Akhilesh Yadav के सामने अचानक दंड लगाने लगे SP कार्यकर्ता! 'टिकट की नई टेक्निक!', की असली कहानी ने सबको चौंका दिया
Akhilesh Yadav के सामने दंड लगाने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, कई लोगों ने इसे टिकट मांगने से जोड़ा, लेकिन जांच में सामने आया कि कार्यकर्ता बेटी की शादी का कार्ड और मुलायम सिंह यादव की प्रतिमा भेंट करने पहुंचे थे.


नेताओं को फूलों की माला पहनाते, शॉल ओढ़ाते और बुके देते तो आपने खूब देखा होगा. लेकिन समाजवादी पार्टी के दफ्तर में जो नजारा देखने को मिला, उसने सोशल मीडिया का पूरा मूड ही बदल दिया. एक कार्यकर्ता पहले अखिलेश यादव को 58 किलो की पीतल की मूर्ति गिफ्ट करता है और फिर अचानक उनके सामने फर्श पर लेटकर दंड लगाने लगता है.
वीडियो सामने आया तो इंटरनेट वालों की क्रिएटिविटी भी फुल स्पीड में दौड़ पड़ी। किसी ने लिखा, "टिकट मांगने का तरीका थोड़ा कैजुअल है." तो किसी ने इसे यूपी चुनाव की नई "फिटनेस पॉलिसी" बता दिया. लेकिन क्या वाकई मामला चुनावी टिकट का था? जवाब है - नहीं.
58 किलो की मूर्ति, शादी का कार्ड, और फिर शुरू हो गए दंड!
यह पूरा मामला लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी मुख्यालय का है. वीडियो में दिखाई देने वाले शख्स झांसी के कन्हैयालाल उर्फ सीताराम यादवहैं. वह चुनाव का टिकट लेने नहीं, बल्कि अपनी बेटी की शादी का निमंत्रण देने पहुंचे थे. साथ में वे करीब तीन फीट ऊंची और 58 किलो वजनी मुलायम सिंह यादव की पीतल की प्रतिमा भी लेकर आए थे, जिसे उन्होंने अखिलेश यादव को भेंट किया. इसके बाद उन्होंने कहा कि अगर नेताजी मुलायम सिंह यादव आज जीवित होते, तो वे उन्हें दंडवत प्रणाम करते. यही भावना व्यक्त करने के लिए उन्होंने अखिलेश यादव से अनुमति ली और वहीं फर्श पर लगातार दंड लगाने शुरू कर दिए.
Akhilesh भी मुस्कुराए, सोशल मीडिया ने बना दिया 'टिकट टेस्ट'
कार्यकर्ता का अंदाज देखकर खुद अखिलेश यादव भी मुस्कुरा पड़े. उन्होंने आगे बढ़कर उनकी पीठ थपथपाई, हाथ मिलाया और उनका अभिवादन स्वीकार किया. लेकिन जैसे ही वीडियो सोशल मीडिया पर पहुंचा, लोगों ने अपनी-अपनी कहानी लिखनी शुरू कर दी. किसी ने इसे टिकट पाने की कोशिश बताया, तो किसी ने इसे राजनीति का सबसे अनोखा "इंटरव्यू राउंड" कह दिया. हालांकि उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस मुलाकात का चुनावी टिकट से कोई संबंध नहीं था.
ये पहली बार नहीं, पहले भी गिफ्ट कर चुके हैं 58 किलो का सरप्राइज
अगर आपको लग रहा है कि यह पहली बार हुआ है, तो ऐसा नहीं है. इसी महीने अखिलेश यादव के जन्मदिन पर भी सीताराम यादव उनसे मिलने पहुंचे थे. उस समय उन्होंने करीब 58 किलो वजनी पीतल की प्रतिमाभेंट की थी, जिसमें अखिलेश यादव अपनी पहचान बनी साइकिल पर बैठे नजर आते हैं. यानी सोशल मीडिया ने भले ही इस वीडियो को "टिकट स्टंट" बना दिया हो, लेकिन हकीकत में यह एक समर्थक का अपने नेताओं और मुलायम सिंह यादव के प्रति सम्मान जताने का अलग अंदाज था. कभी-कभी वायरल वीडियो जितनी तेज़ी से फैसले सुना देते हैं, सच्चाई उतनी ही आराम से बाद में सामने आती है.

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