तो भारत के सामने घुटने टेकेगा अमेरिका? हटाएगा 25% एक्स्ट्रा टैरिफ!
अमेरिका जल्द ही भारत के सामने घुटने टेक सकता है. भारत के चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर वी. अनंथा नागेश्वरन ने कहा है कि अमेरिका जल्द ही भारतीय सामान पर लगने वाला 25% का एक्स्ट्रा पेनल टैरिफ हटा सकता है. वहीं अमेरिका की ओर से लगाई गई रेसिप्रोकल ड्यूटी जो अभी 25 फीसदी है उसे घटाकर 10 से 15 फीसदी के बीच लाई जा ...


अमेरिका जल्द ही भारत के सामने घुटने टेक सकता है. भारत के चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर वी. अनंथा नागेश्वरन ने कहा है कि अमेरिका जल्द ही भारतीय सामान पर लगने वाला 25% का एक्स्ट्रा पेनल टैरिफ हटा सकता है. वहीं अमेरिका की ओर से लगाई गई रेसिप्रोकल ड्यूटी जो अभी 25 फीसदी है उसे घटाकर 10 से 15 फीसदी के बीच लाई जा सकती है. नागेश्वरन ने उम्मीद जताई है कि अगले कुछ महीनों में या उससे भी पहले अमेरिका इस पेनल टैरिफ को हटाने पर फैसला ले सकता है.नागेश्वरन ने कहा कि दोनों सरकारों के बीच बातचीत जारी है.
नागेश्वरन ने कहा कि “हमें उम्मीद नहीं थी कि अमेरिका हमारे पर 25 फीसदी रेसिप्रोकल और फिर 25 फीसदी पेनल टैरिफ लगाएगा. मेरा अभी भी यह मानना है कि जियोपॉलिटिकल स्थितियां 25 फीसदी पेनल टैरिफ की वजह रही होंगी. लेकिन, पिछले कुछ हफ्तों के घटनाक्रम को देखते हुए मेरा ऐसा मानना है कि और ऐसा कहने की कोई खास वजह नहीं है लेकिन मुझे पक्का विश्वास है कि 30 नवंबर के बाद पेनल टैरिफ नहीं रहेगा.”
नागेश्वरन ने कहा कि रेसिप्रोकल ड्यूटी कम होकर उसी स्तर (10 से 15 फीसदी) पर आ सकती है. टैरिफ हटने से भारत के स्टील, एल्युमिनियम और अन्य इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स को अमेरिका के बाजार में और आसानी से जगह मिलेगी. नागेवरन का बयान उस समय आया है जब हाल ही में भारत के चीफ ट्रेड नेगोशिएटर और वाणिज्य मंत्रालय के स्पेशल सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने अमेरिका के साउथ और सेंट्रल एशिया के ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव ब्रेंडन लिंच से नई दिल्ली में मुलाकात की. ट्रंप प्रशासन द्वारा भारतीय एक्सपोर्ट्स पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने के ऐलान के बाद यह दोनों देशों के बीच पहली आमने-सामने की बातचीत थी.
गौरतलब है कि अमेरिका ने रूस से तेल खरीद को लेकर 27 अगस्त से भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगा दिया था. इसके साथ ही भारतीय उत्पादों पर अमेरिका में कुल शुल्क बढक़र 50 प्रतिशत हो गया है. नागेश्वरन ने यह यह भी कहा कि शुल्क जारी रहने की स्थिति में अमेरिका को भारतीय वस्तुओं के निर्यात में गिरावट आ सकती है. उन्होंने भारत को निम्न-मध्य आय वाली आकांक्षी अर्थव्यवस्था बताते हुए कहा कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ा. कोविड महामारी के बाद भारत ने कई देशों की तुलना में तेज वृद्धि दर्ज की है.

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