छात्र आंदोलन के बीच ‘परजीवी’ वाली सियासत, हेमंत के बयान पर आदित्य साहू ने पूछा- बताएं असली परजीवी कौन?
“झारखंड में छात्र आंदोलन को लेकर हेमंत सोरेन और भाजपा के बीच ‘परजीवी’ बयान पर सियासी घमासान छिड़ गया है. हेमंत के बयान पर आदित्य साहू ने पलटवार करते हुए पूछा- असली परजीवी कौन?”

Ranchi: झारखंड में छात्रों के आंदोलन को लेकर सरकार और भाजपा के बीच सियासी टकराव अब ‘परजीवी’ शब्द पर आकर केंद्रित हो गया है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि वह छात्रों की आड़ में अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने की कोशिश कर रहा है और परजीवियों की तरह खुद को जिंदा रखने के लिए अलग-अलग चारा तलाश रहा है. इसके बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री से ही सवाल कर दिया कि आखिर असली परजीवी कौन है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के सहारे चलने वाले लोग भाजपा को परजीवी बता रहे हैं, लेकिन लाठी और बंदूक की ताकत से भाजपा कार्यकर्ताओं को डराया नहीं जा सकता. छात्र आंदोलन पर दोनों नेताओं के बयान से झारखंड की सियासत और गरमा गई है.
हेमंत सोरेन बोले- छात्रों की आड़ में ताकत दिखा रहा विपक्ष
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सदन में विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि पिछले कुछ दिनों से चल रहे घटनाक्रम को देखकर उन्हें लगा कि विपक्ष के पास अब कोई मुद्दा नहीं बचा है. उन्होंने कहा कि विपक्ष अलग-अलग स्रोतों के जरिए खुद को जीवित रखने की कोशिश करता है और अब छात्रों की आड़ में अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहा है. इसी संदर्भ में उन्होंने विपक्ष को ‘परजीवी’ बताते हुए कहा कि जिस तरह परजीवी अपने आपको जिंदा रखने के लिए अलग-अलग चारा तलाशते हैं, उसी तरह विपक्ष भी आंदोलन के जरिए अपना राजनीतिक अस्तित्व बनाए रखने की कोशिश कर रहा है.
आदित्य साहू का पलटवार- बताएं असली परजीवी कौन?
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने प्रेस वार्ता कर पलटवार किया. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को बताना चाहिए कि असली परजीवी कौन है. आदित्य साहू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के सहारे चलने वाले लोग भाजपा को परजीवी बता रहे हैं. उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं को लाठी और बंदूक की ताकत के बल पर डराया नहीं जा सकता. उनके मुताबिक, सरकार छात्रों के आंदोलन को दबाने के लिए जिस तरह की कार्रवाई कर रही है, उससे भाजपा पीछे हटने वाली नहीं है.
छात्रों और मीडिया पर कार्रवाई को लेकर सरकार पर हमला
आदित्य साहू ने छात्रों और मीडिया कर्मियों के साथ हुई कथित मारपीट को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए आरोप लगाया कि छात्रों के आंदोलन को दबाने के लिए बर्बरता और अमानवीय कार्रवाई की गई. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पिछले करीब 20 दिनों से सरकार का रवैया लगातार सवालों के घेरे में है. उन्होंने मुख्यमंत्री के उस बयान पर भी सवाल उठाया, जिसमें पुलिसकर्मियों को सम्मानित करने की बात कही गई है. साहू ने पूछा कि बच्चों पर लाठी चलाने वाले पुलिसकर्मियों को किस आधार पर सम्मानित किया जाएगा.
राहुल गांधी पर भी आदित्य साहू ने साधा निशाना
आदित्य साहू ने छात्र आंदोलन को लेकर राहुल गांधी की भूमिका पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने ट्वीट कर महज औपचारिकता पूरी की है. साहू का आरोप है कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना देकर छात्रों को भड़काने का काम कर चुके हैं. उन्होंने कहा कि अगर राहुल गांधी में नैतिकता बची है तो उन्हें मुख्यमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठना चाहिए और मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग करनी चाहिए. उन्होंने राहुल गांधी के झारखंड दौरे को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वे उत्तर प्रदेश जा सकते हैं, लेकिन झारखंड क्यों नहीं आ सकते.
JPSC-JSSC और TDPL परीक्षा विवाद पर भी आमने-सामने सरकार-विपक्ष
छात्र आंदोलन की पृष्ठभूमि में JPSC-JSSC परीक्षाओं और TDPL कंपनी से जुड़ा विवाद भी राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बना हुआ है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि सरकार की मंशा छात्रों के हित में स्पष्ट है और किन परीक्षाओं को रद्द किया जाएगा तथा किनकी जांच होगी, इसे लेकर छात्रों को आश्वस्त किया गया है. उन्होंने विपक्ष पर युवाओं को भ्रमित करने का आरोप लगाया. मुख्यमंत्री ने TDPL को उत्तर प्रदेश के लखनऊ की कंपनी बताते हुए आरोप लगाया कि यूपी-बिहार के कुछ लोगों के साथ जुड़ाव बनाकर झारखंड के युवाओं को दिग्भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है.
वहीं भाजपा का दावा है कि छात्रों का आंदोलन अब सिर्फ झारखंड तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देशव्यापी मुद्दा बन चुका है. आदित्य साहू ने झारखंड बंद को सफल बताते हुए कहा कि राज्यभर में दुकानदारों और आम लोगों ने बंद का समर्थन किया. इस पूरे विवाद में अब छात्रों की मांगों के साथ-साथ ‘परजीवी’ वाली राजनीतिक बयानबाजी भी केंद्र में आ गई है. एक ओर मुख्यमंत्री विपक्ष पर आंदोलन की आड़ में राजनीतिक अस्तित्व बचाने का आरोप लगा रहे हैं, तो दूसरी ओर भाजपा मुख्यमंत्री से ही पूछ रही है कि असली परजीवी कौन है.


