पेट्रोल-डीजल पर राहत की उम्मीद! अमेरिका ने बढ़ाई रूसी तेल खरीद की छूट
देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के बीच आम लोगों के लिए राहत की उम्मीद जगी है. सरकारी तेल कंपनियों ने पांच दिनों में दूसरी बार ईंधन के दाम बढ़ाए हैं, जिससे महंगाई का दबाव और बढ़ गया है.

देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के बीच आम लोगों के लिए राहत की उम्मीद जगी है. सरकारी तेल कंपनियों ने पांच दिनों में दूसरी बार ईंधन के दाम बढ़ाए हैं, जिससे महंगाई का दबाव और बढ़ गया है. इसी बीच कच्चे तेल को लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार से सकारात्मक खबर सामने आई है. अमेरिका ने भारत समेत कई देशों को रूसी तेल खरीदने की दी गई छूट को एक महीने के लिए आगे बढ़ा दिया है. इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भी दर्ज की गई है. माना जा रहा है कि इससे भारत को सस्ते तेल की सप्लाई जारी रखने में मदद मिलेगी और आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है. हालांकि तेल कंपनियों को अब भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है और वैश्विक हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं.
अमेरिका ने क्यों बढ़ाई रूसी तेल खरीद की छूट?
अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने पर लगी पाबंदियों में भारत समेत कई देशों को दी गई राहत को एक महीने के लिए आगे बढ़ा दिया है. अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए जानकारी दी कि 30 दिनों का अस्थायी जनरल लाइसेंस जारी किया जाएगा. इसके तहत वे देश समुद्र में मौजूद रूसी तेल खरीद सकेंगे जिन्हें ऊर्जा की सबसे ज्यादा जरूरत है. अमेरिका का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य वैश्विक क्रूड मार्केट में स्थिरता बनाए रखना और तेल की सप्लाई बाधित होने से रोकना है. साथ ही अमेरिका यह भी चाहता है कि चीन सस्ते रूसी तेल का अत्यधिक भंडारण न कर सके. रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान से जुड़े तनाव के बीच दुनियाभर में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं. ऐसे में भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए यह छूट काफी अहम मानी जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर रूस से सस्ता तेल मिलता रहा तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर कुछ हद तक राहत मिल सकती है.
ईरान तनाव और मिडिल ईस्ट संकट का असर
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित किया है. अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले की आशंकाओं के कारण पिछले कुछ समय में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया. दुनिया का करीब 20 फीसदी कच्चा तेल होर्मुज स्ट्रेट के जरिए गुजरता है, इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी सैन्य तनाव का सीधा असर वैश्विक सप्लाई पर पड़ता है. हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि मिडिल ईस्ट के नेताओं के अनुरोध पर उन्होंने फिलहाल ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने का फैसला किया है. इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में नरमी आई है. विशेषज्ञों के अनुसार, यदि मिडिल ईस्ट में हालात और बिगड़ते हैं तो तेल की कीमतों में फिर बड़ा उछाल आ सकता है. वहीं अगर तनाव कम होता है और सप्लाई सामान्य रहती है, तो आने वाले दिनों में भारत समेत कई देशों को राहत मिल सकती है.
भारत कितना खरीद रहा रूसी तेल?
भारत रूस से बड़े पैमाने पर कच्चा तेल खरीद रहा है. डेटा फर्म Kpler के अनुसार, मार्च महीने में भारत ने रूस से प्रतिदिन करीब 20 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा था. अप्रैल में यह खरीद घटकर लगभग 16 लाख बैरल प्रतिदिन रही. भारत के लिए रूस सस्ते तेल का बड़ा स्रोत बनकर उभरा है. यही वजह है कि अमेरिका द्वारा दी गई छूट भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है. मार्च में भारत के लिए ऑयल बास्केट की औसत कीमत 113.49 डॉलर प्रति बैरल रही, जबकि अप्रैल में यह बढ़कर 114.48 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई थी. मई में अब तक यह औसतन 106.69 डॉलर प्रति बैरल रही है. फिलहाल ब्रेंट क्रूड करीब 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है. हालांकि सरकारी तेल कंपनियां अब भी पेट्रोल, डीजल और एलपीजी पर भारी घाटा झेल रही हैं. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट के बावजूद घरेलू स्तर पर तुरंत बड़ी राहत मिलना आसान नहीं माना जा रहा है.

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