नीतीश कुमार का एग्जिट प्लान? 8 को आखिरी कैबिनेट, 12 अप्रैल को इस्तीफे की चर्चा तेज
नीतीश कुमार के राजनीतिक भविष्य को लेकर चल रहा सस्पेंस अब खत्म होता नजर आ रहा है. हाल ही में राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होने के बाद उनके अगले कदमों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है.

Patna: नीतीश कुमार के राजनीतिक भविष्य को लेकर चल रहा सस्पेंस अब खत्म होता नजर आ रहा है. हाल ही में राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होने के बाद उनके अगले कदमों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है.
8 अप्रैल को आखिरी कैबिनेट बैठक!
सूत्रों के मुताबिक, नीतीश कुमार 8 अप्रैल को पटना में अपनी आखिरी कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता कर सकते हैं. इसके बाद 9 अप्रैल को उनका दिल्ली दौरा प्रस्तावित है, जहां वे पार्टी बैठकों के साथ-साथ शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगे. दिल्ली प्रवास के दौरान नीतीश कुमार की मुलाकात नरेंद्र मोदी और अमित शाह से हो सकती है. इस बैठक में बिहार के अगले मुख्यमंत्री के नाम पर चर्चा होने की संभावना है. बताया जा रहा है कि नीतीश खुद भी अपने उत्तराधिकारी को लेकर सुझाव दे सकते हैं.
10 अप्रैल को रचेंगे राजनीतिक इतिहास
10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के साथ ही नीतीश कुमार भारतीय राजनीति में एक खास रिकॉर्ड अपने नाम करेंगे. वे उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो जाएंगे, जो संसद और राज्य विधानमंडल के चारों सदनों—लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और विधान परिषद—के सदस्य रह चुके हैं.
12 अप्रैल को इस्तीफे की अटकलें
सूत्रों के अनुसार, 11 अप्रैल को पटना लौटने के बाद 12 अप्रैल को नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं. हालांकि इस पर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सियासी गलियारों में इसे लेकर चर्चाएं तेज हैं.
बीजेपी के लिए खुल सकता है मौका
नीतीश के संभावित इस्तीफे से भारतीय जनता पार्टी के लिए बिहार में पहली बार मुख्यमंत्री पद हासिल करने का रास्ता साफ हो सकता है. अब तक पार्टी राज्य में सहयोगी भूमिका में रही है.
उत्तराधिकारी की दौड़ में कौन आगे?
अगले मुख्यमंत्री को लेकर कई नाम चर्चा में हैं, लेकिन मौजूदा डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे माना जा रहा है. वे संगठन और नेतृत्व दोनों के करीबी माने जाते हैं. साथ ही जातीय समीकरण को देखते हुए कुर्मी-कुशवाहा समुदाय से नेतृत्व बनाए रखने पर भी जोर है.
क्या होगा चौंकाने वाला फैसला?
हालांकि अंतिम फैसला शीर्ष नेतृत्व के हाथ में है. नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी पहले भी कई राज्यों में अप्रत्याशित फैसले ले चुकी है. ऐसे में बिहार में भी किसी नए चेहरे की एंट्री से इनकार नहीं किया जा सकता. बिहार की राजनीति एक बड़े बदलाव के मुहाने पर खड़ी है. आने वाले कुछ दिन राज्य की सत्ता के समीकरण को पूरी तरह बदल सकते हैं. सभी की नजर अब दिल्ली में होने वाली बैठकों और 12 अप्रैल पर टिकी है.

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