तदाशा मिश्रा की DGP कुर्सी पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, पहले सुनेंगे उनका पक्ष
झारखंड की DGP तदाशा मिश्रा की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल उन्हें पद से हटाने से इनकार कर दिया है. अदालत ने कहा कि नियुक्ति पर फैसला लेने से पहले तदाशा मिश्रा का पक्ष सुनना जरूरी है.

झारखंड की DGP तदाशा मिश्रा की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई में गुरुवार को अहम मोड़ आया. अदालत ने फिलहाल उन्हें पद से हटाने से इनकार कर दिया और साफ किया कि किसी अधिकारी की नियुक्ति पर अंतिम फैसला लेने से पहले उसका पक्ष सुनना जरूरी है. यानी तदाशा मिश्रा की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट अब उनका पक्ष सुनने के बाद ही आगे फैसला करेगा. इस मामले में सिर्फ तदाशा मिश्रा की नियुक्ति ही सवालों में नहीं है, बल्कि झारखंड सरकार की DGP नियुक्ति नियमावली भी अदालत के सामने जांच के दायरे में है. केंद्र सरकार ने इस नियमावली को सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह फैसले में तय दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं माना है. दूसरी ओर Amicus Curiae ने नियमावली की कुछ धाराओं पर ही आपत्ति जताई है. कोर्ट ने अब देशभर में DGP नियुक्तियों की प्रक्रिया की भी समीक्षा कराने का निर्देश दिया है.
तदाशा मिश्रा को हटाने की मांग पर कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से तदाशा मिश्रा को DGP पद से हटाने का आदेश देने की मांग की गई. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल उनकी नियुक्ति रद्द करने से इनकार कर दिया. अदालत का कहना था कि तदाशा मिश्रा को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिए बिना उनके खिलाफ ऐसा आदेश नहीं दिया जा सकता. अब उन्हें अदालत के सामने अपनी नियुक्ति से जुड़े तथ्यों और दलीलों को रखने का मौका मिलेगा.
झारखंड की DGP नियुक्ति नियमावली पर विवाद
सुनवाई में झारखंड सरकार की ओर से बनाई गई DGP नियुक्ति नियमावली भी चर्चा के केंद्र में रही. केंद्र सरकार ने नियमावली को प्रकाश सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं माना है. केंद्र की मुख्य आपत्ति UPSC की भूमिका को लेकर है. उसका कहना है कि DGP चयन प्रक्रिया में UPSC की भूमिका महत्वपूर्ण है, जबकि झारखंड की नियमावली में UPSC की भूमिका सीमित दिखाई देती है.
Amicus Curiae की रिपोर्ट में दो प्रावधानों पर आपत्ति
मामले में अदालत की सहायता के लिए नियुक्त Amicus Curiae ने भी झारखंड की नियुक्ति नियमावली की समीक्षा की है. रिपोर्ट में पूरी नियमावली को खारिज करने की बात नहीं कही गई है. Amicus Curiae ने मुख्य रूप से दो प्रावधानों पर आपत्ति जताई है. इनमें तदाशा मिश्रा की रिटायरमेंट से ठीक एक दिन पहले DGP पद पर नियुक्ति का मुद्दा भी शामिल है. केंद्र सरकार ने भी इस नियुक्ति के समय को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है.
अब दूसरे राज्यों की DGP नियुक्तियों की भी जांच
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पश्चिम बंगाल और पंजाब की DGP नियुक्तियों का मुद्दा उठाया. उन्होंने बिहार समेत दूसरे राज्यों में भी प्रकाश सिंह फैसले के पालन को लेकर सवाल उठाए. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने Amicus Curiae को देशभर में DGP नियुक्तियों और संबंधित नियमों की समीक्षा कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया. इससे अब अदालत की जांच का दायरा केवल झारखंड तक सीमित नहीं रहेगा.
प्रकाश सिंह फैसले के पालन पर टिकी अगली कार्रवाई
29 सितंबर की आंशिक सुनवाई में केंद्र सरकार ने झारखंड की DGP नियुक्ति नियमावली को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी. सॉलिसिटर जनरल ने इसे सुप्रीम कोर्ट के पुराने निर्देशों के खिलाफ बताते हुए अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग भी की थी. इसके जवाब में कपिल सिब्बल ने कहा था कि राज्य को इस संबंध में कोई नोटिस नहीं मिला है. अब सुप्रीम कोर्ट तदाशा मिश्रा का पक्ष सुनने के बाद उनकी नियुक्ति और झारखंड की DGP नियुक्ति नियमावली पर आगे फैसला करेगा. फिलहाल अदालत ने उनकी नियुक्ति रद्द नहीं की है.




