नक्सल मुक्त बिहार: 3 लाख के इनामी सुरेश कोड़ा ने किया आत्मसमर्पण, सरकार की बड़ी सफलता
बिहार अब नक्सलवाद की गिरफ्त से पूरी तरह मुक्त हो चुका है. केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah के नेतृत्व में देश को नक्सल मुक्त बनाने के अभियान को एक बड़ी सफलता मिली है. 18 फरवरी 2026 को बिहार के लिए ऐतिहासिक दिन साबित हुआ

बिहार अब नक्सलवाद की गिरफ्त से पूरी तरह मुक्त हो चुका है. केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah के नेतृत्व में देश को नक्सल मुक्त बनाने के अभियान को एक बड़ी सफलता मिली है. 18 फरवरी 2026 को बिहार के लिए ऐतिहासिक दिन साबित हुआ, जब 25 वर्षों से फरार और तीन लाख रुपये के इनामी नक्सली कमांडर सुरेश कोड़ा उर्फ मुस्तकीम ने आखिरकार हथियार डाल दिए. उसने मुंगेर में पुलिस उप-महानिरीक्षक और बिहार STF के समक्ष भारी मात्रा में अवैध हथियारों और कारतूस के साथ आत्मसमर्पण किया. पुलिस मुख्यालय के अनुसार, इस समर्पण के साथ ही मुंगेर सहित पूरे बिहार से नक्सली गतिविधियों का पूरी तरह सफाया हो गया है.
25 साल का आपराधिक इतिहास
सुरेश कोड़ा हार्डकोर नक्सली था और स्टेट एडवाइजरी कमेटी (SAC) का सक्रिय सदस्य रहा. पिछले ढाई दशक से वह पुलिस को चकमा दे रहा था. मुंगेर, लखीसराय और जमुई जिलों में उसके खिलाफ हत्या, अपहरण, विस्फोट और लेवी वसूली के करीब 60 मामले दर्ज थे. वर्ष 2008 और 2010 में दो चौकीदारों की गला काटकर हत्या, 2017 में उप-मुखिया के पति की हत्या और 2021 में नवनिर्वाचित मुखिया परमानंद टुडू की हत्या जैसे जघन्य अपराधों में उसकी सीधी भूमिका रही है.
सुरक्षा बलों के लगातार अभियान का असर
सुरेश कोड़ा का आत्मसमर्पण अचानक नहीं, बल्कि बिहार STF और अर्धसैनिक बलों द्वारा चलाए जा रहे लगातार नक्सलरोधी अभियानों का परिणाम है. मुंगेर की पहाड़ियों और दुर्गम इलाकों में सघन तलाशी और मुठभेड़ों से नक्सलियों की कमर टूट चुकी थी. दिसंबर 2025 में भी बहादुर कोड़ा और नारायण कोड़ा जैसे सब-जोनल कमांडरों ने आत्मसमर्पण किया था. बढ़ते दबाव के चलते सुरेश कोड़ा के पास भी सरेंडर के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा. आत्मसमर्पण के दौरान उसने दो इंसास राइफल, एक AK-47, एक AK-56, 10 मैगजीन और 505 जिंदा कारतूस पुलिस को सौंपे. यह कार्रवाई सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी रणनीतिक सफलता मानी जा रही है.
पुनर्वास नीति से मुख्यधारा में वापसी
सुरेश कोड़ा ने राज्य सरकार की आत्मसमर्पण-सह-पुनर्वास नीति के तहत हथियार डाले हैं. उसे घोषित तीन लाख रुपये के इनाम के साथ हथियारों के लिए 71,515 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी. इसके अलावा 5 लाख रुपये की तत्काल सहायता और स्वरोजगार के लिए 36 महीनों तक हर महीने 10 हजार रुपये (कुल 3.60 लाख रुपये) का प्रशिक्षण भत्ता भी मिलेगा. सरकार का मानना है कि इस पहल से बचे-खुचे नक्सली भी हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित होंगे. बिहार का नक्सल मुक्त होना राज्य की सुरक्षा और विकास की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.

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