लखीसराय के अशोक धाम में भगदड़, 7 महिलाओं की मौत; 12 से ज्यादा घायल, 4-4 लाख मुआवजा का एलान
लखीसराय के अशोक धाम मंदिर में सावन की तीसरी सोमवारी पर भगदड़ से 7 महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई. 19 लोग घायल बताए जा रहे हैं. भीड़ के दबाव, बैरिकेडिंग टूटने और बिजली के पोल को लेकर फैली अफवाह के बाद हालात बेकाबू हुए. सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं.


Lakhisarai: सावन के तीसरे सोमवार पर लखीसराय के प्रसिद्ध अशोक धाम मंदिर में सोमवार सुबह उमड़ी भारी भीड़ अचानक हादसे में बदल गई. जलाभिषेक के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं के बीच भगदड़ मचने से सात महिलाओं की मौत हो गई, जबकि 12 से अधिक लोग घायल हुए हैं. हादसे के बाद मंदिर परिसर और आसपास के इलाके में अफरातफरी मच गई. घायलों को लखीसराय सदर अस्पताल पहुंचाया गया. शुरुआती जानकारी में बिजली का पोल गिरने और करंट फैलने की अफवाह से लोगों के घबराने की बात सामने आई, जबकि जिला प्रशासन ने भीड़ के अचानक बढ़ने और बैरिकेडिंग टूटने को हादसे की अहम वजह बताया है. बताया गया कि दो ट्रेनों के एक साथ रुकने से मंदिर पहुंचने वाली भीड़ अचानक बढ़ गई थी. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घटना पर दुख जताते हुए घायलों के त्वरित इलाज के निर्देश दिए हैं. मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की सहायता भी दी गई है.
50 हजार की भीड़, दो ट्रेनों के रुकने से अचानक बढ़ा दबाव
अशोक धाम में सावन के तीसरे सोमवार को सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी. मंदिर में जलाभिषेक के लिए करीब 50 हजार लोगों के पहुंचने की बात सामने आई है. जिला प्रशासन के मुताबिक, तड़के से ही व्यवस्था संभालने के लिए अधिकारी और पुलिस बल मौके पर थे. इसके बावजूद सुबह करीब 6:40 से 6:45 बजे के बीच भीड़ का दबाव अचानक बढ़ गया. डीएम शैलेंद्र कुमार के अनुसार, इसी दौरान खेत की तरफ लगी बैरिकेडिंग टूट गई और लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरने लगे. प्रशासन ने यह भी बताया कि दो ट्रेनों के एक साथ रुकने से श्रद्धालुओं की संख्या अचानक बढ़ी थी. ऐसे में पहले से मौजूद भीड़ के बीच अतिरिक्त दबाव बन गया.
पोल गिरा या अफवाह बनी वजह?
हादसे के तुरंत बाद घटनास्थल से अलग-अलग वजहें सामने आईं. कुछ लोगों ने बताया कि रास्ते में बिजली का पोल गिरा और करंट फैलने की बात कही गई. इससे लोग डरकर भागने लगे. इसी अफरातफरी ने भगदड़ का रूप ले लिया. वहीं, पुलिस और प्रशासन ने अभी इसे अंतिम कारण नहीं माना है. SDPO ने कहा है कि बिजली के खंभे के गिरने और करंट लगने की बात सामने आई है, लेकिन पूरी स्थिति का सत्यापन होने के बाद ही हादसे की सही वजह स्पष्ट होगी. जिला प्रशासन बैरिकेडिंग टूटने और भीड़ के अचानक बेकाबू होने के पहलू की भी जांच कर रहा है. यानी फिलहाल हादसे की कड़ी में अचानक बढ़ी भीड़, बैरिकेडिंग टूटना और बिजली से जुड़ी अफवाह तीनों पहलू सामने हैं. जांच के बाद ही यह तय होगा कि भगदड़ की निर्णायक वजह क्या थी.
सातों मृतक महिलाएं, घायलों का सदर अस्पताल में इलाज
लखीसराय डीएम ने बताया कि हादसे में जान गंवाने वाले सभी लोग महिलाएं हैं. पुलिस ने कुछ मृतकों की पहचान भी शुरू कर दी है. हादसे के बाद राहत और बचाव दल ने घायलों को निकालकर लखीसराय सदर अस्पताल भेजा. कई घायलों की हालत गंभीर बताई गई है. घटना के बाद मंदिर परिसर में सुरक्षा बढ़ा दी गई. श्रद्धालुओं को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने अतिरिक्त व्यवस्था की. मौके पर पुलिस और मेडिकल टीमें तैनात रहीं. प्रशासन की प्राथमिकता घायलों को तत्काल इलाज उपलब्ध कराना और मृतकों की पहचान पूरी करना रही.
4-4 लाख की सहायता, जांच के आदेश
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हादसे को बेहद दुखद बताते हुए घायलों के समुचित और त्वरित इलाज के निर्देश दिए. सरकार की ओर से मृतकों के आश्रितों को चार-चार लाख रुपये की सहायता देने की घोषणा की गई. जिला प्रशासन के मुताबिक, मृतकों के आश्रितों को सहायता राशि के चेक भी सौंपे गए. बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद ने भी घटना की जांच कराने की बात कही है. मंत्री विजय कुमार सिन्हा और रामकृपाल यादव ने हादसे की जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की बात कही है.
अशोक धाम सावन और शिवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है. बिहार पर्यटन विभाग भी इसे लखीसराय का प्रमुख शिव मंदिर बताता है, जहां सावन में बड़ी भीड़ जुटती है. ऐसे में अब जांच के साथ सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी बड़ी भीड़ के बीच प्रवेश और निकास की व्यवस्था, बैरिकेडिंग, बिजली के ढांचे और आपातकालीन प्रतिक्रिया में कहां चूक हुई. हादसे की जांच इन सवालों का जवाब तय करेगी.

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