Ranchi: मनरेगा अपने उद्देश्य से भटककर भ्रष्टाचार, फर्जीवाड़े और कमीशनखोरी का अड्डा बन चुका था. योजनाएं कागजों में पूरी दिखाई जाती रहीं, लेकिन जमीन पर उनका कोई अस्तित्व नहीं था. झारखंड समेत देश के कई राज्यों में यही तस्वीर सामने आई, जहां श्रमिकों के नाम पर करोड़ों रुपये की बंदरबांट होती रही. यह सीधा आरोप बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने लगाया. उन्होंने कहा कि इसी व्यवस्था को खत्म करने और गांव, गरीब व मजदूर को वास्तविक हक देने के लिए जी राम जी योजना लाई गई है, जो महात्मा गांधी के रामराज के सपने को जमीन पर उतारने का माध्यम बनेगी. बाबूलाल प्रदेश बीजेपी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे.
“झारखंड बना मनरेगा लूट का मॉडल”
बाबूलाल ने कहा कि झारखंड में मनरेगा घोटालों को लेकर हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक रहे. कई जिलों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां सामने आईं. खूंटी जिले में करोड़ों रुपये के गबन के मामले ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी, जहां एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तक को जेल जाना पड़ा. यही नहीं, कई जगहों पर श्रम आधारित कार्यों में मशीनों के इस्तेमाल और भारी कमीशनखोरी के आरोप भी लगे.
“काम दिखा कागजों में, जमीन पर कुछ नहीं”
उन्होंने कहा कि देश के 23 राज्यों में निगरानी के दौरान यह पाया गया कि जिन कार्यों पर खर्च दिखाया गया, वे मौके पर मौजूद ही नहीं थे. इसके बावजूद भुगतान जारी रहा. डिजिटल भुगतान और ई-पेमेंट की व्यवस्था होने के बाद भी पारदर्शिता नहीं आ सकी. इन सभी खामियों को देखते हुए केंद्र सरकार ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के तहत नए अधिनियम का फैसला किया. यह अधिनियम गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने, रोजगार बढ़ाने और जवाबदेही तय करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है.
“100 नहीं, अब 125 दिन का काम”
नए ग्रामीण रोजगार अधिनियम के तहत अब श्रमिकों को 100 दिन के बजाय 125 दिन के कार्य दिवस की गारंटी दी गई है. कृषि सीजन के दौरान 60 दिन का नो-वर्क पीरियड रखा गया है, ताकि मजदूर खेती के काम से जुड़ सकें और किसानों को समय पर श्रमिक उपलब्ध हों. काम नहीं मिलने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता देने का भी प्रावधान किया गया है. इस योजना के तहत जल संरक्षण, ग्रामीण सड़क और बुनियादी ढांचा, रोजगार सृजन वाले निर्माण कार्य और पर्यावरण संतुलन से जुड़े प्रोजेक्ट प्राथमिकता में रखे गए हैं. नई व्यवस्था में एआई आधारित निगरानी, जीपीएस मोबाइल ट्रैकिंग, साप्ताहिक सार्वजनिक रिपोर्ट और हर पंचायत में साल में दो बार सोशल ऑडिट का प्रावधान किया गया है. केंद्र और राज्य स्तर पर निगरानी समितियां भी बनाई जाएंगी.
कांग्रेस पर सीधा हमला
बाबूलाल ने कहा कि कांग्रेस इस नई व्यवस्था से इसलिए परेशान है क्योंकि इससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी. कहा कि कि कांग्रेस को मजदूरों को ज्यादा काम मिलने, बेरोजगारी भत्ता मिलने और योजना के नाम में “राम” शब्द होने से दिक्कत है.


