कार्यकर्ता को UPSC चेयरमैन, सिक्योरिटी ऑफिसर को CBI डायरेक्टर... संसद में कांग्रेस पर बरसे निशिकांत दुबे

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बीजेपी, आरएसएस पर देश की संस्थाओं पर कब्जा जमाने के आरोप लगाये. इसपर सदन में ही गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे ने पलटवार किया. कहा कि कांग्रेस का एक कार्यकर्ता बटुक सिंह 10 साल तक UPSC का चेयरमैन रहा. आप किस ईमानदारी की बात करते हैं. किस पारदर्शिता की बात करते हैं? निशिकांत ने कहा, शहीदों की चिताओं पर खड़ी कांग्रेस, जिसने भारत को विभाजित किया, आज राहुल गांधी के बयान से मुझे लड़खड़ाती हुई नजर आई। ये संविधान की बात करते हुए नजर आई, और मैं 1976 का ये पूरा डिबेट लेकर आया हूं। संविधान कैसे कांग्रेस ने तार-तार किया, इसका कोई जवाब नहीं है। ये संविधान राहुल गांधी और उनकी पार्टी के लिए महज एक कहावत की तरह है. 1975 में स्वर्ण सिंह की कमेटी बनी, उन्होंने सारे इंस्टीट्यूशन को खत्म कर दिया। जिसके लिए आज ये फिर से लगे हुए हैं।
कांग्रेस किस चुनाव आयोग की बात करती है?
दुबे ने कहा कि कांग्रेस किस चुनाव आयोग की बात करती है? किस ईमानदारी की बात करती है? किस पारदर्शिता की बात करती है. इस देश का पहला चुनाव कमिश्नर सुकुमार सेन, जब वो रिटायर होते हैं तो ये उनको राज्यपाल बना देते हैं।" बीएस रामादेवी जब रिटायर होती हैं, तो उनको हिमाचल का गवर्नर बना देते हैं। टीएन शेषन जब रिटायर होते हैं, तो उनको अहमदाबाद में बीजेपी के खिलाफ कैंडिडेट बना देते हैं। एमएस गिल जब रिटायर होते हैं तो वो केंद्र में 10 साल मंत्री रहते हैं और इसी सदन में रहते हैं। निशिकांत ने कहा UPSC जैसी संस्था, जो IAS, IPS और ऑल इंडिया सर्विसिज को पैदा करती है, कांग्रेस का एक कार्यकर्ता बटुक सिंह 10 साल तक उसका (UPSC) चेयरमैन रहा। ये इन्होंने (कांग्रेस) UPSC की हालत कर दी। उन्होंने आगे कहा, कांग्रेस CBI की बात कर रही थी. अश्विनी कुमार, जो सोनिया गांधी और राहुल गांधी का सिक्योरिटी ऑफिसर था, वो सीबीआई का डायरेक्टर बनाया जाता है। रंजीत सिन्हा, जो कांग्रेस के अहमद पटेल के यहां रोज बैठता था और जिसकी डायरी पकड़ाई, जिसमें ये था कि कांग्रेस के नेता कब, कहां गए, उसे सीबीआई का डायरेक्टर बना देते हो। निशिकांत ने कहा, हां हम RSS के हैं और मुझे गर्व है कि हम RSS के हैं।
SIR में मेरे माता-पिता का नाम कटा, लेकिन खुशी है
वोट चोरी और SIR के मुद्दे उठाने पर भी निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी को घेरा। कहा कि एसआईआर में मेरे मां-पिता का नाम कटा है. वह लोग मेरे साथ दिल्ली में रहते हैं, मुझे खुशी है कि उनका नाम कटा. उन्होंने आजमनगर के तजिमुल के 70 साल की उम्र में वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने जाने का जिक्र किया और कहा कि वोट डिलीट होने का फायदा आरजेडी-कांग्रेस को हुआ. वहीं जनसंख्या के आंकड़े बताते हुए निशिकांत ने कहा कि 2011 में बंगाल की कुल जनसंख्या 9 करोड़ 13 लाख थी. इसमें 6 करोड़ से ज्यादा हिंदू थे. दार्जिलिंग, दिनाजपुर समेत कुछ ऐसे जिले हैं, जिनकी आबादी की तुलना 1951 से करना चाहता हूं. उन्होंने कहा कि संथाल परगना में 1951 में आदिवासियों की आबादी 45 परसेंट थी. 2011 की जनगणना में यह केवल 28 फीसदी है. डीलिमिटेशन हुआ 2008 में लोकसभा की एक और विधानसभा की तीन सीटें खत्म होने लगी. सभी दलों ने फैसला किया कि आदिवासी सीट कम नहीं होनी चाहिए. आज जनगणना होगी, तो आबादी 23-24 परसेंट होगी. पूरे देश में मुस्लिम चार परसेंट बढ़े हैं, 24 परगना में 14 परसेंट कैसे बढ़े.
कसम खाकर आया था कि नेहरू, इंदिरा की बड़ाई करूंगा
निशिकांत दुबे ने कहा है कि अगर किसी को भी इतिहास के पन्नों को तोड़ना या मरोड़ना है तो उसको कांग्रेस से सीख ले लेनी चाहिए। आज कांग्रेस के वक्ता भाषण देते हैं कि राजीव गांधी ने साल 1988 में इस देश में इलेक्टोरल रिफॉर्म्स का सबसे बड़ा संशोधन किया है। लेकिन उन्होंने क्या संशोधन किया है? दुबे ने आगे कहा कि आज राहुल गांधी को सुनने के लिए आया था. कसम खाकर आया था कि आज केवल नेहरू की, इंदिरा गांधी की, राजीव गांधी की बड़ाई करूंगा. सभी कमेटियां नेहरू ने ही बनाई थीं. यह कांग्रेस जिन्ना से लेकर सलमान रश्दी तक वोट बैंक के तुष्टिकरण में फंसी है. यह मजहरूल हक से लेकर शाहबानो तक और बाबरी से लेकर राजा महमूदाबाद तक, तुष्टिकरण की राजनीति में फंसी हुई है. राम मंदिर में आजतक राहुल गांधी, प्रियंका गांधी कोई नहीं गया.

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