किया है. नई व्यवस्था में वोकेशनल एजुकेशन अनिवार्य होगी. मैथ्स, साइंस या सोशल साइंस में फेल होने पर पास स्किल विषय से राहत मिल सकती है. जानें 33 प्रतिशत पासिंग मार्क्स और नई मार्किंग स्कीम के नियम.

CBSE Class 9 Scheme 2026-27:- CBSE से पढ़ाई करने वाले कक्षा 9वीं और 10वीं के विद्यार्थियों के लिए बड़ा बदलाव सामने आया है. अब बोर्ड परीक्षा में केवल कितने अंक आए, यही नहीं बल्कि विद्यार्थी ने कौन-सा अतिरिक्त कौशल सीखा है, यह भी उसकी मार्कशीट और परीक्षा परिणाम के लिहाज से अहम होगा. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 29 अक्टूबर को शैक्षणिक सत्र 2026-27 और 2027-28 के लिए विषयों और मूल्यांकन व्यवस्था को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं. नई व्यवस्था में वोकेशनल एजुकेशन को अनिवार्य बनाया गया है. साथ ही विद्यार्थियों को विषय चयन के अधिक विकल्प दिए गए हैं. सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि यदि कोई विद्यार्थी मैथ्स, साइंस या सोशल साइंस में से किसी एक विषय में असफल होता है, लेकिन निर्धारित स्किल विषय में पास है, तो नियमों के तहत उस विषय को स्किल विषय से बदला जा सकता है. इससे विद्यार्थियों को एक विषय में असफल होने के बावजूद राहत मिलने का रास्ता खुल सकता है.
10वीं में पांच विषयों की बोर्ड परीक्षा, छठा विषय चुनने की आजादी
CBSE की नई व्यवस्था के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2027-28 से कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा में पांच विषय अनिवार्य होंगे. इनमें पहली भाषा (R1), दूसरी भाषा (R2), गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान शामिल हैं. विद्यार्थियों को इन सभी पांच विषयों की बोर्ड परीक्षा देनी होगी. इसके अलावा छठे विषय के रूप में एक वैकल्पिक विषय चुनने का मौका मिलेगा. बोर्ड ने इसके लिए 57 विषयों की सूची उपलब्ध कराई है. विद्यार्थी अपनी रुचि और भविष्य की पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए भाषा, कंप्यूटर एप्लीकेशन, होम साइंस, पेंटिंग, संगीत और बिजनेस से जुड़े विषयों का चयन कर सकते हैं. इस बदलाव का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल पारंपरिक विषयों तक सीमित रखने के बजाय उनकी रुचि के अनुसार दूसरे क्षेत्रों में भी आगे बढ़ने का अवसर देना है.
वोकेशनल एजुकेशन अनिवार्य, 22 स्किल विषयों में से मिलेगा विकल्प
नई स्कीम में व्यावसायिक शिक्षा यानी वोकेशनल एजुकेशन को भी अनिवार्य किया गया है. इसके लिए विद्यार्थियों के सामने दो विकल्प होंगे. पहला विकल्प कौशल विकास विषय का होगा, जिसका मूल्यांकन स्कूल स्तर पर किया जाएगा. इसके लिए अलग से 10वीं की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी. दूसरा विकल्प बोर्ड की ओर से निर्धारित 22 स्किल विषयों में से किसी एक को चुनने का होगा. इनमें इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, रिटेल, हेल्थकेयर, बैंकिंग एंड इंश्योरेंस, टूरिज्म, एग्रीकल्चर और डिजाइन थिंकिंग जैसे विषय शामिल हैं. इन विषयों को चुनने वाले विद्यार्थियों को संबंधित विषय की बोर्ड परीक्षा भी देनी होगी. परीक्षा में सफल होने पर प्राप्त अंक और ग्रेड बोर्ड की मार्कशीट में दर्ज होंगे. साथ ही विद्यार्थियों को NSQF सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा. यानी अब स्कूली पढ़ाई के साथ रोजगार से जुड़े कौशल सीखने पर भी जोर रहेगा.
पांच अनिवार्य विषयों में 33 प्रतिशत अंक जरूरी
नई मार्किंग स्कीम के तहत विद्यार्थियों को पांचों अनिवार्य विषयों में अलग-अलग कम से कम 33 प्रतिशत अंक हासिल करने होंगे. इसमें बोर्ड परीक्षा और इंटरनल असेसमेंट के अंक जोड़कर अंतिम परिणाम तैयार किया जाएगा. उदाहरण के तौर पर किसी विद्यार्थी को लिखित परीक्षा में 80 में से 24 अंक और इंटरनल असेसमेंट में 20 में से 9 अंक मिलते हैं, तो उसके कुल अंक 33 होंगे. इस स्थिति में विद्यार्थी संबंधित विषय में पास माना जाएगा. इसका मतलब है कि केवल लिखित परीक्षा के प्रदर्शन से ही पास या फेल का फैसला नहीं होगा. स्कूल में किए गए आंतरिक मूल्यांकन के अंक भी अंतिम परिणाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.
मैथ्स, साइंस या सोशल साइंस में फेल होने पर स्किल विषय से राहत
नई व्यवस्था का सबसे अहम पहलू विषय बदलने का प्रावधान है. यदि कोई विद्यार्थी गणित, विज्ञान या सामाजिक विज्ञान में से किसी एक विषय में फेल हो जाता है, लेकिन उसने निर्धारित स्किल विषय की परीक्षा पास कर ली है, तो नियमों के अनुसार उस असफल विषय को स्किल विषय से बदला जा सकता है. हालांकि, यह सुविधा उन विद्यार्थियों को नहीं मिलेगी जिन्होंने वोकेशनल एजुकेशन के तहत केवल कौशल विकास विषय चुना है. इसी तरह पहली या दूसरी भाषा में असफल होने पर पास की गई वैकल्पिक भाषा से उस विषय को बदलने का प्रावधान रखा गया है. तीसरी भाषा (R3), कला शिक्षा और शारीरिक शिक्षा एवं कल्याण का मूल्यांकन स्कूल स्तर पर किया जाएगा. कला शिक्षा और शारीरिक शिक्षा में अंकों के बजाय ग्रेड दिए जाएंगे.
कक्षा 9वीं के सिलेबस में भी बदलाव
CBSE ने कक्षा 9वीं के पाठ्यक्रम में भी कुछ बदलाव किए हैं. नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, विद्यार्थियों के सिलेबस से 'Individuals in Society' और Computational Thinking (CT) एवं Artificial Intelligence (AI) के मॉड्यूल हटाए गए हैं. वहीं, कक्षा 10वीं के विद्यार्थियों के लिए फिलहाल पुरानी व्यवस्था लागू रहेगी. नई स्कीम के तहत 10वीं में पर्यावरण शिक्षा (Environmental Education) को अलग विषय के रूप में नहीं पढ़ना होगा. विशेष जरूरत वाले बच्चों (CwSN) के लिए भी विषय चयन में कुछ विशेष छूट का प्रावधान किया गया है. ऐसे में विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए जरूरी है कि विषयों का चयन करते समय CBSE के नए दिशा-निर्देशों को अच्छी तरह समझ लें. नई व्यवस्था का मकसद परीक्षा के दबाव को कम करने के साथ विद्यार्थियों को पढ़ाई के अलावा व्यावहारिक कौशल से जोड़ना भी है.

