दिल्ली से शेख हसीना का पहला LIVE संबोधन, परिवार को याद कर हुईं भावुक; बोलीं- ‘मैं अपने लोगों से कभी अलग नहीं हुई’
“बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने करीब दो साल बाद नई दिल्ली से वर्चुअल माध्यम से सार्वजनिक संबोधन दिया. इस दौरान उन्होंने परिवार को याद करते हुए भावुक होकर कहा कि वह देश से दूर जरूर हैं, लेकिन बांग्लादेश के लोगों से कभी अलग नहीं हुईं.”

Delhi: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने करीब दो साल बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से मीडिया को संबोधित किया. नई दिल्ली स्थित फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया (FCC South Asia) के कार्यक्रम में उन्होंने वर्चुअल माध्यम से अपनी बात रखी. संबोधन के दौरान कैमरा बंद रहा, लेकिन उनकी आवाज में भावनाएं साफ झलक रही थीं. अपने भाषण की शुरुआत में उन्होंने राष्ट्रपिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान और 1975 में मारे गए अपने परिवार के सदस्यों को याद करते हुए भावुक हो गईं. उन्होंने कहा कि वह देश से दूर हैं, लेकिन बांग्लादेश के लोगों से कभी अलग नहीं हुईं.
परिवार को याद कर छलके आंसू
अपने संबोधन की शुरुआत में शेख हसीना ने बांग्लादेश के राष्ट्रपिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान, स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों और 15 अगस्त 1975 को मारे गए अपने परिवार के सदस्यों को श्रद्धांजलि दी. इस दौरान वह भावुक हो गईं और कुछ देर के लिए उनकी आवाज भर्रा गई. उन्होंने कहा कि 15 अगस्त 1975 उनके जीवन का सबसे दर्दनाक दिन था, जब उन्होंने अपने परिवार के अधिकांश सदस्यों को खो दिया. उन्होंने अपने भाई को भी याद किया, जिनका जन्मदिन उसी दिन था. हसीना ने कहा कि आज वह केवल पूर्व प्रधानमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि बंगबंधु की बेटी के रूप में अपनी बात रख रही हैं और अपने परिवार के बलिदान को कभी नहीं भूल सकतीं.
‘देश से दूर हूं, लेकिन लोगों से नहीं’
शेख हसीना ने कहा कि उन्हें अपने देश से दूर जाने के लिए मजबूर किया गया, लेकिन उनका दिल हमेशा बांग्लादेश के लोगों के साथ रहा. उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों से वह अपने प्रिय देश को कठिन दौर से गुजरते हुए देख रही हैं. उनके अनुसार, यह वह बांग्लादेश नहीं है जिसके लिए 1971 के मुक्ति संग्राम में लाखों लोगों ने बलिदान दिया था. उन्होंने दावा किया कि जुलाई और अगस्त 2024 की घटनाओं को केवल छात्र आंदोलन कहना सही नहीं होगा. उनके मुताबिक, सरकार ने शुरुआत से ही बातचीत और कानूनी प्रक्रिया के जरिए स्थिति संभालने की कोशिश की थी, लेकिन कुछ संगठित समूहों ने छात्रों की मांगों को हिंसक राजनीतिक आंदोलन का रूप दे दिया.
आंदोलन और राजनीतिक घटनाक्रम पर रखी अपनी बात
अपने संबोधन में शेख हसीना ने कहा कि उनकी सरकार ने विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने का प्रयास किया था, लेकिन हालात धीरे-धीरे हिंसक होते गए. उन्होंने आरोप लगाया कि सुधार की मांग की आड़ में कुछ संगठित ताकतों ने आंदोलन को राजनीतिक दिशा दी. हसीना ने कहा कि उनका उद्देश्य हमेशा लोकतांत्रिक प्रक्रिया और कानून के दायरे में रहकर समाधान निकालना था. उन्होंने दोहराया कि वह आज भी बांग्लादेश की जनता के साथ खड़ी हैं और देश के बेहतर भविष्य की कामना करती हैं. उनका कहना था कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी अपने देश और लोगों से दूरी महसूस नहीं की.
अवामी लीग का संदेश- ‘बदला नहीं, न्याय चाहिए’
कार्यक्रम के दौरान बांग्लादेश के पूर्व मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी ने भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में बांग्लादेश कई चुनौतियों से गुजरा है और आम जनता महंगाई, बेरोजगारी तथा अन्य समस्याओं से जूझ रही है. उन्होंने कहा कि धार्मिक अल्पसंख्यकों और कई अन्य समूहों के लिए सार्वजनिक जीवन में चुनौतियां बढ़ी हैं. चौधरी ने कहा कि शेख हसीना की संभावित वापसी को टकराव नहीं, बल्कि देश के घाव भरने के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए. उन्होंने स्पष्ट किया कि अवामी लीग बदला नहीं, बल्कि न्याय चाहती है और सभी संस्थाओं से निष्पक्ष एवं पेशेवर तरीके से काम करने की अपील की.



