छात्रों से सरकार की वार्ता नहीं हुई, अब आगे क्या? JPSC-JSSC आंदोलन के बीच बढ़ा सस्पेंस
JPSC-JSSC विवाद में छात्रों और सरकार के बीच प्रस्तावित वार्ता नहीं हो सकी. 24 दिन से जारी आंदोलन के बीच अब सवाल है कि बातचीत क्यों टली और सरकार आगे क्या कदम उठाएगी. मुख्यमंत्री स्तर पर मंत्रियों के साथ मंथन के बाद अगली पहल पर सबकी नजर है.

Ranchi: JPSC-JSSC विवाद को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों और सरकार के बीच सोमवार को प्रस्तावित वार्ता नहीं हो सकी. छात्रों का प्रतिनिधिमंडल बातचीत के लिए तैयार था, लेकिन तय कार्यक्रम के मुताबिक सरकार के साथ बैठक नहीं हुई. इसके बाद पूरे घटनाक्रम को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई. इसी बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंत्रियों के साथ प्रोजेक्ट भवन में बैठक की. हालांकि, इस बैठक का आधिकारिक एजेंडा स्पष्ट नहीं किया गया है. छात्र लंबे समय से परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच, परीक्षा रद्द करने और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग कर रहे हैं. ऐसे में जिस वार्ता से आंदोलन के समाधान की उम्मीद बन रही थी, उसका नहीं होना सरकार और छात्रों के बीच गतिरोध की ओर इशारा कर रहा है. अब निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार अगली बातचीत कब और किस प्रस्ताव के साथ करती है.
वार्ता नहीं होने से फिर बढ़ा गतिरोध, छात्रों की मांग पर कायम
आंदोलनकारी छात्रों और सरकार के प्रतिनिधिमंडल के बीच सोमवार को बातचीत होनी थी. छात्रों का डेलिगेशन इसके लिए तैयार था, लेकिन प्रस्तावित वार्ता आगे नहीं बढ़ सकी. बातचीत नहीं होने के बाद छात्रों के बीच भी अगले कदम को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई. JPSC की 14वीं प्रारंभिक परीक्षा को लेकर छात्र लगातार सवाल उठा रहे हैं. उनकी प्रमुख मांगों में परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच, परीक्षा रद्द करना और आगे की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना शामिल है. पहले भी सरकार और छात्रों के बीच बातचीत के प्रयास हो चुके हैं, लेकिन विवाद का कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया. ऐसे में सोमवार की वार्ता से उम्मीद थी कि दोनों पक्ष कम से कम आगे की दिशा पर सहमति बनाने की कोशिश करेंगे. वार्ता नहीं होने से फिलहाल वह संभावना भी टल गई है.
राहुल गांधी के पत्र के बाद मामला और राजनीतिक हुआ
JPSC विवाद के बीच राहुल गांधी के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखे पत्र ने भी इस मुद्दे को राजनीतिक महत्व दिया है. राहुल गांधी ने छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से लेने और उनके समाधान की दिशा में कदम उठाने की बात कही है. इसी बीच छात्रों के साथ प्रस्तावित बातचीत का नहीं होना और फिर मुख्यमंत्री स्तर पर मंत्रियों के साथ मंथन शुरू होना घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बनाता है. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि प्रोजेक्ट भवन की बैठक में छात्रों की मांगों पर कोई ठोस निर्णय लिया गया है या नहीं. फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि वार्ता आखिर क्यों नहीं हो सकी और सरकार अब छात्रों के साथ अगली बातचीत के लिए क्या रास्ता अपनाएगी. अगर जल्द कोई ठोस पहल नहीं होती है, तो लंबे समय से चल रहा छात्र आंदोलन आगे और तेज हो सकता है.



