रांची में आज निकलेगी भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा, 25 जुलाई तक चलेगा ऐतिहासिक रथ मेला
रांची के ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर में भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा आज शाम निकलेगी. सुबह से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ दर्शन के लिए उमड़ी हुई है. रथयात्रा के साथ 25 जुलाई तक चलने वाले रथ मेले का भी शुभारंभ हो गया है.

रांची के ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर में भगवान जगन्नाथ की वार्षिक रथयात्रा का शुभारंभ आज पूरे धार्मिक उत्साह और भक्ति के माहौल में हो रहा है. सुबह तड़के से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचने लगे, जिससे दर्शन के लिए लंबी कतारें देखने को मिलीं. भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के दर्शन के बाद शाम को भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी, जिसमें हजारों श्रद्धालु रथ खींचकर अपनी आस्था व्यक्त करेंगे. इस अवसर पर मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना, मंगल आरती, भोग और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया है. रथयात्रा के साथ ही प्रसिद्ध रथ मेला भी शुरू हो गया है, जो 25 जुलाई तक चलेगा. आयोजन को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए प्रशासन ने सुरक्षा, ट्रैफिक और भीड़ नियंत्रण के व्यापक इंतजाम किए हैं, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के इस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन में शामिल हो सकें.
सुबह से उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, विशेष पूजा-अर्चना संपन्न
जगन्नाथपुर मंदिर में सुबह 3 बजे से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया. मंदिर में भगवान के दर्शन के लिए लंबी कतारें लगीं और सुबह विशेष पूजा, आरती तथा धार्मिक अनुष्ठानों के साथ दिन की शुरुआत हुई. भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का विशेष श्रृंगार किया गया तथा पारंपरिक भोग अर्पित किया गया. दोपहर तक श्रद्धालुओं को दर्शन का अवसर दिया गया, जिसके बाद रथयात्रा की तैयारियां शुरू हुईं.
शाम 5 बजे निकलेगी भव्य रथयात्रा
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की रथयात्रा शाम 5 बजे शुरू होगी. श्रद्धालु पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ विशाल रथ को खींचते हुए भगवान को मौसीबाड़ी तक पहुंचाएंगे. यात्रा के दौरान धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन और आरती का आयोजन भी होगा. रथयात्रा के बाद भगवान कुछ दिनों तक मौसीबाड़ी में विराजमान रहेंगे और 25 जुलाई को घुरती रथयात्रा के माध्यम से पुनः मंदिर लौटेंगे.
सीमित लोगों को मिलेगा रथ पर रहने का अवसर
रथयात्रा के दौरान रथ पर केवल निर्धारित संख्या में ही लोगों को रहने की अनुमति दी गई है. इनमें राज्य के प्रमुख संवैधानिक पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, मंदिर प्रबंधन से जुड़े प्रमुख सदस्य और पुजारी शामिल रहेंगे. इसका उद्देश्य धार्मिक परंपराओं का पालन करने के साथ-साथ सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखना है. रथ के आसपास भी केवल अधिकृत कर्मियों को ही तैनात किया जाएगा.
सुरक्षा के लिए प्रशासन के कड़े इंतजाम
लाखों श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था लागू की है. पूरे मेला क्षेत्र में बड़ी संख्या में पुलिस बल और निजी सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है. निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन का उपयोग किया जाएगा, जबकि भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन सेवाओं के लिए अलग-अलग टीमें सक्रिय रहेंगी. प्रशासन ने श्रद्धालुओं से भी सुरक्षा नियमों का पालन करने की अपील की है.
25 जुलाई तक विशेष ट्रैफिक प्लान लागू
रथयात्रा और मेले के दौरान शहर में विशेष यातायात व्यवस्था लागू रहेगी. विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले वाहनों के लिए अलग-अलग पार्किंग स्थल निर्धारित किए गए हैं. मेला क्षेत्र के आसपास कई मार्गों पर सामान्य वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी और वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करना होगा. प्रशासन का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य श्रद्धालुओं की सुविधा बनाए रखना और ट्रैफिक जाम से बचाव करना है. जो लोग रथयात्रा या मेले में शामिल होने जा रहे हैं, उन्हें यात्रा से पहले निर्धारित ट्रैफिक रूट और पार्किंग व्यवस्था की जानकारी अवश्य लेनी चाहिए.

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