झारखंड–ओडिशा बॉर्डर पर थमा आतंक, 20 लोगों की जान लेने वाला दंतैल हाथी पकड़ा गया
झारखंड–ओडिशा सीमा पर नौ दिनों से आतंक मचाने वाला दंतैल हाथी आखिरकार पकड़ा गया. इस हाथी ने अब तक 20 लोगों की जान ले ली थी और सीमावर्ती गांवों में दहशत फैला रखी थी. तीन राज्यों की संयुक्त टीम, विशेषज्ञों और अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से ऑपरेशन सफल हुआ.

झारखंड और ओडिशा की सीमा से सटे इलाकों में बीते कई दिनों से फैला भय अब थम गया है. नौ दिनों तक लगातार आतंक मचाने वाला वह दंतैल हाथी, जिसने अलग-अलग घटनाओं में 20 लोगों की जान ले ली थी, आखिरकार वन विभाग के संयुक्त अभियान में काबू में आ गया है. इस हाथी की वजह से सीमावर्ती गांवों में सामान्य जीवन पूरी तरह ठप हो गया था. लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर थे और रात के समय जंगल से सटे इलाकों में दहशत का माहौल बना हुआ था. लगातार बढ़ते दबाव और जनआक्रोश के बीच वन विभाग ने इस हाथी को पकड़ने के लिए एक बड़े और उच्च जोखिम वाले ऑपरेशन की योजना बनाई, जिसे अब सफलता मिल गई है.
सीमावर्ती बेनीसागर जंगल में चला हाई-रिस्क ऑपरेशन
हाथी को Jharkhand और Odisha की सीमा पर स्थित बेनीसागर जंगल क्षेत्र में घेरकर पकड़ा गया. यह इलाका घने जंगल और दुर्गम पहाड़ियों से घिरा हुआ है, जहां दृश्यता बेहद सीमित रहती है. ऐसे क्षेत्र में किसी आक्रामक दंतैल हाथी को नियंत्रित करना आसान नहीं होता. ऑपरेशन के दौरान कई बार स्थिति बेहद नाजुक हो गई, क्योंकि एक समय हाथी और टीम के बीच की दूरी मात्र 100 मीटर रह गई थी. इसके बावजूद टीम ने धैर्य और रणनीति के साथ अभियान को आगे बढ़ाया.
तीन राज्यों और विशेषज्ञों की संयुक्त कार्रवाई
इस ऑपरेशन में झारखंड और ओडिशा के वन विभाग के अलावा गुजरात और असम से आए अनुभवी वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम भी शामिल रही. इसके साथ ही एसओएस (SOS) की तकनीकी टीम ने भी अहम भूमिका निभाई. इतने बड़े पैमाने पर विशेषज्ञों की तैनाती इस बात का संकेत थी कि प्रशासन इस हाथी को लेकर कितनी गंभीर चुनौती का सामना कर रहा था. हर निर्णय बेहद सोच-समझकर लिया जा रहा था ताकि किसी और जान का नुकसान न हो.
आधुनिक तकनीक से रखी गई हाथी पर नजर
रात के समय चलाए गए इस ऑपरेशन में अत्याधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया गया. थर्मल सेंसर ड्रोन, हाई-पावर टॉर्च, मशाल और ट्रैकिंग सिस्टम की मदद से हाथी की हर गतिविधि पर नजर रखी गई. घने जंगल और अंधेरे के बावजूद तकनीक की मदद से टीम को हाथी की लोकेशन और मूवमेंट का सटीक अंदाजा मिलता रहा, जिससे ऑपरेशन को सुरक्षित दिशा में आगे बढ़ाया जा सका.
ट्रेंकुलाइजेशन सबसे संवेदनशील चरण
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार दंतैल हाथी को ट्रेंकुलाइज करना सबसे जोखिम भरा हिस्सा होता है. सही डोज और सही समय बेहद जरूरी होता है, क्योंकि जरा-सी चूक हाथी को और ज्यादा आक्रामक बना सकती है. विशेषज्ञों ने बताया कि हाथी को बेहोश होने में 20 से 25 मिनट का समय लगता है और इस दौरान पूरी टीम को सतर्क रहना पड़ता है. लंबे इंतजार और सावधानी के बाद आखिरकार हाथी को काबू में लिया गया.
हालिया हमलों ने बढ़ा दिया था जनदबाव
इससे पहले इसी हाथी ने बेनीसागर इलाके में तीन लोगों को कुचलकर मार डाला था, जिसके बाद मरने वालों की संख्या 20 तक पहुंच गई थी. इन घटनाओं ने स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा और डर पैदा कर दिया था. लगातार हो रही मौतों के कारण प्रशासन पर हाथी को जल्द से जल्द पकड़ने का जबरदस्त दबाव था, जो अब जाकर खत्म हुआ है.
अब प्रभावित इलाकों में लौटेगी राहत
हाथी के पकड़े जाने के बाद सीमावर्ती गांवों में राहत की उम्मीद जगी है. वन विभाग ने कहा है कि आगे की प्रक्रिया तय मानकों के अनुसार की जाएगी और प्रभावित इलाकों में निगरानी और सुरक्षा बढ़ाई जाएगी. स्थानीय लोगों को भरोसा दिलाया गया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे.

specializes in local and regional stories, bringing simple, factual, and timely updates to readers.



Leave a comment