JPSC-JSSC पर बड़ा एक्शन: 22 भर्ती परीक्षाएं रद्द, 17 की CID जांच; हजारों नियुक्तियों पर संकट
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर हेमंत सोरेन सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. JPSC-JSSC की 22 भर्ती परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं, जबकि 17 परीक्षाओं की CID जांच होगी और 6 भर्तियों को फिलहाल स्थगित रखा गया है. इनमें 11वीं-13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा भी शामिल है.

Ranchi: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर जारी विवाद के बीच हेमंत सोरेन सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. वर्ष 2010 से अब तक हुई 22 नियुक्ति परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया गया है. इनमें 11वीं-13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा भी शामिल है, जिसके जरिए 342 अधिकारियों की नियुक्ति हुई थी. वहीं, छह भर्ती परीक्षाओं को फिलहाल स्थगित रखा गया है, जबकि 17 परीक्षाओं की जांच CID को सौंपी गई है. सरकार का यह फैसला JPSC और JSSC में सुधार की मांग को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच आया है. इससे पहले JSSC-CGL परीक्षा भी रद्द की जा चुकी है.
22 भर्ती परीक्षाओं पर सरकार का बड़ा फैसला
झारखंड सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और विवादित एजेंसियों की भूमिका को देखते हुए कई महत्वपूर्ण परीक्षाओं पर कार्रवाई की है. सरकार ने 22 नियुक्ति परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया है. इनमें विभिन्न विभागों और पदों से जुड़ी भर्ती परीक्षाएं शामिल हैं. इस निर्णय के बाद उन अभ्यर्थियों और नियुक्त कर्मचारियों के बीच भी चिंता बढ़ गई है, जो इन परीक्षाओं के माध्यम से सरकारी सेवा में पहुंचे हैं. सरकार का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखना प्राथमिकता है. छात्र संगठनों की ओर से लंबे समय से JPSC और JSSC की कार्यप्रणाली में सुधार तथा कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही थी. इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने परीक्षाओं की समीक्षा और जांच की प्रक्रिया तेज करने का निर्णय लिया है.
11वीं-13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा भी रद्द
सरकार के फैसले का सबसे बड़ा असर 11वीं-13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा पर पड़ा है. इस परीक्षा के माध्यम से कुल 342 अधिकारियों की नियुक्ति हुई थी. रिपोर्ट के अनुसार, CID की ओर से अभय तिवारी से पूछताछ के दौरान कथित तौर पर ऐसे आरोप सामने आए कि कुछ अभ्यर्थियों ने पैसे देकर नौकरी हासिल की थी. इसके बाद इस परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे. सरकार ने अब इसे भी रद्द की गई परीक्षाओं की सूची में शामिल कर लिया है. इस फैसले का असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ सकता है जिन्होंने लंबी चयन प्रक्रिया के बाद नियुक्ति हासिल की थी. हालांकि, आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और सरकार के अगले निर्णय पर निर्भर करेगी. मामले ने राज्य की भर्ती व्यवस्था और चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर एक बार फिर बहस तेज कर दी है.
इन भर्ती परीक्षाओं को किया गया रद्द
रद्द की गई परीक्षाओं में TDPL से जुड़ी कई वर्तमान भर्तियां शामिल हैं. इनमें विश्वविद्यालयों में नॉन-टीचिंग पदों की भर्ती के लिए विज्ञापन संख्या 09/2025, सहायक निदेशक एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी की बैकलॉग और नियमित भर्ती के विज्ञापन 10/2025 व 11/2025 तथा ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती 12/2025 शामिल हैं. इसके अलावा सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर बैकलॉग भर्ती 02/2026 और सरकारी पॉलिटेक्निक व महिला पॉलिटेक्निक में लेक्चरर की बैकलॉग एवं नियमित भर्ती 03/2026 और 04/2026 को भी रद्द किया गया है. मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशलिस्ट सहायक प्रोफेसर भर्ती 07/2026 पर भी कार्रवाई हुई है. इसके अतिरिक्त सिविल जज, सहायक वन संरक्षक, वन रेंज अधिकारी, सहायक लोक अभियोजक, झारखंड संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा 2025 और 2023 बैकलॉग समेत कई अन्य परीक्षाएं भी रद्द की गई हैं.
Food Safety Officer और JPSC की अन्य परीक्षाएं भी सूची में
सरकार के फैसले के तहत फूड सेफ्टी ऑफिसर, चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट ऑफिसर और संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा-2023 जैसी परीक्षाओं को भी रद्द कर दिया गया है. इसके अलावा आंशिक रूप से TDPL या अन्य विवादित एजेंसी से जुड़ी 6वीं लिमिटेड डिप्टी कलेक्टर भर्ती परीक्षा, जिसका विज्ञापन 11/2018 था, को भी रद्द किया गया है. झारखंड एलिजिबिलिटी टेस्ट 2024 के विज्ञापन 08/2025 पर भी इसी तरह की कार्रवाई की गई है. इन फैसलों के पीछे मुख्य उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की संभावनाओं को खत्म करना बताया जा रहा है. परीक्षाओं के रद्द होने से उन अभ्यर्थियों को झटका लगा है, जो लंबे समय से इन भर्तियों की तैयारी कर रहे थे. अब संबंधित परीक्षाओं के भविष्य और नई भर्ती प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों की नजर सरकार तथा संबंधित आयोग के अगले फैसले पर है.
छह भर्ती परीक्षाएं फिलहाल स्थगित
जिन भर्ती परीक्षाओं का शुरुआती काम TDPL के अलावा किसी दूसरी एजेंसी ने किया था, उन्हें फिलहाल अगले आदेश तक स्थगित रखने का फैसला किया गया है. इनमें फूड एनालिस्ट, डिप्टी डायरेक्टर (प्रॉसीक्यूशन), प्रोजेक्ट मैनेजर, फैक्ट्री इंस्पेक्टर, बॉयलर इंस्पेक्टर और डायरेक्टर की भर्तियां शामिल हैं. सरकार ने इन परीक्षाओं में शामिल एजेंसियों की विश्वसनीयता और क्रेडेंशियल्स की जांच की जिम्मेदारी CID को सौंपी है. यानी इन परीक्षाओं को तत्काल रद्द नहीं किया गया है, बल्कि जांच पूरी होने तक प्रक्रिया रोक दी गई है. जांच में यदि किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो सरकार आगे इन परीक्षाओं पर भी निर्णय ले सकती है. इससे इन भर्तियों में शामिल अभ्यर्थियों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है. अभ्यर्थियों को अब CID की जांच और सरकार के अगले आदेश का इंतजार करना होगा.
17 भर्ती परीक्षाओं की CID जांच
सरकार ने कई पुरानी भर्ती परीक्षाओं की जांच भी CID से कराने का निर्णय लिया है. इनमें 5वीं संयुक्त सिविल सेवा भर्ती परीक्षा 2013, सिविल जज भर्ती, मृदा संरक्षण अधिकारी, कृषि अधिकारी, फूड सेफ्टी ऑफिसर, डेंटिस्ट, भूविज्ञानी-रसायनज्ञ, सहायक अभियंता और डेंटल डॉक्टर जैसी परीक्षाएं शामिल हैं. कुल 17 भर्ती परीक्षाओं की जांच कराने का फैसला किया गया है. जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि इन परीक्षाओं के आयोजन, प्रश्नपत्र, मूल्यांकन, चयन प्रक्रिया या नियुक्तियों में किसी तरह की अनियमितता हुई थी या नहीं. CID की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होने की संभावना है. जांच का दायरा बढ़ने से उन अभ्यर्थियों और नियुक्त कर्मचारियों की चिंता भी बढ़ी है, जो इन परीक्षाओं के जरिए चयनित हुए थे. सरकार के फैसले से भर्ती प्रक्रिया की पुरानी व्यवस्थाओं की भी समीक्षा शुरू हो गई है.
JPSC और JSSC में फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रस्ताव
भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवादों के बीच सरकार ने न्यायिक प्रक्रिया को तेज करने की दिशा में भी कदम उठाया है. कैबिनेट बैठक में JPSC और JSSC में अनियमितता तथा कथित धांधली से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन को लेकर हाईकोर्ट से अनुरोध करने का निर्णय लिया गया है. सरकार का मानना है कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों का जल्द निपटारा होने से अभ्यर्थियों और नियुक्त कर्मचारियों के बीच लंबे समय से बनी अनिश्चितता कम हो सकती है. इसके साथ ही आयोगों में आंतरिक निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने का फैसला लिया गया है. इसके लिए JPSC और JSSC में आंतरिक निगरानी प्रकोष्ठ गठित किया जाएगा. यह प्रकोष्ठ भर्ती प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में निगरानी और संभावित अनियमितताओं की पहचान करने में भूमिका निभाएगा.
भर्ती व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए समिति
सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं की पूरी व्यवस्था में सुधार के लिए IAS अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने का निर्णय भी लिया है. समिति भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी मौजूदा व्यवस्था का अध्ययन कर उसमें आवश्यक सुधार के सुझाव देगी. इसमें परीक्षा संचालन, एजेंसियों के चयन, प्रश्नपत्र की सुरक्षा, मूल्यांकन प्रक्रिया और निगरानी जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान दिए जाने की उम्मीद है. JPSC और JSSC की भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है. सरकार का लक्ष्य ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें परीक्षाओं की पारदर्शिता और अभ्यर्थियों का भरोसा मजबूत हो. आने वाले समय में समिति की सिफारिशों के आधार पर भर्ती परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं. फिलहाल अभ्यर्थियों की नजर रद्द, स्थगित और जांच के दायरे में आई परीक्षाओं पर टिकी है.

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