अमेरिका ईरान युद्ध: 100 दिन तक चलेगा ऑपरेशन, अतिरिक्त खुफिया कर्मियों की मांग
अमेरिका ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियानों में लंबी फंसता नजर आ रहा है. अमेरिकी सेना ने पेंटागन से अतिरिक्त खुफिया कर्मियों की मांग की है ताकि आने वाले महीनों में अभियान सुचारू रूप से चल सके.

अमेरिका ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियानों में लंबी फंसता नजर आ रहा है. अमेरिकी सेना ने पेंटागन से अतिरिक्त खुफिया कर्मियों की मांग की है ताकि आने वाले महीनों में अभियान सुचारू रूप से चल सके. इस मांग से स्पष्ट होता है कि यह युद्ध शुरुआती अनुमान से कहीं लंबा चल सकता है और अब इसे कम से कम 100 दिनों तक जारी रखने की योजना बनाई जा रही है.
अमेरिकी सेना का अनुरोध
‘पॉलिटिको’ की रिपोर्ट में आंतरिक दस्तावेजों के हवाले से बताया गया है कि यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने फ्लोरिडा स्थित अपने मुख्यालय में और अधिक खुफिया कर्मचारियों की तैनाती के लिए रक्षा विभाग से आग्रह किया है. यह कदम अमेरिका की रणनीति का संकेत देता है कि यह अभियान सितंबर तक खिंच सकता है. यह स्थिति उन पूर्व कथनों के बिल्कुल उलट है, जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध की शुरुआत के तुरंत बाद कहा था कि यह अभियान केवल चार सप्ताह या उससे कम समय में पूरा हो जाएगा.
वायु रक्षा और एंटी-ड्रोन तकनीक
अमेरिकी अधिकारी यह भी बता रहे हैं कि अतिरिक्त कर्मियों के साथ-साथ क्षेत्र में वायु रक्षा प्रणालियों को तैनात करने की तैयारी की जा रही है. इसमें विशेष रूप से छोटी और कम खर्चीली ‘एंटी-ड्रोन तकनीक’ शामिल है, जिसे पेंटागन ने हाल के वर्षों में विकसित किया है.
‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’
यह संघर्ष 28 फरवरी से ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के नाम से जारी है. इस अभियान के पहले दिन ही ईरान की राजधानी तेहरान में बड़े हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई उनके आवास पर मारे गए. रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने इस युद्ध के व्यापक परिणामों का पूरी तरह अनुमान नहीं लगाया था. इसके चलते अमेरिकी विदेश विभाग ने मध्य पूर्व से अपने राजनयिक कर्मचारियों को सुरक्षित निकालने के लिए अतिरिक्त संसाधनों का प्रबंध किया है. इस निकासी प्रक्रिया का नियंत्रण अब विदेश विभाग के वरिष्ठ नेतृत्व के हाथों में है.
अमेरिकी सैनिकों के नुकसान का डर
इस अभियान के दौरान अब तक छह अमेरिकी सैनिक अपनी जान गंवा चुके हैं. राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी है कि आने वाले समय में और भी सैनिक हताहत हो सकते हैं.
पड़ोसी देशों पर खतरा
ईरान-यूएस संघर्ष का असर अब फारस की खाड़ी के अन्य देशों पर भी पड़ने लगा है. ईरानी ड्रोन और मिसाइलें संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन, कुवैत और अन्य पड़ोसी देशों के हवाई क्षेत्र की ओर उड़ती देखी जा रही हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य जो दुनिया के तेल निर्यात के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, वहां से जहाजों की आवाजाही काफी हद तक रुक गई है. ड्रोन और मिसाइल हमलों के बढ़ते खतरे के कारण व्यापारिक और तेल के जहाज इस मार्ग से गुजरने से बच रहे हैं.

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